एकछत्र शासन का घोषणापत्र- 13
013. भारत की नागरिकता 13.1 जो भारतीय मूल के हैं (यानि जिनके पूर्वज भारतीय हैं), जिनका जन्म भारत में हुआ है और जो भारत में ही रहकर आजीविका प्राप्त कर
यहाँ पर यह स्पष्ट करना भी जरूरी है कि संसार में हिन्दू धर्म ही एकमात्र ऐसी जीवन पद्धति है जिसे किसी संप्रदाय विशेष के साथ नहीं जोड़ा जा सकता,जिसमें कभी
(ऐसे 21 सुधार जो भारतवर्ष को फिर से विश्व गुरु और सोने की चिड़ियाँ बना सकते हैं।) मेरी छोटी सी पृष्ठभूमि : मैं मीणा जाति और आदिवासी वर्ग का राजस्थान
पश्चकथन 1996 से मैंने देश की समस्याओं के समाधान के बारे में लिखना शुरु किया. मैं ‘ऐसा होना चाहिये’, ‘वैसा होना चाहिये’ की शैली में लिख रहा था. तब मैं
13. भारत की नागरिकता 13.1 जो भारतीय मूल के हैं (यानि जिनके पूर्वज भारतीय हैं), जिनका जन्म भारत में हुआ है और जो भारत में ही रहकर आजीविका प्राप्त कर
बीते दिनो बिहार को दो ऐसे लोगों को खोना पडा जिनकी आज के बिहार को बहुत ज्यादा जरूरत थी। धैर्य, अनुद्वेग, साहस, प्रसन्नता, दृढ़ता और समता की संतुलित स्थिति सदैव
आकाश तिवारी बाप रे बाप ऐसी मंहगाई जियेंगे कैसे भाई? कार से लेकर किचन तक मंहगाई मार गई चूल्हे पर खाना पकाओं, साइकिल खरीद लो भाई पहले क्या कम थी मंहगाई जो
11. उद्योग-व्यापार 11.1 बड़े और मँझोले व्यवसायिक/औद्योगिक घरानों को क्रमशः 10 तथा 7 वर्षों के लिये किसी भी नये उद्यम में पूँजी लगाने से रोक दिया जायेगा और इस अवधि
उफ़ ये गर्मी और ये जींस की पेंट । क्या करें पहननी भी जरुरी है वरना ; बॉय या गर्ल फ्रेंड को और अन्य जानने वालों को “पर्सनेलिटी” कैसे दिखेगी।
दुनिया के इतिहास के सबसे भयावह औद्योगिक हादसे ‘भोपाल गैस कांड’ के गुनहगार को कानूनी फैसले ने पीड़ितों की पहुंच से दूर कर दिया है. विपक्ष के तमाम हो-हल्ले और
देश को आज़ादी मिले आज ६२ साल हो गया लेकिन मुस्लिम समुदाई आज भी अल्पसंख्यक ही है अगर धर्म के नाम पर ही जनसँख्या कि गड़ना करनी है तो भारत
भारत का संविधान आज़ादी के बाद लिखी गई थी उस वक़्त देश में साक्षर लोगों कि संख्या कम थी इसलिए अनपढ़ और गवांर लोगों को भी विधान सभा या संसद
10. कृषि 10.1 जहाँ तक सम्भव होगा- बड़े पैमाने पर कृषि योग्य जमीन का किसी भी और काम के लिये इस्तेमाल नहीं होने दिया जायेगा. (रिहायशी या औद्योगिक नगर बसाने
इस फोटो ने भूचाल मचाया , राजनीती का हाल बताया। राजनीती में सभी है बन्दर, बचकर रहना ऐ कलंदर।। आज का राजनीत या राजनीतिज्ञ बड़ी तेजी से रंग बदलते जा