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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; naxalites</title>
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		<title>बिनायक सेन,नक्सलवाद और पिछड़ेपन की वजह</title>
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		<pubDate>Sat, 22 Jan 2011 20:37:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
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		<description><![CDATA[भाकपा (माओवादी) हिंसा में विश्वास रखने वाले तथाकथित कम्युनिस्टों का एक संगठन है जिन्होंने बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से 1967 में सशस्त्र क्रांतिकारी गतिविधियों का रास्ता अपनाया &#124; आज भारत के बीस राज्यों के 220 जिलों में नक्सलवादी सक्रिय हैं ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">भाकपा (माओवादी) हिंसा में विश्वास रखने वाले तथाकथित कम्युनिस्टों का एक संगठन है जिन्होंने बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से 1967 में सशस्त्र क्रांतिकारी गतिविधियों का रास्ता अपनाया | आज भारत के बीस राज्यों के 220 जिलों में नक्सलवादी सक्रिय हैं |  भारत के भौगोलिक क्षेत्र का लगभग 40 प्रतिशत भूभाग इनके आतंक से पीड़ित है  | इन तथाकथित नक्सलियों ने नक्सलवाद के पीछे की विचारधारा को खो दिया है और वे सिर्फ राज्य सत्ता से नाराज  बेरोजगार और आर्थिक रूप से पिछड़े लोगों को अपने मतलब के लिए हथियार बना कर परोक्ष सत्ता की मलाई मार रहे हैं |</p>
<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-12780" href="http://www.janokti.com/editorial-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95-%e0%a4%89%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%bf/attachment/binayak-sen-naxalites/"><img class="alignleft size-full wp-image-12780" title="binayak sen naxalites" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/binayak-sen-naxalites.jpg" alt="" width="316" height="212" /></a>नक्सलवाद भारत के लिए एक गंभीर समस्या है | हाल ही में, छत्तीसगढ़ की अदालत ने बिनायक सेन, राष्ट्रीय पीपुल्स यूनियन के उपाध्यक्ष (PUCL) को राज्य के खिलाफ लड़ाई में नक्सलियों की मदद करने के लिए राजद्रोह का दोषी पाया है | और सेन को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है | अदालत के निर्णय को मीडिया में , सोशल नेटवर्किंग साइटों पर, ब्लोग्स पर कुछ एक नक्सल कार्यकर्त्ता बिनायक सेन को लेकर मानव अधिकारों की चिल्ल-पों मचाये हुए हैं |</p>
<p style="text-align: justify;">बिनायक सेन नक्सलियों का पदाधिकारी हो भी सकता है और नहीं भी , लेकिन किसी ना किसी रूप में नक्सलियों के सहयोग का अपराध साबित हुआ है |  वरना जो अदालतें हत्यारों को फाँसी नहीं चढ़ा पाती है वो इस प्रकार जबरिया फैसला नहीं सुना सकती |  एक हद तक सेन की गिरफ्तारी से सजा सुनाये जाने तक इन शौकिया नक्सलियों का बौद्धिक विलास नक्सलवाद की अग्नि में घी डालने का काम कर रहा  है |</p>
<p style="text-align: justify;">इन्हीं तथाकथित-बुद्धिजीवियों की बिरादरी ने नक्सलियों द्वारा  दंतेवाड़ा में हमारे 76 जवानों की शहादत पर जेएनयू में जश्न मनाया था | ये वही लोग हैं जो गाजा पट्टी की हिंसा पर घडियाली आंसू तो बहाते फ़िरते हैं लेकिन इनके मुंह से नक्सलवाद और  आतंकवाद की  लड़ाई में मारे जाने वाले आम भारतीयों के नाम पर जीभ तालू में सट जाती है और आँखों का समंदर सूख जाता है |</p>
<p style="text-align: justify;">भारत की बिकाऊ मीडिया भी अपने मानवतावाद को साबित करने के लिए ऐसे देशद्रोहियों को टीवी स्टूडियो बुलाकर मंच सौंपने का पुन्य कर्तव्य निभा रही है |</p>
<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-12781" href="http://www.janokti.com/editorial-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95-%e0%a4%89%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%bf/attachment/naxalites/"><img class="alignright size-full wp-image-12781" title="naxalites" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/naxalites.bmp" alt="" /></a>इन समर्थकों पता है कि उनके सशस्त्र साथी अपने कैडर  में स्कूली बच्चों तक को शामिल करते हैं , आम लोगों की लड़ाई के नाम पर सरकारी विकास कार्यों का क्रियान्वयन नहीं होने देते , ठेकेदारों से लेवी वसूल कर अपनी कोठियां भरते हैं , दुश्मन देशों, जो  भारत के शांति और सद्भाव को नष्ट करना चाहते हैं , उनसे मिलकर देश को बर्बाद करने में लगे हुए हैं |</p>
<p style="text-align: justify;">हम भी गरीब किसान-मजदूरों के माथे से टपकती पसीने की बूंदों की कीमत जानते हैं , लेकिन उनकी दशा में सुधार राजकीय विकास से ही संभव है ना कि हथियार उठा कर जंगलों की खाक छानने से और अपने जैसे अन्य निहंगों को भी अपना शिकार बनाने से  |  नक्सलियों द्वारा उन सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को भी मौत के घाट उतार दिया जाता है जो शांति से क्षेत्र में सड़कों , विद्यालयों और स्वास्थ्य केन्द्रों की व्यवस्थित सेवा बहाल करना चाहते हैं |</p>
<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-12782" href="http://www.janokti.com/editorial-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%95-%e0%a4%89%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%9a/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%aa%e0%a4%bf/attachment/child-in-naxal-areas/"><img class="alignleft size-medium wp-image-12782" title="child in naxal areas" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/child-in-naxal-areas-300x217.jpg" alt="" width="300" height="217" /></a>झारखण्ड के पलामू जिले का मनातु प्रखंड आज शोषित और  पिछड़ा है तो इसके पीछे कोई और कारण नहीं है | इनके  आतंक की वजह से किसी ठेकेदार ने सड़क बनाने का टेंडर नहीं भरा है | स्थानीय नागरिक आवाजाही के लिए एक मात्र बस का उपयोग कर पाते हैं क्योंकि वो बस भी नक्सल समर्थित रंगदार के द्वारा चलाई जाती है | प्रखंड विकास पदाधिकारी की हत्या जब से हुई है कोई नया अधिकारी प्रभार लेने नहीं आया है | नक्सली आतंक के नाम पर शिक्षक से लेकर डॉक्टर तक वहां जाने से कतराते हैं | शाम को चाहह बजे के बाद कोई नागरिक घर से बाहर नहीं निकलता क्योंकि ना जाने कब नक्सलियों और पुलिस के मुठभेड़ में वो मारे जाएँ | अस्पताल में एक अम्बुलेंस था उसका दुरूपयोग भी इन्होने करना शुरू कर दिया तो प्रशासन ने वह सुविधा भी समाप्त कर दी | हालात ये है कि बमुश्किल कोई मेट्रिक पास होता है | डॉक्टर के यहाँ पहुँचने से पहले हीं अक्सर रोगी की मौत हो जाती है |</p>
<p style="text-align: justify;">प्रशासनिक लापरवाहियों की वजह से एक समय में ऐसी परिस्थितियां जरुर बनी लेकिन आज बदलाव आया है | लेकिन उस बदलाव को महसूस करने और उसका लाभ उठान एक मौका जनता को तभी मिलेगा जब ये सामाजिक केंसर नक्सलवाद जड़ -मूल से समाप्त  हो जाए |</p>
<p style="text-align: justify;">लोकतंत्र ने हमें कई विशेषाधिकार दिया है लेकिन उन्हें दुरुपयोग कर राष्ट्र के प्रति नफरत के इस विचारधारा से  हम केवल तालिबानी  समाज ही पैदा कर रहे हैं |</p>
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		<title>हहाती जनसँख्या पर चुप्पी ठीक नहीं</title>
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		<pubDate>Wed, 03 Nov 2010 05:36:45 +0000</pubDate>
		<dc:creator>आम आदमी</dc:creator>
