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क्यों ना इतिहास दुबारा लिखा जाये ?

क्यों ना इतिहास दुबारा लिखा जाये ?

1 जयराम "विप्लव" / 2009/08/19 3:45 pm

जिन्ना लेकर उत्पन्न ताजा विवादों ने एक बार फ़िर इतिहास को कटघरे में ला खड़ा किया है । बात आडवानी की हो या जसवंत की मसले के पीछे प्रमाणिक इतिहास की जानकारी का अभाव है । अब तक के ज्ञात इतिहास की प्रमाणिकता को चुनौती देने का साहस हम भारतीयों में न के बराबर है ।दरअसल, हमारा इतिहास हमारा है हीं नही

21वीं सदी के गाँधी को विश्वपिता जो बनना है(प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र )

21वीं सदी के गाँधी को विश्वपिता जो बनना है(प्रधानमंत्री के नाम खुला पत्र )

3 जयराम "विप्लव" / 2009/08/11 3:54 pm

आदरणीय डा० मनमोहन सिंह जी ,
चरण कमलों में सादर प्रणाम !
मनमोहन सिंह जी आप के सम्बन्ध में कहते हुए होंठ हिलने लगते हैं , जीभ थरथराने लगती है । डर से नहीं बल्कि आप का व्यक्तित्व हीं इतना प्रभावशाली है ! २१ वी सदी के गाँधी , जन्म से भारतवंशी यानि भारतीय , कर्म से वैश्विक { क्योंकि वर्षों ऑक्सफोर्ड में अध्ययन और अध्यापन जो किया है }

बलूचिस्तान पर साझा बयान मनमोहन का नीतिगत बचकानापन

बलूचिस्तान पर साझा बयान मनमोहन का नीतिगत बचकानापन

0 जनोक्ति डेस्क / 2009/08/06 10:03 pm

                                                                                                      इतिहास में पृथ्वीराज चौहान का जिक्र एक वीर और दयावान सम्राट के रूप में हैं । किंतु उनकी यही चारित्रिक विशेषता उनके लिए अंततः घातक बनी । मोहम्मद गोरी

एक व्यंग्य : नेता जी और पंचतन्त्र

2 जनोक्ति डेस्क / 2009/08/01 5:09 pm

प्राचीन काल की बात है किसी नगरी में नेता जी नामक एक प्राणी रहा करते थे |उनके कार्यकाल में ,नगर में सर्वत्र शान्ति थी | नागरिक गण अपना-अपना कार्य बड़ी लगन व निष्ठा से कर रहे थे .किसी कार्य के लिए ‘सोर्स-पैरवी ‘ लगवाना एक निकृष्ट कार्य समझा जाता था। लोग अपनी योग्यता व दक्षता के बल से आगे बढ़ते थे।परस्पर प्रेम व भाई चारा व सौहार्द्र था।नेता जी प्राय: अपने निर्वाचन क्षेत्र में ही भ्रमणरत रहा करते थे।प्रगति की बात किया करते थे समस्यायें सुनते थे।

पांचाली के चीर हरण पर जो चुप पाए जाते हैं

0 जनोक्ति डेस्क / 2009/07/01 11:26 am

भारत भर में विस्फोटों का शोर सुनाई देता है, हिजबुल लश्कर के नारों का शोर सुनाई देता है, मलय समीर मौसम आदमखोर दिखाई देता है लालकिले का भाषण भी कमजोर