चिलमन को जलाता सूचना का अधिकार
3चिलमन न केवल कुरूपता को ढंकता है बल्कि रहस्यों को भी छिपाता है, जिसके परिणामस्वरूप उत्सुकता की प्यास भी और भी बढ़ती है।चिलमन अर्थात् पर्दा पारदर्शी या अपारदर्शी भी हो
भारत की वर्तमान स्थिति ऐसी है जिसे राजनेताओं द्वारा जनता की लूट कहा जा सकता है, इसी लूट को भारत की वर्तमान ‘राजनीति‘ कहा जा सकता है. ऐसी स्थिति में
(जिन्हें भारत एक गड़रियों का देश था पढ़ाया गया है जिन्हें ये पढाया गया है कि हिन्दू धर्म ग्रंथों में केवल कहानिया हैं और कुछ नहीं, कैसे युवा हैं आप
उपसंहार जब किसी देश का समाज आर्थिक और भौतिक ही नहीं नैतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध हो, जब किसी देश के युवा मस्तिष्क से प्रतिभाशाली, शरीर से बलिष्ठ
चिलमन न केवल कुरूपता को ढंकता है बल्कि रहस्यों को भी छिपाता है, जिसके परिणामस्वरूप उत्सुकता की प्यास भी और भी बढ़ती है।चिलमन अर्थात् पर्दा पारदर्शी या अपारदर्शी भी हो
भारत की वर्तमान स्थिति ऐसी है जिसे राजनेताओं द्वारा जनता की लूट कहा जा सकता है, इसी लूट को भारत की वर्तमान ‘राजनीति‘ कहा जा सकता है. ऐसी स्थिति में
(जिन्हें भारत एक गड़रियों का देश था पढ़ाया गया है जिन्हें ये पढाया गया है कि हिन्दू धर्म ग्रंथों में केवल कहानिया हैं और कुछ नहीं, कैसे युवा हैं आप
उपसंहार जब किसी देश का समाज आर्थिक और भौतिक ही नहीं नैतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध हो, जब किसी देश के युवा मस्तिष्क से प्रतिभाशाली, शरीर से बलिष्ठ
63 साल बाद भी तिरंगा शान से लाल किले कि प्राचीर पर लहर रहा है.तिरंगे के लहरने का कारण वादियों में चलने वाली हवा है न कि हमारा जोश.वो निरंतर
पश्चकथन 1996 से मैंने देश की समस्याओं के समाधान के बारे में लिखना शुरु किया. मैं ‘ऐसा होना चाहिये’, ‘वैसा होना चाहिये’ की शैली में लिख रहा था. तब मैं
44. नागरिक पहचानपत्र 44.1 पहचानपत्र दो प्रकार के होंगे- ‘भारतीय नागरिक पहचानपत्र’ और ‘भारतीय सीमित नागरिकता पहचानपत्र’ (विस्तृत व्याख्या अध्याय 13 में।) 44.2 नागरिकों को जारी होने वाले बहुद्देशीय पहचानपत्र
लेखिका : – मांडवी शर्मा भारत एक विशालतम, कृषि प्रधान एवं संसाधनों से संपन्न देश है! पृथ्वी पर अगर किसी अन्य देश या जगह को देखे तो पायगे कि इस
43. विविध 43.1 मुख्य चुनाव आयुक्त को कार्यपालिका का प्रधान माना जाएगा और इनकी सहमती, अनुमति या आदेश पर ही सरकारी कर्मचारियों / अधिकारियों का स्थानान्तरण किया जाएगा। 43.2 केन्द्रीय
किसी भी लोकतान्त्रिक देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होना ही चाहिए। फिर भी इस विषय पर बार-बार विवाद खड़े होते हैं। प्रायः लोग इसे राजनीति में घसीटकर इस या उस