मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन
0यदि कार्ल मार्क्स अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे| वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें| बंगाल
बिहार विधानसभा चुनाव की कुल 243 सीटों पर छह चरणों में मतदान संपन्न हुआ | इस चुनाव में सभी चरणों को मिला कर देखा जाए तो 52 फीसदी मतदाताओं ने
बिहार की राजनीति और चुनाव की जांच-पड़ताल कर रहे हैं संजय शर्मा बदलाव की इच्छा जब जब बलवती हुई है, बिहार के चुनाव का आधार जातिगत नहीं रहा . 1977
दीपावली का उल्लेख हो और दीपों की बात न हो, ये संभव नहीं है। अमावस की रात में आने वाली दीपावली को ये छोटे-छोटे दीप ही रोशन करते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं कि जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अँधेरे को दूर कर देता है, उसी तरह हमारा एक छोटा प्रयास भी एक दिन कोई बड़ा परिवर्तन ला सकता है। बस! मन में उत्साह और अपने संकल्प की पूर्ति के लिये लगन होनी चाहिये। दीपावली के इस अवसर पर दीपों की बात निकली, तो मुझे चाणक्य के जीवन का एक प्रसंग आ रहा है।
यदि कार्ल मार्क्स अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे| वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें| बंगाल
देश भर में नारी उत्थान (महिला अधिकार) की बात बड़े ही जोर-शोर से उठाई जा रही है लेकिन देश की अधिकाँश महिलाओं को सही मायनों में उनके मौलिक अधिकारों अथवा
हाल ही में रितेश शर्मा की एक डाक्यूमेंट्री फिल्म दिल्ली में प्रदर्शित की गई जिसमें देवदासी प्रथा जैसी ऐसी कुरीति पर सवाल उठाये गये जिसपर मेनस्ट्रीम मीडिया में आजकल मुश्किल
किसी फिल्म में सुना था , “ राजनीति में कोई किसी का दोस्त नहीं होता और ना ही दुश्मन ” ! सच ही तो है कौन , कब, किससे हाथ
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें तीन बड़े हिन्दू पर्व के बीच पड़ रही है | इस बात से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मत
चुनाव में दो तरह की चुनौती होती हैं एक तो जनता को रिझाने की और दूसरी बिखरते कुनबे को समेटने की। नेता और दल सही मायनों में वही कहलाता है
दौडा-दौडा भागा भागा सा….जी हां आज बिहार की राजनीति के हाल की चाल लगभग इसी तरह की हो चुकी है । चुनाव से पहले जितनी पैंतरेबाजी हो सकती है सब
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषक उहापोह की स्थति में हैं | कौन दल जीतेगा या कौन हारेगा ? बात केवल इतनी सी नहीं है | असल मुद्ददा है
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गये हैं | इसी के मद्देनजर भाजपा चुनाव समिति की दो दिवसीय बैठक पटना में हो रही है
बिहार में चुनाव का शंखनाद होने के बाद जाति के अपने-अपने समीकरण की चर्चा जोर पकडने लगी है । अब विकास की बात बिहार भी करता है लेकिन जाति के