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आत्ममुग्धता की बढ़ती भावना खतरनाक है

आत्ममुग्धता की बढ़ती भावना खतरनाक है

0 दीपाली पाण्डेय / 2009/10/28 10:40 pm

  मानव स्वयं के होने के बोध यानि अहम् के साथ नहीं जन्म लेता हैं। अहं का भाव समय के की धारा के संग-संग दिलोदिमाग पर छा जाता है। यह

डिस्कसन कोई नया लफड़ा नहीं है

डिस्कसन कोई नया लफड़ा नहीं है

3 जनोक्ति डेस्क / 2009/10/18 5:31 am

 आज एक हिंदी ब्लॉग पर छपे पोस्ट में डिस्कसन की चर्चा पढ़ी .जिसमें हिंदी मीडिया वाले ग्लोबल वार्मिंग को लेकर प्रसारित होने वाले कार्यक्रम के लिए पैनल बना रहे हैं

आइये खोजें मानव जीवन के रहस्य को {भाग -१}

आइये खोजें मानव जीवन के रहस्य को {भाग -१}

1 जयराम "विप्लव" / 2009/10/17 6:45 pm

जीवन एक दौड़ है . वह  बेतहाशा भाग रहा है बगैर यह जाने कि किस ओर जा रहा है ? कुछ पा लेने की ख्वाहिश मन की उत्कंठा को बढ़ा