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			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-9959" href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6/society-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c/%e0%a4%b9%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%80/attachment/specialreports_2edb-pop-increase-pred-2002-to-2050/"><img class="alignright size-full wp-image-9959" title="specialreports_2edb.Pop Increase Pred 2002 to 2050" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/specialreports_2edb.Pop-Increase-Pred-2002-to-2050.gif" alt="" width="457" height="526" /></a></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>POPULATION SHOULD BE CONTROLLED ANYWAY </strong></p>
<p style="text-align: justify;">पिछली जनगणना के बाद जनसंख्या संबंधी आधिकारिक आँकड़े जारी किये गये, राजनीतिक दलों ने अपने-अपने नजरिये से इसे देखा और अपने हिसाब से व्याख्या की। ज्ञातव्य है कि भारत का क्षेत्रफल पूरे विश्व का लगभग सवा दो प्रतिशत हिस्सा है और आबादी में बीस प्रतिशत, सम्पूर्ण विश्व की जनसंख्या 6.6 अरब है जिसमें से 1.16 अरब से ज्यादा हमारे देश में निवास करती है। एक नजर आँकड़ों पर डाले जाने पर मालूम चलता है कि 20वीं शताब्दी के शुरुआत में अविभाजित भारत की जनसंख्या लगभग 24 करोड़ थी जो विभाजन के उपरान्त सन 1951 में बढ़कर 36 करोड़ हो गयी और सन 2000 में 100 करोड़ को पार कर गयी।  सन 1901 में जहाँ एक वर्ग किमी में 77 लोग रहते थे वहीं सन 2000 में यह संख्या लगभग पाँच गुना अर्थात 324 व्यक्ति प्रति वर्ग किमी पर पहुँच गयी। एक अनुमान के अनुसार भारत की 40 प्रतिशत जनसंख्या गरीबी की रेखा के नीचे रह रहे हैं तथा अभी भी 35 प्रतिशत लोग निरक्षर हैं। शिशु मृत्युदर लगभग 70 प्रति हजार है, और औसत प्रति व्यक्ति सालाना आय 15000/- रुपये है और 2300 व्यक्तियों पर मात्र एक चिकित्सक ही उपलब्ध है।</p>
<p style="text-align: justify;">विगत सौ वर्षों में जनसंख्या मे चार गुना से अधिक वृद्धि हुई है जिसके विषय में कोई व्यक्ति गंभीरतापूर्वक विचार करना नहीं चाहता, प्रत्येक व्यक्ति अपनी जिम्मेदारी सरकार पर थोप देना चाहता है, यह बात सही है कि सरकार की भी इसमें एक महती भूमिका है और सरकार ने इस वृद्धि को रोकने हेतु कई योजनायें भी चलाई हैं, किन्तु अधिकतर योजनायें स्वैच्छिक प्रवृत्ति की होने के कारण ये योजनाएँ अपेक्षित सफलता प्राप्त नहीं कर पा सकीं। जनसंख्या की इस असाधारण वृद्धि का कुपरिणाम यह हो रहा है कि लोग बढ़ते जा रहे हैं, कृषि योग्य भूमि <a rel="attachment wp-att-9958" href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6/society-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c/%e0%a4%b9%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%80/attachment/india-rising-population/"><img class="alignleft size-full wp-image-9958" title="India-rising-population" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/India-rising-population.jpg" alt="" width="201" height="250" /></a>कम होती जा रही है, जंगल कम होते जा रहे हैं, जहाँ कभी जंगल हुआ करते थे, जहाँ खेती होती थी, वहाँ सीमेन्ट और लोहे के जंगल खड़े हो रहे हैं। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन किया जा रहा है। जोतें कम होती जा रही हैं, गरीब और गरीब होता जा रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">जल-स्तर तेजी से नीचे गिरता जा रहा है, प्रदूषण की समस्या विकराल होती जा रही है। करोड़ों लोगों को पीने के शुद्ध पानी और सैनिटेशन जैसी मूलभूत सुविधाएँ तक उपलब्ध नहीं हैं। यह बढ़ती हुई जनसंख्या का ही दुष्परिणाम है कि लोग रेलवे लाइनों, सड़कों के किनारे झुग्गियों में रहने को मजबूर हैं। बेरोजगारी इसी वृद्धि का एक और सर्वाधिक कुख्यात परिणाम है, क्या कोई भी सरकार इतनी बड़ी संख्या में सभी बेरोजगारों को रोजगार उपलब्ध करा सकती है? कदापि नहीं। साथ ही अबाध रूप से बढ़ती जनसंख्या मँहगाई, भ्रष्टाचार, अनैतिकता, अपराध और अपराधियों को भी जन्म देती है। एक अरब से ज्यादा जनसंख्या को मूलभूत सुविधाएँ उपलब्ध कराना, रोजगार प्रदान करना, उन्हें सुरक्षा मुहैया कराना कोई हँसी-खेल नहीं है। बढ़ती हुई जनसंख्या का भयावह रूप कहीं भी देखा जा सकता है, किसी भी एक्सप्रेस ट्रेन में हजारों ऐसे यात्रियों को, जो टिकट लेकर एक सीट पाने के अधिकारी होते हैं, भेड़-बकरियों की तरह यात्रा करते हुए देखा जा सकता है।</p>
<p style="text-align: justify;">लोकल ट्रेनों में, रिजर्वेशन काउन्टरों पर, रोजगार के लिये भर्ती दफ्तरों पर लगी हुई कतारें, महानगरों में पीने के पानी के लिये लगी हुई लाइनें, राशन की दुकानों पर लगी हुई कतारें, बेरोजगारों की संख्या में भयावह वृद्धि, अमीर और गरीब के बीच बढ़ता हुआ अंतर, मामूली रकम के लिये होने वाली हत्यायें, भ्रूण हत्या, भ्रष्टाचार की घटनाओं में इजाफा, बेरोजगारों का शोषण, अनैतिक व्यापार को बढ़ावा, मँहगाई में असामान्य वृद्धि, पर्यावरण में प्रदूषण, भूख से लोगों का मरना, करोड़ों लोगों का बेघर होना इत्यादि इसी अविश्वसनीय जनसंख्या वृद्धि का ही दुष्परिणाम है।चूँकि हमारे यहाँ की अधिकतर जनता हर काम के लिये स्वत: आगे न बढ़कर हर काम के लिये सरकार का मुँह ताकती है और उसके पास किसी भी नीति को बनाने का न तो कोई हक है और न लागू कराने के लिये कोई हथियार, अत: सरकार को अब जनसंख्या वृद्धि पर नियंत्रण के लिये कुछ कठोर कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">जनसंख्या नियंत्रण के परिणाम भी तुरन्त प्रकट नहीं होंगे, यदि वर्तमान समय में जनसंख्या नियंत्रण हेतु प्रभावी कदम उठाये जाते हैं व जनसंख्या वृद्धि को नकारात्मक दिशा में लाने के प्रयास किये जाते हैं तो उनका सुफल 20-25 साल बाद ही दिखाई देगा। रही बात स्वैच्छिक रूप से जनसंख्या को नियन्त्रित करने की तो स्वैच्छिक रूप से यहाँ वी0डी0आई0एस0 जैसी योजनाएँ ही सफल हो सकती हैं, न कि जनसंख्या नियन्त्रण की। रामचरित मानस में एक <a rel="attachment wp-att-9960" href="http://www.janokti.com/discussion-suggestions-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6/society-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%9c/%e0%a4%b9%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%9c%e0%a4%a8%e0%a4%b8%e0%a4%81%e0%a4%96%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%aa%e0%a4%b0-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%aa%e0%a5%80/attachment/ind2543b-jpg/"><img class="alignright size-full wp-image-9960" title="IND2543B.JPG" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/population.jpg" alt="" width="450" height="314" /></a>जगह कहा भी गया है कि &#8220;भय बिन होय न प्रीत&#8217;, और यह उक्ति आज भी प्रासंगिक है। कोई भी नियम, कानून, प्रथा, परम्परा तब तक अपने उद्देश्यों में सफल नहीं हो सकती जब तक कि उसमें दण्डात्मक प्रावधान न हो, यदि ऐसा होता तो शायद &#8216;राज्य&#8217; नामक संस्था की स्थापना ही नहीं होती। जनसंख्या नियन्त्रण के लिए एक प्रभावी कानून बनाना अत्यन्त आवश्यक है, जिसमें लोगों को स्वैच्छिक रूप से अपने परिवार को सीमित रखने के लिए प्रोत्साहित किया जाये, परिवार के आकार का निर्धारण किया जाये, इस निर्धारित सीमा से अधिक बड़ा परिवार होने पर उस परिवार पर कुछ कर लगाने का, कुछ शास्ति लगाने का और कुछ दंडात्मक प्रावधानों को लागू करने का विकल्प कानून में रखना चाहिए।