Post Tagged with: "sex and society"

सेक्स चिंतन -7

सेक्स चिंतन -7

1 जयराम "विप्लव" / 2010/09/12 11:55 am

प्रिय आत्मन ! सेक्स चिंतन की कड़ियाँ पिछले कुछ महीनों से जुड़ नहीं पा रही थी | आज थोड़ी फुरसत में कुछ मानवोपयोगी तथ्यों के आलोक में इस श्रृंखला को

खुले आम सजता..देह का बाज़ार……

खुले आम सजता..देह का बाज़ार……

3 पूजा सिंह आदर्श / 2010/09/04 11:21 am

शाम हुई सज गए……… कोठों के बाज़ार, मन का गाहक न मिला बिका बदन सौ बार। ये शेर मैंने एक बार किसी कवि सम्मलेन में सुना था,जिसमे मुझे कई नामचीन

क्या गलत है सेक्स शिक्षा  ?

क्या गलत है सेक्स शिक्षा ?

1 रोहित कश्यप / 2010/08/30 8:50 pm

आज लिखने तो बैठ गया हूँ, पर अपने को यह समझा नहीं पा रहा हूँ की आखिर आज का विषय क्या होगा ? कुछ सोचने की कोशिश करता हूँ तो

हाय रे फैशन के दीवाने मौसम भी ना पहचाने

हाय रे फैशन के दीवाने मौसम भी ना पहचाने

0 शंकर दत्त फुलारा / 2010/06/26 9:23 pm

उफ़ ये गर्मी और ये जींस की पेंट । क्या करें पहननी भी जरुरी है वरना ; बॉय या गर्ल फ्रेंड को और अन्य जानने वालों को “पर्सनेलिटी” कैसे दिखेगी।

आप बच्चों के बाप हैं अथवा बच्चे आपके बाप — तय करें

आप बच्चों के बाप हैं अथवा बच्चे आपके बाप — तय करें

0 कुमारेन्द्र / 2010/06/26 8:12 pm

खुशी मनाने के कुछ बिन्दु 1- आपके परिवार के बेटे-बेटी मानने लगें कि उनका जन्म आपके परिवार की अभिलाषा नहीं वरन् उन बच्चों के माता-पिता के शारीरिक सुखों की परिणति

हर घर बागबान

हर घर बागबान

2 अजय केशरी / 2010/06/14 9:12 pm

मेरा उनसे कोई खून का रिश्ता नहीं था फिर भी मै उनसे बराबर मिलता था घंटो मै उनसे बातें करता था उनको भी अच्छा लगता था मझसे बातें करना। मेरा

केवल सेरलीन को ही ढकोगे

केवल सेरलीन को ही ढकोगे

10 नरेन्द्र निर्मल / 2010/06/02 8:27 pm

हालिया कुछ दिनों पहले एक अजीबो गरीब एफएम का प्रशारण सुना, सुनकर हास्यास्पद भी लगा। क्योंकि जिनके मुंह से सुना वह काफी वल्गर उच्चारण कर रहे थे। हम बात कर

नकारात्मक सोच का नतीजा है गर्ल्स ट्रैफिकिंग

नकारात्मक सोच का नतीजा है गर्ल्स ट्रैफिकिंग

0 लीना / 2010/05/11 5:18 pm

बेटियां यानी जननी प्रकृति की, सृष्टि को चलाने वाली, बढ़ाने वाली। सदियों से हमारे समाज में देवियो की तरह पूजी भी जाती रही हैं। पर दूसरी ओर समाज में उन्हें

पंडिताईन बुढिया पगला गई है

पंडिताईन बुढिया पगला गई है

1 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/05/10 12:21 pm

सुभाषचंद्र बोस ने एक बार कहा था कि जीवन में कोई चीज़ इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना । आज विभिन्न चैनलों पर जो धारावाहिक प्रसारित

मिस काल से शुरू हुआ प्यार कहीं भारी न पड़ जाए

मिस काल से शुरू हुआ प्यार कहीं भारी न पड़ जाए

3 के .पी. त्रिपाठी / 2010/05/09 2:03 pm

तेज बारिश, रात का घना अंधेरा, अंजान शहर और उस शहर की तमाम सड़कों पर भरा पानी, ऐसे में एक जवान खूबसूरत लड़की उस अजनबी शहर में अपने एक ऐसे