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काले धन की कालिख

काले धन की कालिख

0 देवसूफी राम बंसल / 2011/07/06 9:24 am

अपनी जिस आय पर कोई व्यक्ति समुचित आयकर का भुगतान नहीं करता है, उतना धन व्यक्ति का कालाधन कहलाता है. अतः कालाधन वैध तथा अवैध दोनों प्रकार के आय स्रोतों

माओवाद की राजधानी ‘मनातू’ जहाँ सांसद भी जाने से डरते हैं |

माओवाद की राजधानी ‘मनातू’ जहाँ सांसद भी जाने से डरते हैं |

2 जयराम "विप्लव" / 2011/02/05 4:52 pm

जनोक्ति की टीम झारखण्ड में माओवाद की जमीन तलाशने के लिए राजधानी रांची से होते हुए पलामू ( डाल्टेनगंज ) पहुंची | पलामू की जमीन पर कदम रखने से पहले

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

1 शिरीष खरे / 2010/11/04 5:56 pm

सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त.

लोकत्रंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -27

लोकत्रंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -27

0 देवसूफी राम बंसल / 2010/10/19 4:48 am

भारत की वर्तमान स्थिति ऐसी है जिसे राजनेताओं द्वारा जनता की लूट कहा जा सकता है, इसी लूट को भारत की वर्तमान ‘राजनीति‘ कहा जा सकता है. ऐसी स्थिति में

मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन

मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन

0 डॉ. वेदप्रताप वैदिक / 2010/10/01 3:32 pm

यदि कार्ल मार्क्स अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे| वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें| बंगाल

ठीक-ठाक चल रहा है भारत !

ठीक-ठाक चल रहा है भारत !

1 डॉ. वेदप्रताप वैदिक / 2010/09/17 4:42 pm

[pullquote]देश में सब कुछ ठीक -ठाक चल रहा है | ठीक-ठाक का सही मतलब भारत में क्या होता है ये आप सभी जानते हैं | क्योंकि जब तक कोई कारगिल

भ्रष्टाचार जारी है

भ्रष्टाचार जारी है

4 रमेश भट्ट / 2010/09/15 1:43 pm

बरांबकी उन 200 जिलों में से एक था जिसे साल 2006 में महात्मा गांधी नरेगा के तहत चुना गया। यहां योजना को लागू हुए चार साल से ज्यादा बीत चुके

सूखती स्याही और कुन्द होती खबरों की धार

सूखती स्याही और कुन्द होती खबरों की धार

0 के .पी. त्रिपाठी / 2010/09/10 10:46 pm

“मत कहो, आकाश में कुहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ” दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति वर्तमान मीडिया परिवेश में अक्षरतः सटीक बैठती हैं। कलम की स्याही सूख रही

फिल्मी नत्थे जैसा खुशनसीब नहीं हकीकत का नत्था

फिल्मी नत्थे जैसा खुशनसीब नहीं हकीकत का नत्था

0 राजेश त्रिपाठी / 2010/09/09 8:54 am

राजेश त्रिपाठी फिल्म ‘पीपली लाइव’ का ‘नत्था’ भले ही न मरता हो और उसकी मौत का इंतजार करते मीडिया को भले ही निराशा हुई हो लेकिन हकीकत कुछ और ही

भूख के पेट में मध्यप्रदेश के और 28 आदिवासी बच्चे

भूख के पेट में मध्यप्रदेश के और 28 आदिवासी बच्चे

1 शिरीष खरे / 2010/09/08 8:04 pm

एएचआरसी यानी एशियन ह्यूमन राइटस् कमीशन के अनुसार मध्यप्रदेश में 28 बच्चों ने कुपोषण के चलते दम तोड़ दिया है. पीडित बच्चों के परिवार सरकारी योजनाओं के तहत भोजन और