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पर्यावरण का करों ख्याल……..

पर्यावरण का करों ख्याल……..

2 जितेन्द्र कुमार नामदेव / 2011/06/04 9:07 pm

पर्यावरण दिवस पर विशेष  दुनिया भर में 5 जून का दिन विश्व पर्यावरण दिवस के रूप में मनाया जाता है। 1973 में सबसे पहले अमेरिका में विश्व पर्यावरण दिवस के

पतन की ओर अग्रसर भारतीय कृषि

पतन की ओर अग्रसर भारतीय कृषि

0 ब्रज किशोर सिंह / 2010/07/26 10:00 am

कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य पदार्थों के उत्पादन से सम्बंधित है.मानव सभ्यता के इतिहास में कृषि की खोज को इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि इसे नवपाषाणकालीन क्रांति

रासायनिक खेती से उपज बढ़ने का झूठ !

रासायनिक खेती से उपज बढ़ने का झूठ !

0 डॉ राजेश कपूर / 2010/07/25 8:16 am

56 से घटकर 30 क्विंटल रह गई यानि ये दावे पूरी तरह गलत हैं, झूठे हैं कि उपज बढ़ाने के लिए रासायनिक खेती की जरूरत है। सच तो यह है

बन्दरों को भोजन न दें !

बन्दरों को भोजन न दें !

1 डॉ राजेश कपूर / 2010/07/24 5:16 pm

सरकार के आह्वान पर ध्यान देना चाहिए। खेती को खत्म करने की अनेक योजनाओं में से एक हैं बन्दरों का सदुपयोग। हजारों साल से किसान और बन्दर दोनों अपने-अपने अस्तित्व

मोनसेंटो के विनाशकारी मक्का बीज

मोनसेंटो के विनाशकारी मक्का बीज

0 डॉ राजेश कपूर / 2010/07/19 2:51 pm

विनाशकारी ‘‘बीटी कॉटन ’’ बीज की निर्माता कम्पनी मौनसेण्टों ने हिमाचल में भी अपने पांव तेजी से पसारने शुरू कर दिये हैं। ‘‘डिकाल्ब’’ नामक मक्का बीज मण्डी, हमीरपुर के बाद

गंगा रक्षा, भारत रक्षा, अभी वक्त है चेतो भारतवासियो

गंगा रक्षा, भारत रक्षा, अभी वक्त है चेतो भारतवासियो

1 राजेश त्रिपाठी / 2010/07/18 11:52 am

पुण्य सलिला सुरसरी, पतितपावनी, जगउद्धारिणी गंगा जिसका हर भारतवासी से जन्म से लेकर मरण तक का अटूट नाता है।  जिसे श्रद्धा से  गंगा मैया कह कर बुलाते हैं और जो जाने

सरकारी जल नीति की हकीकत

सरकारी जल नीति की हकीकत

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/01/21 5:59 pm

। हम भीतर बाहर से जल ही से जुड़े हुए हैं। पीने के लिए, खाद्यान्न उत्पादन के लिए, उद्योग, बिजली उत्पादन इत्यादि के लिए भी जल ही चाहिए। जैसे जल

सोलर वेली के साथ गोबर वेली भी बने

सोलर वेली के साथ गोबर वेली भी बने

3 जनोक्ति डेस्क / 2010/01/10 9:38 pm

भारत को गांवों का देश कहा जाता है. अर्थात भारत को पहचान देने वाली विशेषताओं एवं जीवनशक्ति प्रदान करने वाले कारकों की नींव ग्रामीण व्यवस्था पर टिकी होती है. भारत

अब नदियों का मिलन हुआ अधूरा

अब नदियों का मिलन हुआ अधूरा

0 जनोक्ति डेस्क / 2009/11/27 9:14 am

नदियाँ किसी भी देश की जीवनदायनी शक्ति होती है .भारत की 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी नदियों से ही अपनी अजीविका कमाने में सक्षम हो पाती है . वहीँ इस

यमुना किनारे विचरने के बहाने

यमुना किनारे विचरने के बहाने

0 उमेश पंत / 2009/10/12 4:14 pm

     नदियां हमेशा उस जगह को एक संस्कृति देती हैं जहां वो बह रही होती हैं। नदियों के साथ एक पूरा जीवन और उस जीवन के बरक्स लोगों की