</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">सीमित परिवार रखने वालों को बस-रेल किराये में छूट, बैंकों में जमा धनराशि पर अतिरिक्त ब्याज, कर्ज लेने पर वरीयता व वापसी में ब्याज में रियायत, व्यापार-उद्योगों के लाइसेंसों में प्राथमिकता, उच्च शिक्षा में छात्र-वृत्ति इत्यादि जैसे कदम उठाए जा सकते हैं, जबकि इसके विपरीत परिवार के बड़ा होने पर सरकार द्वारा दी जाने वाली सुविधाओं में कटौती की जा सकती है, कुछ कर लगाये जा सकते हैं तथा इसी प्रकार के कुछ अन्य कदम उठाए जा सकते हैं। प्रथम दृष्टया ये कदम कुछ कठोर व अलोकप्रिय लग सकते हैं, लेकिन भारत के समग्र हित को ध्यान में रखते हुये ऐसे कदम उठाना नितान्त अपरिहार्य हो गया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">सरकार को यह भी चाहिए कि परिवार नियोजन के विरुद्ध कतिपय वर्गों में फैली हुई भ्रान्तियों, पूर्वाग्रहों को दूर करे। एक छोटी सी बात जो लोगों को समझ में नहीं आती कि किसी विशेष जाति या धर्म में पैदा होना किसी भी व्यक्ति के बस की बात नहीं है, जाति या धर्म का निर्धारण पैदा होने वाला शिशु नहीं करता, बल्कि उस की जाति या धर्म का निर्धारण इस से होता है कि उसके माता-पिता किस जाति या किस धर्म के हैं या मानने वाले हैं। अत: किसी धर्म विशेष से संबंधित होने के कारण परिवार का विरोध करना तर्क-संगत नहीं है, हालाँकि इन समुदायों के अत्यल्प लोगों ने परिवार नियोजन को इस विरोध के बावजूद भी अपनाया है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">अत: भारत की बेरोजगारी, गरीबी, भ्रष्टाचार जैसी विकराल समस्याओं के प्रभावी निराकरण हेतु यह आवश्यक हो जाता है कि जनसंख्या की बेतहाशा वृद्धि को काबू किया जाये, और इस के लिये ऐसा कानून बनाया जाये जिसमें जातीय या धार्मिक आधार पर किसी भेदभाव की संभावना न हो। इसके साथ ही स्वयंसेवी गैर-सरकारी संस्थानों की मदद से &#8220;पल्स पोलियो अभियान&#8217; की तरह एक जन चेतना अभियान चलाया जाये जिससे कि सामान्य जनता इस जनसंख्या वृद्धि के दुष्परिणामों को समझ सके व जागरुक होकर स्वयं को और भारत को समृद्ध बना सके।</p>
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		<title>भारत के विषय में पाकिस्तानी छात्राएं क्या सोचती हैं ?</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Oct 2010 16:17:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[सुनिए जरा पाकिस्तान की छात्राएं भारत-पाक संबंधों के बारे में क्या सोचती हैं ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><object width="480" height="385"><param name="movie" value="http://www.youtube.com/v/81cfly1npRA?fs=1&amp;hl=en_US"></param><param name="allowFullScreen" value="true"></param><param name="allowscriptaccess" value="always"></param><embed src="http://www.youtube.com/v/81cfly1npRA?fs=1&amp;hl=en_US" type="application/x-shockwave-flash" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true" width="480" height="385"></embed></object></p>
<p>सुनिए जरा पाकिस्तान की छात्राएं भारत-पाक संबंधों के बारे में क्या सोचती हैं ?<br />
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		<title>हम पाकिस्तानी है ,पाकिस्तान हमारा है !</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Oct 2010 16:08:46 +0000</pubDate>
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<img class="aligncenter size-full wp-image-9765" title="saiyad shah gilani" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/saiyad-shah-gilani.jpg" alt="" width="512" height="382" /></a></p>
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		<title>आतंकियों के परिवार को सरकारी पेंशन</title>
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		<pubDate>Thu, 28 Oct 2010 15:54:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[आतंकियों के परिवार को हर संभव मदद का निर्णय करने वाली मनमोहन की खडाऊं सरकार इसे मानवता का नाम दे रही है &#124; तो फ़िर क्या मानवता के नाते सिर्फ कश्मीरी आतंकवादी हीं क्यों ? क्या आने वाले दिनों में ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><object classid="clsid:d27cdb6e-ae6d-11cf-96b8-444553540000" width="480" height="385" codebase="http://download.macromedia.com/pub/shockwave/cabs/flash/swflash.cab#version=6,0,40,0"><param name="allowFullScreen" value="true" /><param name="allowscriptaccess" value="always" /><param name="src" value="http://www.youtube.com/v/OspO3aJCfNw?fs=1&amp;hl=en_US" /><param name="allowfullscreen" value="true" /><embed type="application/x-shockwave-flash" width="480" height="385" src="http://www.youtube.com/v/OspO3aJCfNw?fs=1&amp;hl=en_US" allowscriptaccess="always" allowfullscreen="true"></embed></object></p>
<p>आतंकियों के परिवार को हर संभव मदद का निर्णय करने वाली मनमोहन की खडाऊं सरकार इसे मानवता का नाम दे रही है | तो फ़िर क्या मानवता के नाते सिर्फ कश्मीरी आतंकवादी हीं क्यों ? क्या आने वाले दिनों में ये सरकार नक्सलियों समेत देश -प्रदेश के तमाम छोटे-बड़े अपराधियों के परिवारों को पेंशन देने जा रही है ? अगर ऐसा है तो हम जैसे बेरोजगार भी तैयार हैं आतंकी बंनने के लिए , जीते जी ना सही, कम से कम मारने के बाद ही परिवार के काम आ जायेंगे !</p>
<p><a rel="attachment wp-att-9769" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/9756/attachment/terrorist-in-kashmir/"><img class="aligncenter size-full wp-image-9769" title="terrorist in kashmir" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/terrorist-in-kashmir.jpg" alt="" width="474" height="395" /></a></p>
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		<title>बोलने से पहले सोचा नहीं था (राहुल गांधी)</title>
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		<pubDate>Sun, 10 Oct 2010 04:49:41 +0000</pubDate>
		<dc:creator>पंकज मिश्रा</dc:creator>
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		<description><![CDATA[राहुल गांधी। इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और युवा कांग्रेस की देखरेख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री कहा जाता है, हालांकि उन्होंने कभी नहीं कहा कि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। दरअसल वे कुछ ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;"><strong><a rel="attachment wp-att-9286" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ac%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%b9%e0%a4%b2%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a5%8b%e0%a4%9a%e0%a4%be-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%a5%e0%a4%be/attachment/rahul-gandhi1-2/"><img class="alignleft size-medium wp-image-9286" title="rahul-gandhi1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul-gandhi1-300x240.jpg" alt="" width="300" height="240" /></a><a href="http://www.janokti.com/tag/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80/">राहुल गांधी</a></strong>। इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और <strong><a href="http://www.janokti.com/tag/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80/">युवा कांग्रेस</a></strong> की देखरेख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री कहा जाता है, हालांकि उन्होंने कभी नहीं कहा कि वे प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। दरअसल वे कुछ और ही कह रहे हैं। वे कह रहे हैं कि<strong><a href="http://www.janokti.com/?s=+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98+&amp;x=0&amp;y=0"> संघ और सिमी </a></strong>एक ही थाली के चट्टे- बट्टे हैं। उन्हें दोनों में कोई फर्क दिखाई नहीं देता। उन्हें चमचागिरि और चापलूसी करने वाले लोग भी कतई पसंद नहीं। वे कहते हैं कि हर मर्ज की सिर्फ एक ही दवा है और वह है राजनीति।