पतन की ओर अग्रसर भारतीय कृषि

कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य पदार्थों के उत्पादन से सम्बंधित है.मानव सभ्यता के इतिहास में कृषि की खोज को इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि इसे नवपाषाणकालीन क्रांति भी कहा जाता है.यह कृषि ही थी जो पूरी दुनिया में विभिन्न सभ्यताओं के जन्म लेने का कारण बनी.यह शुरू से ही पशुपालन से कुछ इस तरह जुड़ी रही है कि दोनों को एक-दूसरे का पूरक भी कहा जा सकता है.कृषि ने ही घनी आबादी वाली बस्तियों →आगे पढ़ें ..

रासायनिक खेती से उपज बढ़ने का झूठ !

56 से घटकर 30 क्विंटल रह गई यानि ये दावे पूरी तरह गलत हैं, झूठे हैं कि उपज बढ़ाने के लिए रासायनिक खेती की जरूरत है। सच तो यह है कि रासायनिक खेती से उपज घट रही है और देश में अनाज की कमी बढ़ रही है जबकि खेती को घाटे का सौदा बनाने के लिए खर्च जान बूझकर बढ़ाया जा रहा है। इस विदेशी प्रयास में स्वदेशी, सरलचित वैज्ञानिकों का इस्तेमाल किया जा रहा है। रासायनिक खेती से घटती उपज के प्रमाण हमने जितने किसानों →आगे पढ़ें ..

बन्दरों को भोजन न दें !

सरकार के आह्वान पर ध्यान देना चाहिए। खेती को खत्म करने की अनेक योजनाओं में से एक हैं बन्दरों का सदुपयोग। हजारों साल से किसान और बन्दर दोनों अपने-अपने अस्तित्व को बनाए हुए थे। अनायास बन्दर खेती के लिए मुसिबत बन गए। समस्या इतनी विकराल हो गई कि हजारों किसानों को खेती छोड़नी पड़ गई हैं। उनकी आर्थिक स्थिति पहले ही अच्छी नहीं थी, अब और बिगड़ गई। हिमाचल के हजारों एकड़ खेत खाली पड़े हैं जो किसानों →आगे पढ़ें ..

मोनसेंटो के विनाशकारी मक्का बीज

विनाशकारी ‘‘बीटी कॉटन ’’ बीज की निर्माता कम्पनी मौनसेण्टों ने हिमाचल में भी अपने पांव तेजी से पसारने शुरू कर दिये हैं। ‘‘डिकाल्ब’’ नामक मक्का बीज मण्डी, हमीरपुर के बाद अब प्रदेश के कई भागों में उगाने शुरू हो गए हैं। इन बीजों का मिट्टी, मनुष्यों और पर्यावरण पर कितना और कैसा बुरा प्रभाव होना है, यह तो आने वाला समय बतलाएगा। पर इस कम्पनी के पिछले कार्यों को देखकर ऐसी आंशका स्वाभाविक है →आगे पढ़ें ..

जलवायु परिवर्तन का कृषि पर प्रभाव

पिछले एक दशक में उत्तर प्रदेश ने विभिन्न प्रकार के जलवायु परिवर्तन देखे हैं। जब पूर्वी उत्तर प्रदेश भयंकर बाढ़ की चपेट में था ठीक उसी समय बुंदेलखंड सूखे की मार झेल रहा था। इस जलवायु परिवर्तन के द्वारा न केवल भारी संख्या में लोग मौत का शिकार हो रहे हैं बल्कि इससे उनकी आजीविका पर भी गंभीर प्रभाव पड़ रहा है। पूर्वी- उत्तर प्रदेश में जहाँ धान की सारी फसल बरबाद हो गयी वहीं बुंदेलखंड में स्थानीय →आगे पढ़ें ..

जहर उगलती इंसानी मशीने और पर्यावरण विनाश

सवेरा अब होने को है बस चंद पलो का इंतजार है सूरज की लाल किरनें जब धरा पर उतरेंगी प्रभात की बेला में हर ओर मेला सा लग जाएगा पेड़-पौधे इतरायेंगे अपने पत्तों को भी जगायेंगे चिड़ियों का कलरव शुरू होगा तितलियों का झुरमुठ प्रखर होगा फूलों के बाजार सजे-धजे नजर आयेंगे भौरे खरीदार परागों की बोलियां लगायेंगे कुछ पलों तक इसी तरह का शोर-शराबा रहेगा और एक खास इंसान एक तरफ बैठकर बस →आगे पढ़ें ..