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पतन की ओर अग्रसर भारतीय कृषि

पतन की ओर अग्रसर भारतीय कृषि

0 ब्रज किशोर सिंह / 2010/07/26 10:00 am

कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य पदार्थों के उत्पादन से सम्बंधित है.मानव सभ्यता के इतिहास में कृषि की खोज को इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि इसे नवपाषाणकालीन क्रांति

रासायनिक खेती से उपज बढ़ने का झूठ !

रासायनिक खेती से उपज बढ़ने का झूठ !

0 डॉ राजेश कपूर / 2010/07/25 8:16 am

56 से घटकर 30 क्विंटल रह गई यानि ये दावे पूरी तरह गलत हैं, झूठे हैं कि उपज बढ़ाने के लिए रासायनिक खेती की जरूरत है। सच तो यह है

बन्दरों को भोजन न दें !

बन्दरों को भोजन न दें !

1 डॉ राजेश कपूर / 2010/07/24 5:16 pm

सरकार के आह्वान पर ध्यान देना चाहिए। खेती को खत्म करने की अनेक योजनाओं में से एक हैं बन्दरों का सदुपयोग। हजारों साल से किसान और बन्दर दोनों अपने-अपने अस्तित्व

मोनसेंटो के विनाशकारी मक्का बीज

मोनसेंटो के विनाशकारी मक्का बीज

0 डॉ राजेश कपूर / 2010/07/19 2:51 pm

विनाशकारी ‘‘बीटी कॉटन ’’ बीज की निर्माता कम्पनी मौनसेण्टों ने हिमाचल में भी अपने पांव तेजी से पसारने शुरू कर दिये हैं। ‘‘डिकाल्ब’’ नामक मक्का बीज मण्डी, हमीरपुर के बाद

गंगा रक्षा, भारत रक्षा, अभी वक्त है चेतो भारतवासियो

गंगा रक्षा, भारत रक्षा, अभी वक्त है चेतो भारतवासियो

1 राजेश त्रिपाठी / 2010/07/18 11:52 am

पुण्य सलिला सुरसरी, पतितपावनी, जगउद्धारिणी गंगा जिसका हर भारतवासी से जन्म से लेकर मरण तक का अटूट नाता है।  जिसे श्रद्धा से  गंगा मैया कह कर बुलाते हैं और जो जाने

जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव

जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/06 6:53 pm

पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश ने विभिन्न प्रकार के जलवायु परिवर्तन देखे हैं। जब पूर्वी उत्तर प्रदेश भयंकर बाढ़ की चपेट में था ठीक उसी समय बुंदेलखंड सूखे की

जहर उगलती इंसानी मशीने और पर्यावरण विनाश

जहर उगलती इंसानी मशीने और पर्यावरण विनाश

0 नरेन्द्र निर्मल / 2010/06/05 11:38 am

सवेरा अब होने को है बस चंद पलो का इंतजार है सूरज की लाल किरनें जब धरा पर उतरेंगी प्रभात की बेला में हर ओर मेला सा लग जाएगा पेड़-पौधे

बहू-बेटियों के हत्यारे, चले हैं बाघ बचाने

बहू-बेटियों के हत्यारे, चले हैं बाघ बचाने

2 कुमारेन्द्र / 2010/02/22 10:06 am

देश की जनता में एकदम से बाघों को बचाने की होड़ शुरू हो गई है। लिख-लिख कर कागज काले कर डाले (वैसे अब कागज काले करने की जरूरत नहीं ब्लाग

सरकारी जल नीति की हकीकत

सरकारी जल नीति की हकीकत

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/01/21 5:59 pm

। हम भीतर बाहर से जल ही से जुड़े हुए हैं। पीने के लिए, खाद्यान्न उत्पादन के लिए, उद्योग, बिजली उत्पादन इत्यादि के लिए भी जल ही चाहिए। जैसे जल

अब नदियों का मिलन हुआ अधूरा

अब नदियों का मिलन हुआ अधूरा

0 जनोक्ति डेस्क / 2009/11/27 9:14 am

नदियाँ किसी भी देश की जीवनदायनी शक्ति होती है .भारत की 50 प्रतिशत से ज्यादा आबादी नदियों से ही अपनी अजीविका कमाने में सक्षम हो पाती है . वहीँ इस