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Tag Archives: sex in indian philosophy

खुले आम सजता..देह का बाज़ार……

खुले आम सजता..देह का बाज़ार……

शाम हुई सज गए……… कोठों के बाज़ार, मन का गाहक न मिला बिका बदन सौ बार। ये शेर मैंने एक बार किसी कवि सम्मलेन में सुना था,जिसमे मुझे कई नामचीन… Read more »

गाँधी का उन्मुक्त या नाटकीय सेक्स जीवन

गाँधी का उन्मुक्त या नाटकीय सेक्स जीवन

भारत पर जबरन थोपे गये राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचन्द गाँधी के जीवन पर इंगलैण्ड के सुप्रसिद्ध इतिहासकार जेड ऐडम्स ने अपने पंद्रह वर्ष के लम्बे अध्ययन और गहन शोधों के आधार… Read more »

क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?

क्या बापू अर्ध-दमित सेक्स मैनियॉक थे ?

क्या राष्ट्रपिता मोहनदास कर्मचंद गांधी असामान्य सेक्स व्यवहार वाले अर्द्ध.दमित सेक्स मैनियॉक थे ? जी हां, महात्मा गांधी के सेक्स.जीवन को केंद्र बनाकर लिखी गई किताब “ Gandhi : Naked… Read more »

सेक्स चिंतन – 6

सेक्स चिंतन – 6

सेक्स चिंतन की पिछली कड़ियों में सेक्स पर विमर्श के लायक भूमिका तैयार हो चुकी है . आगे सेक्स के विभिन्न सामाजिक सन्दर्भों और बुनियादी सवालों को केंद्र में रख… Read more »

सेक्स चिंतन – 5

सेक्स चिंतन – 5

सेक्स और समाज की अब तक प्रकाशित कड़ियों को आप सुधीजनों की खूब सराहना मिली है . दरअसल ,प्रचलित धारणाओं से हटकर लिखने -बोलने पर बहुत कम प्रशंसा मिलती है… Read more »

सेक्स चिंतन – 4

सेक्स चिंतन – 4

पिछले दिनों कई पोस्ट में मैंने सेक्स और समाज को मुद्दा बना कर लिखा .आम तौर पर लोगों ने मज़े लेने के लिए पढ़े और वाहवाही कर चलते बने . हाँ कुछेक साथियों ने बहस में भाग लेने की कोशिश जरुर की जो कामयाब न हो पाई . सेक्स की बात सुन कर हम मन ही मन रोमांचित होते हैं .जब भी मौका हो सेक्स की चर्चा में शामिल होने से नहीं चूकते .इंटरनेट पर सबसे अधिक सेक्स को हीं सर्च करते हैं . लेकिन हम इस पर स्वस्थ संवाद /चिंतन/ मंथन करने से सदैव घबराते रहे हैं और आज भी घबराते हैं .

सेक्स चिंतन – 3

सेक्स चिंतन – 3

सेक्स और समाज का सम्बन्ध ऐसा बन गया है जैसे समाज का काम सेक्स पर पहरा देने का है , सेक्स को मानव से दूर रखने का है . क्या वास्तव में समाज में सेक्स के लिए घृणा का भाव है ? क्या समाज आरम्भ से ऐसा था ? नहीं , ऐसा नहीं है . सेक्स यांनी काम घृणा का विषय नहीं होकर आनंद का और परमात्मा को पाने की ओर पहला कदम है . आप भी सोचते होंगे कि जब काम इतना घृणित क्रिया है ,भाव है तो पवित्र देवालयों , प्राचीन धरोहरों आदि की मंदिर के प्रवेश द्वार या बाहरी दीवारों पर काम भावना से ओत-प्रोत मैथुनरत मूर्तियाँ अथवा चित्र आदि क्यों हैं ?

यौन शिक्षा – चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रिया

यौन शिक्षा – चुनौतीपूर्ण किन्तु आवश्यक प्रक्रिया

‘यौन शिक्षा’, यदि इसके आगे कुछ भी न कहा जाये तो भी लगता है कि किसी प्रकार का विस्फोट होने वाला है। हमारे समाज में ‘सेक्स’ अथवा ‘यौन’ को एक ऐसे विषय के रूप में सहज स्वीकार्यता प्राप्त है जो पर्दे के पीछे छिपाकर रखने वाला है; कहीं सागर की गहराई में दबाकर रखने वाला विषय है।

वर्जिन की तलाश जीवन की एक कड़वी सच्चाई

वर्जिन की तलाश जीवन की एक कड़वी सच्चाई

" वर्जिन की तलाश " यह किसी मोबाईल का एड नहीं है बल्कि जीवन की एक कड़वी सच्चाई है। आज की इस दौड़ती भागती जिंदगी और पर्यावरण में घुलते रासायनिक… Read more »

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