सेक्स चिंतन -7
1प्रिय आत्मन ! सेक्स चिंतन की कड़ियाँ पिछले कुछ महीनों से जुड़ नहीं पा रही थी | आज थोड़ी फुरसत में कुछ मानवोपयोगी तथ्यों के आलोक में इस श्रृंखला को
आज लिखने तो बैठ गया हूँ, पर अपने को यह समझा नहीं पा रहा हूँ की आखिर आज का विषय क्या होगा ? कुछ सोचने की कोशिश करता हूँ तो
खुशी मनाने के कुछ बिन्दु 1- आपके परिवार के बेटे-बेटी मानने लगें कि उनका जन्म आपके परिवार की अभिलाषा नहीं वरन् उन बच्चों के माता-पिता के शारीरिक सुखों की परिणति
गरीबी और अमीरी दोनों ही मनुष्य को अंधविश्वास की तरफ धकेलते हैं। गरीब अपनी गरीबी से कैसे निजात पाए और अमीर सब ऐशो-आराम के बाद भी सकून की नींद कैसे
प्रिय आत्मन ! सेक्स चिंतन की कड़ियाँ पिछले कुछ महीनों से जुड़ नहीं पा रही थी | आज थोड़ी फुरसत में कुछ मानवोपयोगी तथ्यों के आलोक में इस श्रृंखला को
आज लिखने तो बैठ गया हूँ, पर अपने को यह समझा नहीं पा रहा हूँ की आखिर आज का विषय क्या होगा ? कुछ सोचने की कोशिश करता हूँ तो
खुशी मनाने के कुछ बिन्दु 1- आपके परिवार के बेटे-बेटी मानने लगें कि उनका जन्म आपके परिवार की अभिलाषा नहीं वरन् उन बच्चों के माता-पिता के शारीरिक सुखों की परिणति
गरीबी और अमीरी दोनों ही मनुष्य को अंधविश्वास की तरफ धकेलते हैं। गरीब अपनी गरीबी से कैसे निजात पाए और अमीर सब ऐशो-आराम के बाद भी सकून की नींद कैसे
भारत पर जबरन थोपे गये राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचन्द गाँधी के जीवन पर इंगलैण्ड के सुप्रसिद्ध इतिहासकार जेड ऐडम्स ने अपने पंद्रह वर्ष के लम्बे अध्ययन और गहन शोधों के आधार
क्या राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी असामान्य सेक्स व्यवहार वाले अर्द्ध.दमित सेक्स मैनियॉक थे ? जी हां, महात्मा गांधी के सेक्स.जीवन को केंद्र बनाकर लिखी गई किताब “ Gandhi : Naked
बाजारवाद के आगे आज सब कुछ गौण हो चुका है। आमखास इसकी गिरफ्त में हैं। मीडिया भी इससे अछूता नहीं। अपने को बाजार में बनाए रखने के लिए मीडिया बाजारवाद
सेक्स चिंतन की पिछली कड़ियों में सेक्स पर विमर्श के लायक भूमिका तैयार हो चुकी है . आगे सेक्स के विभिन्न सामाजिक सन्दर्भों और बुनियादी सवालों को केंद्र में रख
सेक्स और समाज की अब तक प्रकाशित कड़ियों को आप सुधीजनों की खूब सराहना मिली है . दरअसल ,प्रचलित धारणाओं से हटकर लिखने -बोलने पर बहुत कम प्रशंसा मिलती है
पिछले दिनों कई पोस्ट में मैंने सेक्स और समाज को मुद्दा बना कर लिखा .आम तौर पर लोगों ने मज़े लेने के लिए पढ़े और वाहवाही कर चलते बने . हाँ कुछेक साथियों ने बहस में भाग लेने की कोशिश जरुर की जो कामयाब न हो पाई . सेक्स की बात सुन कर हम मन ही मन रोमांचित होते हैं .जब भी मौका हो सेक्स की चर्चा में शामिल होने से नहीं चूकते .इंटरनेट पर सबसे अधिक सेक्स को हीं सर्च करते हैं . लेकिन हम इस पर स्वस्थ संवाद /चिंतन/ मंथन करने से सदैव घबराते रहे हैं और आज भी घबराते हैं