</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">अपने मध्य प्रदेश के दौरे के दौरान राहुल गांधी ने कई बातें कहीं। कुछ ऐसी जो कहनी चाहिए थी और कुछ ऐसी जो मेरे ख्याल से नहीं कहनी चाहिए। राहुल ने कहा कि उन्हें चाटुकार और चमचे पसंद नहीं हैं। मुझे नहीं पता कि ये <strong><a href="http://www.janokti.com/tag/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%81%E0%A4%A7%E0%A5%80/">राहुल </a></strong>के निजी विचार हैं या फिर पारिवारिक। राहुल को भले चाटुकार पसंद न हों पर उनकी मां को चाटुकार और चमचे ही पसंद हैं। अगर नहीं होते तो <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/">प्रतिभादेवी सिंह पाटिल </a></strong>आज देश की राष्ट्रपति नहीं होतीं। हो सकता है कि मेरी इस बात की जमकर आलोचना की जाए पर मैं जानना चाहता हूं कि प्रतिभादेवी सिंह पाटिल में ऐसी कौन सी खूबी है जो वह राष्ट्रपति के उम्मीदवार हो गईं। अगर महिला होने की वजह से उन्हें राष्ट्रपति बनाया गया तो प्रधानमंत्री पद क्यों किसी पुरुष के सुपुर्द कर दिया गया। क्या पार्टी में कोई ऐसी योग्य महिला नहीं जो प्रधानमंत्री बन सके? या फिर ऐसी महिला नहीं जो <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80+&amp;x=-179&amp;y=3">सोनिया गांधी </a></strong>की बात को आंख पर पट्टी बांध कर मान ले। खुद के प्रधानमंत्री न बन पाने के बाद क्यों उन्होंने कठपुतली मनमोहन सिंह का चयन किया। क्या कांग्रेस में ऐसा कोई व्यक्ति नहीं है जो अपने दम पर लोकसभा चुनाव जीत सके और प्रधानमंत्री बन सके। दरअसल सोनिया अच्छी तरह जानती हैं कि जो नेता लोकसभा का चुनाव जीत सकता है उसका अपना अच्छा खासा जनाधार होता है। मनमोहन सिंह चूंकि लोकसभा से संसद में प्रवेश नहीं करते सो उनका जनाधार भी नहीं होगा। सोनिया सिर्फ उन्हीं लोगों को पद बख्श रहीं हैं जो उनके कहे पर चलें। वे कहेंं दिन तो दिन और कहें रात तो रात। ऐसे नामों में केवल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री ही नहीं बल्कि कई नाम हैं। अगले लोकसभा चुनाव में जब <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE+%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80+&amp;x=-179&amp;y=3">राहुल प्रधानमंत्री पद के दावेदार</a></strong> होंगे उससे पहले ही मनमोहन सिंह को राष्ट्रपित भवन भेजने की पूरी तैयारी अभी से की जा रही है। राहुल को पहले अपने घर से चमचागिरि खत्म करनी होगी तब वे कार्यकर्ताओं को चमचागिरी न करने का पाठ पढ़ाएं तो ज्यादा अच्छा होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल कहते हैं कि देश की हर समस्या की खात्मा तभी होगा जब <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/">युवा राजनीति </a></strong>में आएंगे। यानी हर मर्ज की एक ही दवा। <a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/">राजनीति और सिर्फ राजनीति</a>। कोई कम अक्ल का व्यक्ति भी यह बता सकता है कि कभी भी हर मर्ज की एक ही दवा नहीं हुआ करती। अगर देश का हर व्यक्ति राजनीति करने लगेगा तो बाकी के काम कौन करेगा, यह भी राहुल को तय करना होगा। केवल राजनीति से देश नहीं चला करता। राजनीति पेट नहीं भरती। वे युवाओं को देश की राजनीति में लाना चाहते हैं। पहले उन्हें अपनी पार्टी में युवाओं को स्थान देना होगा। पहले वे अपनी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद से अपनी मां को हटाकर किसी युवा नेता को इसकी जिम्मेदारी सौंपे और फिर किसी युवा को ही प्रधानमंत्री बनने की घोषणा करें। केवल युवा कांग्रेस को बदलकर देश की राजनीति नहीं बदली जा सकती। राहुल को यह बात भी समझनी होगी कि कहने और करने में बहुत फर्क होता है। देशभर में घूमने से, <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%ac%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%b8-%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%82%e0%a4%b9-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0/">दलित के घर जाकर रोटी खाने से </a></strong>और उसके घर सोने से दलित को अच्छा तो लग सकता है, लेकिन इससे उसके पेट की भूख कम नहीं हो सकती। देश भूख है, कराह रहा है। इसके लिए राहुल के पास क्या दवा है? राजनीति। देश घूमकर उसकी समस्याओं को समझना एक बात है और उसकी समस्याओं का निराकरण करना दूसरी बात।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल कहते हैं कि वे प्रधानमंत्री नहीं बनना चाहते। राहुल को चाहिए कि वे पहले अपनी पार्टी के उन नेताओं को यह कहने से मना करें, जो उन्हें <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98+&amp;x=0&amp;y=0">भावी प्रधानमंत्री </a></strong>के रूप में देख रहे हैं। राहुल को यह पता है कि अगले लोकसभा चुनाव में अगर उनकी पार्टी को बहुमत मिला तो प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार वही होंगे सो अभी से ढोल-ताशे क्यों पीटे जाएं। हालांकि भीतर ही भीतर इसकी तैयारियां शुरू कर दी गई हैं। योजना तैयार की जा रही है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">मजे की बात यह रही कि राहुल यहीं तक नहीं रुके। बुधवार को तो उन्होंने गजब ही कर दिया। उन्होंने कह दिया कि <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98+&amp;x=0&amp;y=0">राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ </a></strong>और सिमी में उन्हें कोई फर्क नजर नहीं आता। सवाल यह है कि क्या राहुल ने कभी निष्पक्ष भाव से दोनों में कोई फर्क देखने की चेष्टा की है। नहीं की होगी, क्योंकि उनकी आंखों पर एक तरह का चश्मा लगा है और उन्हें जो कुछ भी दिखता है। उस चश्मे से ही दिखता है। अगर निष्पक्ष भाव से देखते तो उन्हें पता चल जाता कि संघ और सिमी में क्या फर्क है। सिमी जहां एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है, वहीं <strong><a href="http://www.janokti.com/?s=+%E0%A4%B8%E0%A4%82%E0%A4%98+&amp;x=0&amp;y=0">संघ भारत भूमि की आत्मा </a></strong>से जुड़ा हुआ संगठन है। राहुल को अगर देशप्रेमी और देशद्रोही संगठनों में कोई फर्क नजर नहीं आता तो कोई क्या कर सकता है। बस उनकी बुद्धि पर मुस्कराया ही जा सकता है। वे जिस देश की राजनीति में युवाओं को लाने की बात कह रहे हैं क्या वे उस देश को समझ पा रहे हैं। इतने दिनों से देश भ्रमण के बाद भी अगर राहुल ऐसी बातें करते हैं तो लगता है कि लोग उन्हें यूं ही बच्चा नहीं समझते। वे वास्तव में अभी बड़े हो ही नहीं पाए हैं। बिना सोचे समझे बोलना उनकी आदत सी हो गई है। अंगे्रजी में पले बढ़े राहुल ने क्या थिंक बिफोर यू स्पीक की युक्ति नहीं सुनी होगी। सुनी होगी पर शायद उस पर अमल नहीं करना चाहते।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">दरअसल राहुल की दिक्कत यही है कि वे अपने आप को बहुत बड़ा और विद्धान समझते हैं, वहीं अन्य लोग उन्हें बच्चा समझते हैं। राहुल को यह तक नहीं पता कि किसी के यहां जाते हैं तो कैसे पेश आते हैं। मध्यप्रदेश आगमन से एक दिन पहले ही यहां की सरकार ने उन्हें प्रदेश का अतिथि घोषित कर दिया था, लेकिन राहुल को शायद अतिथि भाव पसंद नहीं आया। उन्हें तो मायावती जैसे लोग ही पसंद आते हैं, जो उनके आने पर कोई व्यवस्था नहीं करती बल्कि प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से गाली ही देती हैं। राहुल की हर गलती को बच्चा समझकर माफ कर दिया जाता है, लेकिन कब तक? बच्चा जब कोई गलती करता है तो पहले उस पर हंसी आती है और जब बड़ा होकर भी वह ऐसा ही करता है तो सजा दी जाती है। राहुल को चाहिए कि वे ऐसी नौबत न आने दें और कोई भी बात बोलने से पहले सोचें।</p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>‘तोता-रटंत’ राहुल के निरर्थक बोल</title>
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		<pubDate>Fri, 08 Oct 2010 09:52:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>पवन कुमार अरविंद</dc:creator>
