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” भारत की  जनगणना 2011 ” एक नज़र

” भारत की जनगणना 2011 ” एक नज़र

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/27 5:18 pm

” भारत की जनगणना 2011 ” काफी चर्चा में है | जाती के आधार को लेकर राजनीतिक बबाल मचा हुआ है जबकि अभी तक कोई निश्चित फैसला सरकार की ओर

मुद्दे और भी हैं ! जाति क्या है

मुद्दे और भी हैं ! जाति क्या है

1 लीना / 2010/07/23 2:42 pm

जातिगत जनगणना के बहाने इन दिनों जाति पर ही बहस छिड़ी है। अच्छी बात है। पर विरोध हो रहा है सिर्फ जातिगत जनगणना को लेकर। धरना प्रदर्शन हो रहे हैं,

तुम, झाड़ू पोछा लगाओ, खाना हम पकवा लेंगे !

तुम, झाड़ू पोछा लगाओ, खाना हम पकवा लेंगे !

1 संजय कुमार / 2010/07/22 7:21 pm

फूलवा को यकीन नहीं हो रहा था, जब उसे पंचायत के गांव में सरकारी योजना मिड-डे-मील के लिए बच्चों का खाना बनाने वाले रसोईये के तौर पर सरकारी मुलाजिम बनाया

जाति विभेद की मानसिकता को हटाना जरूरी है

जाति विभेद की मानसिकता को हटाना जरूरी है

1 कुमारेन्द्र / 2010/07/21 3:49 pm

समाज की स्थापना के समय से ही जाति की अवधारणा किसी न किसी रूप में मौजूद रही थी, भल ही हम इसे वर्ग के रूप में स्वीकार करते हों। पूर्व

अल्पसंख्यक जातियां हासिये पर चली जाएँगी !

अल्पसंख्यक जातियां हासिये पर चली जाएँगी !

7 जयराम "विप्लव" / 2010/07/21 3:40 pm

देश भर में जाति आधारित जनगणना पर जोरदार बहस चल रही है | समर्थन और विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं | एक ओर ” मेरी जात हिन्दुस्तानी ”

जनगणना और जाति की जटिलताएं

जनगणना और जाति की जटिलताएं

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/21 2:37 pm

लेखक : - श्रीकांत ‘कहत भिखारी नाइ, कवन करी उपाई । मुंहवा के तोहरे दुलरवा हो बबुआ, कुतुबपुर हउवे ग्राम ,रामजी संवार काम , जाति के हजाम जिला छपरा हो बबुआ

जाति न पूछो साधु की

जाति न पूछो साधु की

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/21 11:06 am

कबीर का दोहा जाति न पूछो साधु की , पूंछ लीजिये ज्ञान अब पुराना हुआ . जमाना ज्ञान की पूंछ परख का नही है . जमाना नेता जी की पूंछ

जनगणना में जाति की जगह पिछड़ेपन को आधार बनाया जाए |

जनगणना में जाति की जगह पिछड़ेपन को आधार बनाया जाए |

0 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/07/20 10:12 am

आज के समय मे जाति की बात को हम भारतीयों से अलग कर के नही रखा जा सकता है । भारत में जाति आधारित जनगणना इस समय चर्चा में है।

आरक्षण, धर्मनिरपेक्षता एवं अल्पसंख्यकों का विरोध असंवैधानिक!

आरक्षण, धर्मनिरपेक्षता एवं अल्पसंख्यकों का विरोध असंवैधानिक!

2 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/07/19 7:34 pm

सर्वप्रथम हमें यह समझना होगा कि हमारे देश के विभाजन के समय हमारे तत्कालीन नेतृत्व ने सभी धर्मावलम्बियों तथा आदिवासियों एवं दलितों को आश्वस्त किया था कि वे भारत में

वैदिकी जाति जाति न भवतिः……….

वैदिकी जाति जाति न भवतिः……….

4 संजय कुमार / 2010/07/19 6:50 pm

जनगणना से जात हटाओ के नारे के साथ कुछ तथाकथित बिना जात के लोगों ने उपवास और धरना दिया है। चलिये, इस जनत्रंत में सबको कुछ भी कहने-करने की आजादी