ये क्या हो रहा है ?
1देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी पर पटना से “ अनिकेत प्रियदर्शी ” ने अपने विचार जनोक्ति को लिखा है जिन्हें हम यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं : बेरोजगारी स्वतंत्र
बौद्धिक जनतंत्र में तुरंत क्या किया जायेगा बौद्धिक जनतंत्र संपूर्ण रूप में एक नवीन व्यवस्था है जिसमें शोषण के लिए कोई स्थान नहीं है. अतः अनेक शक्तिशाली लोग इसका विरोध
भारत का मनोवैज्ञानिक यथार्थ भारतीय समाज के बारे में सार्थक कार्य करने वाला कोई भी समाज शास्त्री भारत के मनोवैज्ञानिक यथार्थ की अनदेखी नहीं कर सकता. इसलिए भारतीय समाज पर
शासन और व्यवस्था का अंतराल भारत में बौद्धिक जनतंत्र की स्थापना की दिशा में कदम रखने से पूर्व हम अपने बौद्धिक साथियों को शासन और व्यवस्था के शब्द जाल से
देश की सबसे बड़ी समस्या बेरोजगारी पर पटना से “ अनिकेत प्रियदर्शी ” ने अपने विचार जनोक्ति को लिखा है जिन्हें हम यहाँ प्रकाशित कर रहे हैं : बेरोजगारी स्वतंत्र
मीडिया ने जेसिका लाल, प्रियदर्शनी मट्टू, नीतीश कटारा मामले में न्याय दिलाने में जबरदस्त भूमिका अदा की और अब रुचिका-राठौर मामले को जिस तरह से उजागर किया है वह प्रयास
आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो शाहरूख खान अभिनीत फिल्म ‘माई नेम इज खान’ भारतीय सिनेमा की सबसे कामयाब फिल्म साबित हो सकती है। कुछ महीनों पहले ही डेढ़
भारत को गांवों का देश कहा जाता है. अर्थात भारत को पहचान देने वाली विशेषताओं एवं जीवनशक्ति प्रदान करने वाले कारकों की नींव ग्रामीण व्यवस्था पर टिकी होती है. भारत
बीते दिनों एक जनाब – गाँधी पुलिस कार्यवाही में पकड़े गये जो नक्सली सरगना बताये जाते हैं . यूँ तो नक्सलों के मुख्य सरगना के रूप में कार्यरत थे .यूँ
टेलीविजन की लोकप्रियता का दायरा बढ़ाने में धारावाहिकों का अहम् योगदान रहा है । चाहे ‘महाभारत’ हो या ‘क्योंकि सास भी कभी बहु थी ‘ इन टीवी सीरियल्स ने न केवल सफलता पाई बल्कि सम्बंधित चैनल को भी एक नई ऊंचाई दी । गौरतलब है किटीवी के दर्शकों में सबसे बड़ी तादाद महिलाओं और बच्चों की रही है । यही वजह रही है कि अब तक ऐतिहासिक , पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर ज्यादातर धारावाहिकों का निर्माण किया जाता रहा है ।
देहरादून के रणवीर सिंह फर्जी मुठभेड़ काण्ड में हमारी खोजबीन के निष्कर्षों पर आज सीबीआई ने मुहर लगा दी। दिल्ली से निकलने वाले एक राष्ट्रीय दैनिक में प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित होने वाली खबर का यह आमुख है।
1996-97 से लेकर 2008-09 तक के रबड् की आँकडे जो भारतीय रबड् बोर्ड द्वारा प्रसारित की गई हैं . उनके विश्लेषण करने पर हेराफेरी के कई सबूत मिलते हैं . एक हेक्टर रबड् की खेती से एक लाख रुपये तक का लाभ मिलता हैं। परन्तू रबड् बोर्ड की तरफ से हेरा फेरी के आँकडे प्रसारित करके दाम ऊपर नीचे होने में मदद किया जा रहा है . यह किसानों के खिलाफ है