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		<description><![CDATA[कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने देशभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना प्रतिबंधित और कुख्यात आतंकी संगठन सिमी से करके अपने नासमझी और अपरिपक्वता का ठोस परिचय दिया है। अभी तक उनकी नासमझी व अपरिपक्वता को लेकर देश ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-8544" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e2%80%98%e0%a4%a4%e0%a5%8b%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%b0%e0%a4%9f%e0%a4%82%e0%a4%a4%e2%80%99-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a4%b0/attachment/rahul-gandhi-photo1-2/"><img class="alignright size-medium wp-image-8544" title="rahul-gandhi-photo1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul-gandhi-photo11-300x196.jpg" alt="" width="300" height="196" /></a>कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने देशभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना प्रतिबंधित और कुख्यात आतंकी संगठन सिमी से करके अपने नासमझी और अपरिपक्वता का ठोस परिचय दिया है। अभी तक उनकी नासमझी व अपरिपक्वता को लेकर देश की जनता में कुछ संदेह था, लेकिन श्री गांधी ने इस प्रकार का बयान देकर उस संदेह को भी दूर कर दिया है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">हालांकि, 40 वर्षीय श्री गांधी ऐसा बचकाना बयान देंगे, यह किसी ने भी नहीं सोचा था। इसलिए उनका बयान हैरत में डालने वाला है। वह देश के लिए एक महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। केवल सांसद हैं इसलिए नहीं, बल्कि इसलिए भी, क्योंकि वह ऐसे खानदान का प्रतिनिधित्व करते हैं जिसने पंडित नेहरू सहित इस देश को तीन-तीन प्रधानमंत्री दिए हैं। इसलिए राहुल महत्वपूर्ण व्यक्ति हैं। संसदीय लोकतंत्र में ऐसे बयान को किसी भी सूरत में मर्यादापूर्ण नहीं कहा जा सकता है। यह हर स्थिति में लोकतंत्र की गरिमा को तार-तार करने वाला है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">अब प्रश्न यह उठता है कि जो व्यक्ति आतंकी संगठन और सामाजिक संगठन में अंतर न समझ पाता हो, उस व्यक्ति को भविष्य में यदि कभी देश का नेतृत्व करने का मौका मिले, तो वह देश की बागडोर ठीक से संभाल सकेगा, इस बारे में लोगों को सदैव संदेह बना रहेगा। ध्यातव्य है कि राहुल ने मध्य प्रदेश के त्रि-दिवसीय प्रवास के दौरान कहा था कि कांग्रेस के कार्यकर्ता सिमी और आरएसएस से दूर रहें, क्योंकि ये दोनों संगठन कट्टरवाद के समर्थक हैं और दोनों की विचारधार में कोई खास फर्क नहीं है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल ने टिप्पणी तो कर दी लेकिन उनको शायद ही आरएसएस का इतिहास पता हो। वह आरएसएस के संस्थापक का ही ठीक से पूरा नाम नहीं बता सकते। हालांकि, वह आरएसएस को कितना जानते हैं यह बताने के लिए उनका बयान ही काफी है। राहुल के इस प्रकार के ऊल-जुलूल बयान से यह स्पष्ट हो गया है कि उनको इस देश के इतिहास-भूगोल की भी कोई जानकारी नहीं है। राहुल की विशेषता अब केवल स्वर्गीय श्री राजीव गांधी का बेटा होना भर ही रह गया है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">राहुल को यह जानना चाहिए कि सिमी पर भाजपा नीत राजग सरकार ने प्रतिबंध लगाया था। उसके बाद उनकी कांग्रेस नीत यूपीए सरकार ने उस प्रतिबंध को आगे बढ़ा दिया। क्योंकि वह खूंखार आतंकी संगठन है और देश में हुए कई आतंकी विस्फोटों में उसका हाथ है। सिमी पर अमेरिका ने भी प्रतिबंध लगा रखा है। राहुल की नजर में आरएसएस यदि सिमी जैसा संगठन है तो उनको अपनी कांग्रेस नीत यूपीए सरकार से उस पर प्रतिबंध लगाने के लिए कहना चाहिए। यदि आरएसएस सचमुच में सिमी के समान है, तो उनकी सरकार ने आरएसएस पर बिना प्रतिबंध लगाए क्यों छोड़ रखा है, यह सोचने वाली बात है ?</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">दरअसल, राहुल को स्वयं नहीं पता होता है कि वह क्या बोल रहे हैं। वह हमेशा लिखा हुआ भाषण पढ़ते हैं और भाषण में जो कुछ भी लिखा होता है, उसी को वह पढ़ डालते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">हालांकि, राहुल गांधी के बयान से आरएसएस की सेहत पर कोई असर नहीं पड़ने वाला। हां, इतना अवश्य है कि राहुल ऐसा बोलकर स्वयं ‘हल्के’ पड़ गए हैं। क्योंकि इस देश की जनता किसी भी राजनेता या श्रेष्ठ व्यक्तित्व से सदैव मर्यादित व संयमित व्यवहार तथा भाषा की अपेक्षा करती है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">कहा जाता है कि आदमी का बड़प्पन जीवन के किसी भी स्थिति, परिस्थित और मनःस्थिति में धैर्य व धीरज बनाए रखते हुए मर्यादापूर्ण आचरण व व्यवहार करने में होता है। लेकिन सामान्य स्थितियों में ही धैर्य खोकर विक्षिप्तावस्था में आ जाना और ऊल-जुलूल बातें करना, यह मनुष्य के व्यक्तित्व के एक वास्तविक पहलू को ही दर्शाता है। ऐसे व्यक्ति से देश के लिए और देशहित में किसी बड़े काम की उम्मीद नहीं की जा सकती।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
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		<title>बयानबाजी के बादशाह हैं सोनिया कांग्रेस के महासचिव राहुल</title>
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		<pubDate>Thu, 07 Oct 2010 17:41:11 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
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		<description><![CDATA[मंगलवार को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में कांग्रेस महासचिव और गाँधी परिवार के युवराज राहुल गाँधी ने कहा कि उनकी नजर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) एक जैसे हैं &#124; इस बयान के ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-8509" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ac%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8b/attachment/rahul-gandhi-photo1/"><img class="alignleft size-medium wp-image-8509" title="rahul-gandhi-photo1" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul-gandhi-photo1-300x196.jpg" alt="" width="300" height="196" /></a>मंगलवार को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में कांग्रेस महासचिव और गाँधी परिवार के युवराज <strong><a href="http://www.janokti.com/page/2/?s=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2&amp;x=-181&amp;y=2">राहुल गाँधी</a></strong> ने कहा कि उनकी नजर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट ऑफ इंडिया (सिमी) एक जैसे हैं | इस बयान के मद्देनज़र पत्रकारों द्वारा स्पष्टीकरण मांगे जाने पर राहुल गाँधी ने कहा कि उनकी नज़र में वैचारिक कट्टरता के मामले में दोनों में कोई अंतर नहीं है। <a href="http://www.janokti.com/page/2/?s=%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%B2&amp;x=-181&amp;y=2">राहुल गाँधी</a> इससे पहले भी देश भर के दौरे पर जाते रहे हैं और अपनी सभाओं में युवाओं की भीड़ जुटाने में कामयाब रहे हैं हालाँकि यह बात और है कि भीड़ को कार्यकर्ताओं में बदलना नहीं हो पाता है | वैसे हाल के महीनों में राहुल का युवा फेक्टर औंधे मुंह गिरा है और इसकी शुरुआत बिहार के ललितनारायण मिथिला विश्वविद्यालय में हुई थी जब <strong><a href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%80-%e0%a4%aa%e0%a4%b0%e0%a4%bf%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%aa%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a5%80-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a5%80/">राहुल की गलतबयानी </a></strong>ने उनको माफ़ी मांगने पर मजबूर कर दिया था | 42 साल की उम्र में भी बाबा ( प्यार से बड़े लोग अपने सबसे छोटे बच्चे को पुकारते हैं ) कहे जाने वाले राहुल कितने परिपक्व है यह उनकी बातों से अंदाजा हो जाता है | संघ के ऊपर इस तरह की बयानबाजी राहुल ने एक योजना के तहत की थी जिसके जरिये मीडिया और पूरे संघ परिवार को खुद पर फोकस किया जा सके | और ठीक ऐसा ही हुआ |</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">मीडिया में दिन भर संघ और भाजपा नेताओं के बयानों को दिखा -दिखा कर राहुल गुणगान किया जाता रहा | मीडिया को दिए साक्षात्कार में संघ की अखिल भारतीय कार्यकारिणी के सदस्य श्री राम माधव ने कहा कि आरएसएस जैसे देश भक्त और राष्ट्रवादी संगठन की तुलना स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट आफ इडिया (सिमी) जैसे जिहादी और प्रतिबंधित आतंकी संगठन से करना अशोभनीय है। यह उनकी अपरिपक्वता और देश व समाज के बारे में कम जानकारी को ही दर्शाता है। श्री गांधी जैसे युवा नेता को राजनीति में आगे बढ़ना है, अतः उन्हें अपनी बात नाप तौल कर बोलनी चाहिये।