आखिर मीडिया.. संजीव भट्ट की सच्चाई देश को क्यों नहीं बताती ??
7मित्रों कांग्रेस और विदेशी ताकतों के फेके टुकड़े पर पलने वाली मिडिया आखिर संजीव भट्ट के बारे मे इस देश के सामने सिर्फ आधी सच्चाई ही क्यों दिखा रही है
रविश कुमार (जाने -माने पत्रकार हैं ) अमेरिका में ओबामा कम हो रहे हैं। भारत में ओबामा अत्यधिक हुए जा रहे हैं। पांच दिनों से ओबामा के बारे में हर
एक सेकुलर का प्रलाप अरे !। बुखारी जी तुमने ये क्या किया ? पत्रकार की छाती पर नहीं.. तुमने तो हमारे मुहं पर लातमार दी !अब मुहं कैसे खोलें ?
“मत कहो, आकाश में कुहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ” दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति वर्तमान मीडिया परिवेश में अक्षरतः सटीक बैठती हैं। कलम की स्याही सूख रही
मित्रों कांग्रेस और विदेशी ताकतों के फेके टुकड़े पर पलने वाली मिडिया आखिर संजीव भट्ट के बारे मे इस देश के सामने सिर्फ आधी सच्चाई ही क्यों दिखा रही है
रविश कुमार (जाने -माने पत्रकार हैं ) अमेरिका में ओबामा कम हो रहे हैं। भारत में ओबामा अत्यधिक हुए जा रहे हैं। पांच दिनों से ओबामा के बारे में हर
एक सेकुलर का प्रलाप अरे !। बुखारी जी तुमने ये क्या किया ? पत्रकार की छाती पर नहीं.. तुमने तो हमारे मुहं पर लातमार दी !अब मुहं कैसे खोलें ?
“मत कहो, आकाश में कुहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ” दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति वर्तमान मीडिया परिवेश में अक्षरतः सटीक बैठती हैं। कलम की स्याही सूख रही
80 के दशक की यादें ताज़ा हो गईं. तब गांव में एक बड़े हॉल में एक टीवी पर वीडियो फिल्में देखने जाता था. चाहे शक्ति कपूर हो, अमरीश पुरी या फिर
तेजी से दर्शकों के मानसपटल पर छा जाने वाले संचार क्रांति के सशक्त माध्यम, खबरिया चैनल मनोरंजन चैनलों में तब्दील होते जा रहे हैं। राजनीतिक खबरों को पीछे धकेलते हुए
किसी भी लोकतान्त्रिक देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होना ही चाहिए। फिर भी इस विषय पर बार-बार विवाद खड़े होते हैं। प्रायः लोग इसे राजनीति में घसीटकर इस या उस
दूसरों के दुखःदर्द व जुल्म सितम के लिए रोजाना लड़ाई लड़ने वाले कलम के सिपाहियों के हक के लिए कोई खड़ा नहीं दिखता है। समाज में व्याप्त बराबरी-गैरबराबरी से पत्रकारों
आज कल टेलीविजन पर प्रतिदिन ज्योतिषों का मेला लगा रहता है और उनकी बातें कुछ अजीब तरह का सनक मन में पैदा कर देती है। आपका शनि चौथे घर मे
सवाल यह उठता है कि यदि यही आरोप महिला हॉकी टीम की खिलाडी ने हॉकी संघ के बाहर के किसी व्यक्ति पर लगाया होता, मसलन किसी दर्शक पर, क्या तब