लोकतंत्र से आगे बौद्धिक लोकतंत्र – 26
0बौद्धिक जन-समुदाय के समक्ष चुनौती किसी भी परिवर्तनशील समाज अथवा देश में लोगों के लाभ और हानियाँ उनकी व्यक्तिगत या सामूहिक स्थिति के सापेक्ष परिवर्तन की दिशा पर निर्भर करते
15 अगस्त का जश्न मनाने को पूरा देश तैयार हो रहा है, अपनी गुलामी से मुक्त हुए 63 साल पूरे कर लिए हमने । हम हिन्दुस्तान से आगे बढ्ते हुए
बुंदेलखंड की मऊ तहसील के एक गांव में किसान घोटवा ने अपने तीन बच्चों को जहर के चावल खिलाकर मौत की नींद सुला दिया। ग्रामीण बताते हैं कि वह एक
हजारों लाखों बलिदानी शहीदों की कुरबानियों ने हमें परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कर स्वच्छंद वातावरण में सांस लेने की आजादी दी। बरसों की गुलामी के बाद हमने आजादी पायी।
बौद्धिक जन-समुदाय के समक्ष चुनौती किसी भी परिवर्तनशील समाज अथवा देश में लोगों के लाभ और हानियाँ उनकी व्यक्तिगत या सामूहिक स्थिति के सापेक्ष परिवर्तन की दिशा पर निर्भर करते
बौद्धिक जनतंत्र में तुरंत क्या किया जायेगा बौद्धिक जनतंत्र संपूर्ण रूप में एक नवीन व्यवस्था है जिसमें शोषण के लिए कोई स्थान नहीं है. अतः अनेक शक्तिशाली लोग इसका विरोध
भारत का मनोवैज्ञानिक यथार्थ भारतीय समाज के बारे में सार्थक कार्य करने वाला कोई भी समाज शास्त्री भारत के मनोवैज्ञानिक यथार्थ की अनदेखी नहीं कर सकता. इसलिए भारतीय समाज पर
शासन और व्यवस्था का अंतराल भारत में बौद्धिक जनतंत्र की स्थापना की दिशा में कदम रखने से पूर्व हम अपने बौद्धिक साथियों को शासन और व्यवस्था के शब्द जाल से
जात ही पुछो साधु की,मत पुछिए ज्ञान, मोल करो मयान का,ऊपर से होती पहचान | भारतीय सामाजिक व्यवस्था में दोहों का मतलब बदलने में समय नही लगता. झुठ,फरेब और ऊपरी
नक्सली हिंसा से निपटने की ताजा रणनीति के तहत केन्द्र सरकार ने नक्सल प्रभावित राज्यों के सीएम ( मुख्यमंत्रियों) के साथ प्रधानमंत्री डॉ मनमोहन सिंह के साथ एक बैठक आयोजित
25. देह व्यापार 25.1 देह-व्यापार उन्मूलन की दिशा में पहले से कार्यरत सामाजिक संगठनों को सरकार की ओर से इस कुप्रथा को समाप्त करने के लिये अधिकृत किया जायेगा और
बौद्धिकता प्रतीक एवं परिचय बौद्धिक लोगों के सत्तारोहण हेतु उनका परस्पर समन्वय आवश्यक है, जिसके लिए परस्पर सहमत व्यक्तियों का एक दूसरे से परिचय भी आवश्यक है. ऐसे लोगों का
24 जनसंख्या नियंत्रण सह महिला सशक्तिकरण 24.1 जनसंख्या वृद्धि के लिये जो सामाजिक तबके और भौगोलिक क्षेत्र मुख्य रुप से जिम्मेवार हैं, उन तबकों तथा क्षेत्रों को प्राथमिकता देते हुए
भारतीय समाज में कौए को आमतौर पर अच्छा नही माना जाता। कारण, शायद उसकी कर्कश आवाज, कुटिल बुद्धि, तांक-झांक करने की आदत, उसका काला रंग आदि हो। लेकिन, अपनी इन