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मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन

मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन

0 डॉ. वेदप्रताप वैदिक / 2010/10/01 3:32 pm

यदि कार्ल मार्क्स अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे| वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें| बंगाल

स्वतंत्रता बेमानी है !

स्वतंत्रता बेमानी है !

1 अमित कुमार मीत / 2010/08/21 2:02 pm

63 साल बाद भी तिरंगा शान से लाल किले कि प्राचीर पर लहर रहा है.तिरंगे के लहरने का कारण वादियों में चलने वाली हवा है न कि हमारा जोश.वो निरंतर

समस्याओं की जननी है भ्रष्टाचार

समस्याओं की जननी है भ्रष्टाचार

1 अरविन्द विद्रोही / 2010/08/18 4:53 pm

नक्सली नेता कोबाड गाँधी की गिरफतारी,आजाद की तथाकथित मुठभेठ में मौत नक्सलवाद के विस्तार के कारणों एवं उद्देश्यों को प्रचारित-प्रसारित करने में मील का पत्थर साबित हो चुकी है ।दिल्ली

कश्मीर-स्वायत्तता बनाम विस्थापितों की समस्या ?

कश्मीर-स्वायत्तता बनाम विस्थापितों की समस्या ?

2 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/08/18 4:29 pm

इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि कश्मीर का अन्तर्राष्ट्रीयकरण करने के लिये बहुत कुछ तत्कालीन प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू की अपरिपक्वता एवं अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में उनकी

सोने की चिडिया की स्वाधीनता और काँग्रेसी लुटेरे

सोने की चिडिया की स्वाधीनता और काँग्रेसी लुटेरे

3 Deshi Vicharak / 2010/08/15 8:05 am

हम भारत के लोग बडे ही हर्षोल्लास से १५ अगस्त को स्वाधीनता दिवस मनाते हैं, लेकिन हममें से बहुत कम लोगों को यह भान होगा कि इससे एक दिन पूर्व यानि १४ अगस्त १९४७ को

अखण्ड भारत का विचार

अखण्ड भारत का विचार

0 सुमित श्रीवास्तव / 2010/08/14 9:47 pm

आज 14 अगस्त है। हम सब ‘अखण्ड भारत दिवस’ मना रहे है। अखण्ड भारत को लेकर अनेक जगह संगोष्ठी, निबंध प्रतियोगिता एवं व्याख्यानमालाएं आयोजित की जा रही है, पर्चे बांटे

15 अगस्त को घाटी में ‘काला दिवस’

15 अगस्त को घाटी में ‘काला दिवस’

1 सुमित श्रीवास्तव / 2010/08/13 6:30 pm

हुर्रियत नेता अली शाह गिलानी ने कश्मीरियों से कहा है कि वे पाकिस्तान के स्वतंत्रता दिवस (14 अगस्त) को ‘एकता दिवस’ और भारत के स्वतंत्रता दिवस (15 अगस्त) को ‘काला

कश्मीर: समस्या और समाधान

कश्मीर: समस्या और समाधान

7 विजय कुमार / 2010/08/11 11:53 pm

कश्मीर घाटी एक बार फिर सुलग रही है। उमर अब्दुल्ला, महबूबा मुफ्ती या अन्य सेकुलरों के अनुसार इसका कारण है सेना की ज्यादती। उनकी राय है कि सेना को यदि

अब युद्ध छेड़ना होगा

अब युद्ध छेड़ना होगा

0 विजय कुमार / 2010/08/10 11:02 pm

” संघर्ष, मुठभेड़ और युद्ध “ सामान्य रूप से ये तीनों शब्द लगभग एक से लगते हैं; पर इनमें बड़ा अंतर है। ये अलग-अलग संदर्भ में प्रयोग होते हैं और इसीलिए

स्वतंत्र भारत

स्वतंत्र भारत

0 अजय केशरी / 2010/08/08 5:03 pm

१५ अगस्त १९४७ दिन शुक्रवार को दो सौ सालों से जंजीरों में कैद भारत आज अपनी बेड़ियों को तोड़ कर आज़ादी क़ा जश्न मना रहा है, खुली फिजा में सांश