सेक्स चिंतन
2इतनी आपा-धापी और उथल-पुथल भरे राजनितिक व आर्थिक परिदृश्य में बांकी चिन्ताओ से परे ‘सेक्स चर्चा ‘ -स्त्री विमर्श की आड़ में खूब फल- फूल रहा है। क्या आउटलुक और
शाम का वक्त था। समाचार पत्र ‘सत्य’ के डाक संस्करण को अंतिम रूप देने में समाचार संपादक त्रिभुवन जी पूरे जोश खरोश से लगे थे। आम दिनों की तरह आज
लेखक – शिवेंद्र सिंह चौहान बेटे के साथ पोगो चैनल पर तकेशीज़ कासल देख रहा था। राक्षस जैसा दिखने वाला एक आदमी मरियल लेकिन खुद को फन्ने खां समझने वाले कंटेस्टेंट्स
प्रख्यात पत्रकार प्रभाष जोषी ने आहत हो कर इलैक्ट्रोनिक मीडिया के सनसनी और अश्लीलता फैलाने के सवाल पर कहा था कि अगर तुम राखी का स्वयंवर दिखाओगे तो तुम्हें सुहागरात और प्रसव
इतनी आपा-धापी और उथल-पुथल भरे राजनितिक व आर्थिक परिदृश्य में बांकी चिन्ताओ से परे ‘सेक्स चर्चा ‘ -स्त्री विमर्श की आड़ में खूब फल- फूल रहा है। क्या आउटलुक और