</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावडेकर ने कहा कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ राष्ट्रवाद की पाठशाला है और वह पिछले 85 वर्षों से राष्ट्र के लिए तपस्या कर रहा है, जबकि सिमी एक प्रतिबंधित आतंकी संगठन है।जावडेकर ने कहा, &#8220;ऐसा बयान राहुल की राजनीतिक अज्ञानता, अपरिपक्वता और उद्दंडता को दर्शाता है। उन्हें सोच समझकर बोलना चाहिए। पिछले साल भर हुए विभिन्न चुनावों में कांग्रेस को मिली हार और अपना जादू न चलने से राहुल बौखलाए हुए हैं। इसलिए वह इस तरह की ऊल-जुलूल बयानबाज़ी कर रहे है।&#8221;</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">भाजपा के उत्तरप्रदेश अध्यक्ष सूर्य प्रताप शाही ने स्थानीय पत्रकारों से कहा कि श्री गांधी को चाहिए कि वह अपने महासचिव को राष्ट्रभक्त और राष्ट्रद्रोही में अन्तर समझाये । संघ का नाम हर समय राष्ट्रभक्त के रुप में लिया जाता है । पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री ने 1965 के युद्ध में संघ की भूमिका की सराहना की थी । संघ के कार्यकर्ता राष्ट्रीय आपदाओं से निपटने में बढ चढकर हिस्सा लेते हैं ।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">वहीँ मध्यप्रदेश भाजपा के अध्यक्ष  प्रभात झा ने राहुल गांधी को उटपटांग बयानबाजी करने वाला गांधी करार दिया है। मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि संघ एक राष्ट्रवादी संगठन है और पूरा देश जानता है कि संघ देशभक्ति का पाठ पढ़ाने वाला संगठन है, नौजवानों का चरित्र निर्माण करता है।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">ऊपर के बयानों को पढ़िये और आने वाले दो-तीन दिनों तक प्रिंट -इलेक्ट्रोनिक -वेब प्रत्येक मीडिया माध्यमों का निरिक्षण करिए तो साफ़ हो जायेगा कि किस प्रकार राहुल गाँधी ने युवाओं में अपनी आउट <a rel="attachment wp-att-8510" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ac%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a5%80-%e0%a4%95%e0%a5%87-%e0%a4%ac%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b9-%e0%a4%b9%e0%a5%88%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%8b/attachment/rahul_gandhi_girls_20081124/"><img class="alignright size-full wp-image-8510" title="rahul_gandhi_girls_20081124" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/rahul_gandhi_girls_20081124.jpg" alt="" width="250" height="239" /></a>ऑफ़  फोकस होती छवि को फ़िर से चर्चा में ला दिया है | क्योंकि गौर करिए इससे पहले राहुल क्या बात करते रहे हैं ? यही ना कि</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;"><strong><span style="color: #0000ff;">केंद्र का पैसा 10 प्रतिशत ही जनता तक पहुंचता है |</span></strong></span></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #0000ff;">राजनीति में युवाओं को आना चाहिए |</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #0000ff;">एक हिंदुस्तान हैं अमीरों का  हिंदुस्तान और दूसरा हिंदुस्तान गरीबों का हिंदुस्तान |</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><strong><span style="color: #0000ff;">गरीबों का सिपाही हूं |</span></strong></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">आदि-आदि वो तमाम बातें जो सुनने में अच्छी लगती हैं | ये सारी चीजें हर एक आम भारतीय समझता और महसूस करता है लेकिन राहुल बाबा इसे दूर करने का प्रयत्न भी तो करें | साठ सालों में रही अधिकांश सरकार इनकी ,हुकूमत इनकी फ़िर भी रोना क्यों रोते हैं ?</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">बहरहाल , देश के  युवा फेसबुक -ऑरकुट -ब्लॉग आदि पर राहुल के संघ सम्बंधित बयान में उलझे पड़े हैं | चर्चा में बने रहने का शगल राहुल गाँधी ने बखूबी सीख लिया है अपने गुरु दिग्विजय से, जो जब देखो तब दूसरों के फटे में अपना मुंह घुसा कर कुछ भी बक देते हैं जैसे कांग्रेस महासचिव नहीं राष्ट्रीय सलाहकार हैं जिनकी राय अपरिहार्य है ! गुरु तो गोबड़ करने में लगे हुए हैं देश का लेकिन चेला चीनी सरीखी मीठी बातों से युवाओं का नब्ज पकड़ना चाहता है ! और इस काम में मीडिया के साथ-साथ देश के बड़े औद्योगिक समूहों को लगाया गया है | इसके दो बड़े  उदाहरण , लोकसभा चुनाव परिणाम  के दौरान इलेक्ट्रोनिक मीडिया  की की रिपोर्टिंग  और हाल ही में एसोचैम द्वारा कराए गए एक सर्वे को मीडिया में उछाला जाना है जिसमें यह कहा गया कि यदि राहुल को कॉमनवेल्थ गेम्स आयोजन का काम सौंपा जाता तो यह काम शानदार ढंग से पूरा हो गया होता |</p>
<p style="text-align: justify;">खैर, अपना यूथ लेंस आउट ऑफ़ फोकस होता देखकर राहुल ने सीधे विपक्ष की जड़ों पर वार कर ध्यान खींचने की जोरदार कोशिश की है और उसमें वो कामयाब होते दिख रहे हैं लेकिन विश्लेषकों की माने तो इससे विकास और युवाओं की बात करने वाले राहुल की बची-खुची छवि भी नकारात्मक हो जाएगी |</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
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		<title>मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन</title>
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		<pubDate>Fri, 01 Oct 2010 15:32:17 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डॉ. वेदप्रताप वैदिक</dc:creator>
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		<description><![CDATA[यदि कार्ल मार्क्स अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे&#124; वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें&#124; बंगाल के हमारे कामरेडों ने पहले देसी और विदेशी पूंजीपतियों के ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;"><a rel="attachment wp-att-8135" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b9%e0%a4%b0%e0%a4%be/attachment/karl-marx/"><img class="alignright size-medium wp-image-8135" title="karl-marx" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/karl-marx-300x189.jpg" alt="" width="300" height="189" /></a>यदि<strong> <a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8/">कार्ल मार्क्स</a> </strong>अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे| वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें| बंगाल के हमारे कामरेडों ने पहले <strong>देसी और विदेशी पूंजीपतियों</strong> के आगे घुटने टेके, <strong><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8/">नंदीग्राम और सिंगुर</a> </strong>किया और अब वे वोट के खातिर उस मज़हब की शरण में जा रहे हैं, जिसे महात्मा मार्क्स &#8216;जनता की अफीम&#8217; कहते थे| <strong>प. बंगाल की सरकार</strong> ने अब <strong>पिछड़ों का आरक्षण</strong> सात प्रतिशत से बढ़ाकर 17 प्रतिशत कर दिया है ताकि <strong>बंगाली मुसलमानों</strong> के वोट खींचे जा सकें| यह मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन है|</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">दोहरा इसलिए कि &#8216;वर्ग&#8217; की छाती पर पहले उन्होंने मज़हब को बिठाया और फिर मज़हब के सिर पर जात बिठा दी| वह वर्ग-संघर्ष दरकिनार हो गया, जो <strong><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%a8%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b8%e0%a4%b2%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%82%e0%a4%a6%e0%a5%8b%e0%a4%b2%e0%a4%a8/">मार्क्सवाद </a></strong>की प्राणवायु है| कैसी विडंबना है कि भारत के <strong>कांग्रेसियों, भाजपाईयों और जातिवादी नेताओं </strong>की तरह हमारे <a href="http://www.janokti.com/tag/marks/">मार्क्सवादी</a> भी जात और मज़हब के नाम पर रेवाडि़यां बांटने में जुट गए हैं| आए थे, वे <strong>वर्गविहीन समाज </strong>की स्थापना करने और अब वे पाए जा रहे हैं, भारत में जातिवादी और मजहबवादी समाज को मजबूत बनाते हुए | सर्वहारा को संघर्ष की कला सिखाने के बदले <strong><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%9d%e0%a4%82%e0%a4%a1%e0%a4%be/">मार्क्सवादी उन्हें &#8216;अफीम&#8217; की गोलियां </a></strong>बाट रहे हैं| मान लिया कि सारे सर्वहारा एक-जैसे हैं| क्या <strong>हिंदू और क्या मुसलमान </strong>? यहां तक तो ठीक है लेकिन असली सवाल यह है कि जब सेंत-मेत में नौकरियां मिलेंगी तो क्या उनके दिलों में वर्ग-संघर्ष का जज़्बा मजबूत होगा ? दूसरों की दया पर जीनेवाले लोग क्या कभी न्याय के लिए लड़ सकते हैं ? नौकरियों में आरक्षण विपन्नों को संपन्नों का मौन अनुगत बनाने का षडयंत्र् है| इस वर्ग-चेतना के विनाश में अपने मार्क्सवादियों का भागीदार होना सचमुच आश्चर्यजनक है| नौकरियों में आरक्षण को प्रोत्साहित करना हमारे देश के सर्वहारा को अनंतकाल के लिए अपंग बना देना है|</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">बंगाल की <strong>मार्क्सवादी सरकार</strong> इस आत्मघाती काम में  पीछे क्यों रहे ? यदि<strong> केरल, तमिलनाडु, </strong>कर्नाटक और आंध्र की सरकारें<strong> मुस्लिम वोटों </strong>पर हाथ साफ कर रही हैं तो बंगाल की सरकार के सिर पर तो चुनाव आए खड़े हैं| लगभग दो करोड़ बंगाली मुस्लिमों में से लगभग 83 प्रतिशत पिछड़े हैं| इन्हें मुसलमान होने के नाते आरक्षण नहीं दिया जा सकता| वह संविधान-विरोधी है| इसीलिए अनेक राज्यों ने मंडल आयोग के तहत जात का दरवाज़ा खोल दिया है| बंगाल अन्य राज्यों को पीछे छोड़ना चाहता है| वहां तो &#8216;क्रांति के अगि्रम दस्ते&#8217; का राज है न ! बुद्घदेव भट्रटाचार्य सरकार ने अभी-अभी 21000 नई नौकरियों की घोषणा की है| साथ में 17 प्रतिशत आरक्षण की गाजर भी लटका दी है| भला, वह ममता से मात कैसे खा सकती है ? ममता बनर्जी ने दो-टूक घोषणा की थी कि अगर वे मुख्यमंत्र्ी बनीं तो वे मुसलमानों को आरक्षण देंगी| भट्टाचार्य सरकार ने नहले पर दहला मार दिया| मुसलमानों को भी यह आरक्षण स्वीकार करने में ज़रा भी संकोच नहीं | इस्लाम में जात का क्या काम है ? जो जात को मानता है, वह मुसलमान कैसे हो सकता है ? यह जानते हुए भी कोई मुल्ला जातीय आरक्षण के खिलाफ फतवा जारी नहीं करता| लालच बड़ा कि ईमान ? अगर मार्क्सवादी ही अपने सिद्घांतों को कच्चा चबा रहे हैं तो क्या सिर्फ मुसलमानों ने ही इस्लाम के मुताबिक आचरण करने का ठेका ले रखा है ? आरक्षण का दांव मारकर यदि मार्क्सवादी अपने वोट पटाना चाहते हैं तो मुसलमान माले-मुफ्त से मना क्यों करें ? मुफ्त हाथ आए तो बुरा क्या है ?</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">इस दांव-पेंच के मूल में क्या है ? क्या मुसलमानों का भला है ? यदि यही होता तो अपने सुदीर्घ शासन-काल में मार्क्सवादी सरकार बंगाल के मुसलमानों को उस मुकाम पर पहुंचा सकती थी, जिस पर भारत ही नहीं, सारे दक्षिण एशिया के मुसलमानों को गर्व होता| उसने कुछ जिलों में उर्दू को राजभाषा का दर्जा दे दिया| क्या खूब ? बंगाली मुसलमान को उर्दू से क्या लेना-देना ? उसने अपनी बांग्ला भाषा के खातिर पाकिस्तान तोड़ दिया| मुसलमानों की हालत बंगाल में जितनी खराब है, शायद किसी भी प्रांत में नहीं है| मुसलमान लोग जिन धंधों में हैं, क्या उनकी इज्जत और लज्जत बढ़ाने में मार्क्सवादी सरकार ने कोई छोटी-सी पहल भी की ? अब वह क्या करना चाहती है ? उनके कांम-धंधे छुड़वाकर उनके गले में सरकारी नौकरियां लटकाना चाहती है ? अगर नौकरियां भी थमानी थीं तो उन्हें पढ़ाने-लिखाने का कुछ इंतजाम किया होता| नौकरियों का लालच देकर मार्क्सवादी नेता अपनी हथेली में वोट की सरसों उगाना चाहते हैं| लोकसभा चुनावों में हुई उनकी दुर्गति से वे घबराए हुए हैं| लोकतंत्र् के झमेले में फंसे मार्क्सवादी अपने सिद्घांतों की बलि चढ़ाने में जरा भी संकोच नहीं कर रहे हैं| यदि ममता हिंसक माओवादियों और सत्ताप्रेमी कांग्रेसियों से हाथ मिला सकती है तो मार्क्सवादी मुल्ला और मार्क्स का &#8216;कॉकटेल&#8217; क्यों नहीं बना सकते ?</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">यह तो वे पहले भी कर चुके हैं| कट्रटरपंथी मुल्लाओं की नाराज़गी से बचने के लिए हमारे बहादुर मार्क्सवादियों ने तसलीमा नसरीन के साथ कैसा बर्ताव किया था ? तसलीमा को सुरक्षा देने के बजाय बंगाल सरकार ने उसे भागने के लिए मजबूर कर दिया था| क्या मार्क्सवादी बंगाल के लिए यह गर्व की बात थी कि एक लोकपि्रय बांग्ला लेखिका अपनी जान बचाने के लिए दिल्ली के आस-पास छुपी रही ? इस घुटना-टेक नीति ने भी मार्क्सवादियों को मुसलमान वोट नहीं दिलवाए| अब आरक्षण की रेवड़ी उन्हें कुछ वोट शायद दिलवा देगी लेकिन उनके दम पर वे सरकार बना पाएंगे, यह संदेहास्पद है| बंगाल की हार हमारे मार्क्सवादियों के लिए प्रतिक्रांति-जैसा झटका सिद्घ होगी| मोह-भंग की उस वेला में मार्क्सवादी पार्टी जात और मजहब से ऊपर उठकर यदि सचमुच सर्वहारा का नेतृत्व करने के लिए कमर कस लेगी तो वह बंगाल से भी बड़ा मैदान मार सकती है| हमारे देश के गए-बीते जातिवादी और मजहबवादी दलों का वह सच्चा लोकतांत्र्िक विकल्प बन सकती है| उसके पास जितने विचारशील और स्वच्छ नेता हैं, उतने देश में किसी अन्य दल के पास नहीं हैं लेकिन वोटों की चकाचौंध ने उनकी भी मति हर ली है|</span></p>
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		<title>ठीक-ठाक चल रहा है भारत !</title>
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		<pubDate>Fri, 17 Sep 2010 11:12:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डॉ. वेदप्रताप वैदिक</dc:creator>
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		<description><![CDATA[[pullquote]देश में सब कुछ ठीक -ठाक चल रहा है &#124; ठीक-ठाक का सही मतलब भारत में क्या होता है ये आप सभी जानते हैं &#124; क्योंकि जब तक कोई कारगिल , संसद , मुंबई आदि पर हमले या भोपाल गैस ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;">[pullquote]<strong><em>देश में सब कुछ ठीक -ठाक चल रहा है | ठीक-ठाक का सही मतलब भारत में क्या होता है ये आप सभी जानते हैं | क्योंकि जब तक कोई कारगिल , संसद , मुंबई आदि पर हमले या भोपाल गैस कांड जैसा कोई बड़ा बबाल ना हो हम अपने हालात ठीक-ठाक ही समझते हैं !  और ऐसे ही ठीक -ठाक हालात का जायजा लिया गया है इस लेख में | </em>जनोक्ति डेस्क</strong> |[/pullquote]<span style="font-size: 13.3333px;">मोटे तौर पर देखें तो भारत में सब ठीक-ठाक ही चल रहा है। न हम किसी युद्ध में फंसे हैं, न कोई दंगे हो रहे हैं, न चीन और पाकिस्तान की तरह हजारों लोग बाढ़ में मर रहे हैं, न सरकार के गिरने की कोई नौबत है। विकास दर में बढ़ोतरी हो रही है, महंगाई थोड़ी घटी है, करोड़पतियों की संख्या बढ़ी है, श्रीलंका, नेपाल और पाकिस्तान जैसे देशों को हम करोड़ों रुपए यों ही दे देते हैं। हमारे दिल्ली जैसे शहर यूरोपीय शहरों से होड़ ले रहे हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-7240" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%a0%e0%a5%80%e0%a4%95-%e0%a4%a0%e0%a4%be%e0%a4%95-%e0%a4%9a%e0%a4%b2-%e0%a4%b0%e0%a4%b9%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%88-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a4%a4/attachment/customer_indiamap/"><img class="alignright size-full wp-image-7240" title="Customer_IndiaMap" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/09/Customer_IndiaMap.jpg" alt="" width="361" height="400" /></a>हजारों करोड़ रुपए हम खेलों पर खर्च कर रहे हैं तो फिर रोना किस बात का है? देश में एक अजीब-सा माहौल क्यों बनता जा रहा है? खासतौर से तब जबकि देश के दो प्रमुख दल कांग्रेस और भाजपा पक्ष और विपक्ष की भूमिका निभाने की बजाय पक्ष और अनुपक्ष की तरह गड्ड-मड्ड हो रहे हैं?</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसा क्या है, जो देश को दिख तो रहा है, लेकिन समझ में नहीं आ रहा है?,जो समझ में नहीं आ रहा, वह एक पहेली है। पहेली यह है कि देश में संसद है, सरकार है, राजनीतिक दल हैं, लेकिन कोई नेता नहीं है? सोनिया गांधी लगातार चौथी बार कांग्रेस अध्यक्ष चुनी गईं। रिकॉर्ड बना, लेकिन कोई लहर नहीं उठी। डॉ मनमोहन सिंह ने भी रिकॉर्ड कायम किया। नेहरू और इंदिरा के बाद तीसरे सबसे दीर्घकालीन प्रधानमंत्री हैं, लेकिन वे हैं या नहीं हैं, यह भी देश को पता नहीं चलता।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">आध्यात्मिक दृष्टि से यह सर्वश्रेष्ठ स्थिति है। ऐसी स्थिति, जिसमें होना न होना एक बराबर ही होता है। इसमें जरा भी शक नहीं कि सोनिया गांधी और मनमोहन सिंह के बीच जैसा सहज संबंध है, वैसा सत्ता के गलियारों में लगभग असंभव होता है। भारत में सत्ता के ये दो केंद्र हैं या एक, यह भी पता नहीं चलता। न तो उनमें कोई तनाव है और न ही स्वामी-दास भाव है, जैसा कि हम व्लादिमीर पुतिन और दिमित्री मेदवेदेव के बीच मास्को में देखते हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">इसी प्रकार सत्ता पक्ष और विपक्ष देश में है तो सही, लेकिन कहीं कोई चुनौती दिखाई नहीं पड़ती। छोटे-मोटे क्षेत्रीय दल जो कांग्रेस के साथ हैं, उनके नेता भ्रष्टाचार के ऐसे मुकदमों में फंसे हुए हैं कि कांग्रेस ने जरा स्क्रू कसा नहीं कि वे सीधे हो जाते हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">जिस बात का वे निरंतर विरोध करते हैं, उसी पर दौड़कर समर्थन दे देते हैं। जैसा कि परमाणु सौदे पर पिछली संसद में हुआ था। कांग्रेस का हाल भी वही है। वह उनके ब्लैकमेल के आगे तुरंत घुटने टेक देती है। जिस जातीय गणना का कांग्रेस ने 1931 में और आजाद भारत में सदा विरोध किया, अब कुछ जातिवादी क्षेत्रीय दलों के दबाव में आकर उसने अपनी नेता की भूमिका तज दी और अब वह उन अपने समर्थक दलों की पिछलग्गू बन गई है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">सत्तारूढ़ कांग्रेस सत्ता पर आरूढ़ जरूर है, लेकिन कई मुद्दों पर वह पत्ता भी नहीं हिला सकती। इससे भी ज्यादा दुर्दशा विपक्षी दलों की है। कम्युनिस्ट पार्टियां अभी भी मुखर हंै, लेकिन पिछले चुनाव में वे अपने गढ़ों में ही पिट गईं। उनका आपसी लत्तम-धत्तम इतना प्रखर हो गया है कि उनके मुखर होने पर देश का ध्यान ही नहीं जाता। जोशी-डांगे-मुखर्जी और नंबूदिरिपाद की कम्युनिस्ट पार्टियों में आज के जैसा संख्या-बल नहीं था, लेकिन वाणी-बल था, जो सारे देश में प्रतिध्वनित होता था।</span></p>
<p style="text-align: justify;">नेहरू जैसे नेता को भी उस पर प्रतिक्रिया करनी पड़ती थी। आजकल यही पता नहीं चलता कि वामपंथ का असली प्रवक्ता कौन है। मार्क्‍सवादी पार्टी के महासचिव प्रकाश करात ने परमाणु-हर्जाना विधेयक का विरोध जरूर किया, लेकिन वह नक्कारखाने में तूती की तरह डूब गया। वे दिन गए, जब लोहिया के पांच-सात लोग पूरी संसद को अपनी चिट्टी उंगली पर उठाए रखते थे। अब दिन में दीया लेकर ढूंढ़ने निकलो तो भी कोई समाजवादी नहीं मिलता।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">इतनी बड़ी संसद में क्या एक भी सांसद ऐसा है, जो लोहिया की तरह पूछ सके कि प्रधानमंत्रीजी, आप पर 25000 रुपए प्रतिमाह कैसे खर्च हो रहे हैं और आम आदमी तीन आने रोज पर कैसे गुजारा करेगा? अब तो पूंजीवादी, समाजवादी, साम्यवादी, दक्षिणपंथी और वामपंथी- सभी एक पथ के पथिक हो गए हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">सबसे बड़े विपक्षी दल के तौर पर भाजपा जबर्दस्त भूमिका निभा सकती थी, लेकिन वह बिना पतवार की नाव बन गई है। उसका अध्यक्ष भी कांग्रेस अध्यक्ष की तरह आसमान से उतरने लगा है। वह अपने नेताओं के कंधों पर बैठा है, लेकिन उसके पांव नहीं हैं। उसे पांव की जरूरत भी क्या है?</span></p>
<p style="text-align: justify;">भाजपा में हाथ-पांव ही हाथ-पांव हैं। यह कार्यकर्ताओं की पार्टी ही तो है। इसमें गलती से एक नेता उभर आया था। उसे जिन्ना ले बैठा। अब कांग्रेस की तरह भाजपा के शिखर पर भी शून्य हो गया है। ये शून्य-शिखर आपस में जुगलबंदी करते रहते हैं। शून्य-शिखरों की इस जुगलबंदी में से कुछ समझौते निकलते हैं और कुछ शिष्टाचार निभते हैं, लेकिन कोई वैकल्पिक समाधान नहीं निकलते। भारत की राजनीति में से द्वंद्वात्मकता का तिरोधान हो गया है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">यह एकायामी (वन डायमेंशनल) राजनीति नौकरशाहों और सरकारी बाबुओं के कंधों पर टिकी हुई है। इसमें पार्टियों की भूमिका गौण हो गई है। जनता और सरकार के बीच पार्टी नाम का सेतु लगभग अदृश्य हो गया है। जब पार्टी ही अप्रासंगिक हो गई है तो नेता की जरूरत कहां रह गई है? बिना नेता के ही यह देश चला जा रहा है। यह लोकतंत्र का सबसे बड़ा अजूबा है। बाबुओं के दम पर बाबुओं का राज चल रहा है। आम जनता के प्रति हमारे बाबुओं का जो रवैया होता है, वही आज हमारे नेताओं का है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">देश में अगर आज कोई नेता होता तो क्या वह अनाज को सड़ने देता? यह ठीक है कि उच्चतम न्यायालय को ऐसे मामलों में टांग नहीं अड़ानी चाहिए, लेकिन भूखों को मुफ्त बांटने के विरुद्ध ऐसे तर्क वही दे सकता है, ‘जाके पांव फटी न बिवाई’! सरकार तो सरकार, विपक्ष क्या कर रहा है?</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">वह उन गोदामों के ताले क्यों नहीं तुड़वा देता? धरने क्यों नहीं देता? सत्याग्रह क्यों नहीं करता? भ्रष्टाचार क्या सिर्फ केंद्र में है? क्या राज्य सरकारें दूध की धुली हुई हैं? भाजपा और जनता दल के राज्यों में कोई चमत्कारी कदम क्यों नहीं उठाया जाता? माओवादियों से पांच-सात राज्य ऐसे लड़ रहे हैं, जैसे वे पांच-सात स्वतंत्र राष्ट्र हों। क्यों हो रहा है, ऐसा? इसीलिए कि देश में कोई समग्र नेतृत्व नहीं है। चीनियों के आगे भारत को क्यों घिघियाना पड़ रहा है?</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">कश्मीर में कोरे शब्दों की चाशनी क्यों घुल रही है? कोई बड़ी पहल क्यों नहीं हो रही है? इसीलिए कि भारत की राजनीति के बगीचे में सिर्फ गुलदस्ते सजे हुए हैं। इन गुलदस्तों में न कोई कली चटकती है और न फूल खिलते हैं। जो फूल सजे हुए हैं, उनमें खुशबू भी नहीं है। भारत का नागरिक समाज या चौथा खंभा भी इतना मजबूत नहीं है कि वह नेतृत्व कर सके। इसके बावजूद भारत है कि चल रहा है। अपनी गति से चल रहा है। शिखरों पर शून्य है तो क्या हुआ? मूलाधार में तो कोई न कोई कुंडलिनी लगी हुई है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">
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