बिनायक सेन,नक्सलवाद और पिछड़ेपन की वजह
2भाकपा (माओवादी) हिंसा में विश्वास रखने वाले तथाकथित कम्युनिस्टों का एक संगठन है जिन्होंने बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से 1967 में सशस्त्र क्रांतिकारी गतिविधियों का रास्ता अपनाया | आज भारत
सुनिए जरा पाकिस्तान की छात्राएं भारत-पाक संबंधों के बारे में क्या सोचती हैं
आतंकियों के परिवार को हर संभव मदद का निर्णय करने वाली मनमोहन की खडाऊं सरकार इसे मानवता का नाम दे रही है | तो फ़िर क्या मानवता के नाते सिर्फ
भाकपा (माओवादी) हिंसा में विश्वास रखने वाले तथाकथित कम्युनिस्टों का एक संगठन है जिन्होंने बंगाल के नक्सलबाड़ी गांव से 1967 में सशस्त्र क्रांतिकारी गतिविधियों का रास्ता अपनाया | आज भारत
सुनिए जरा पाकिस्तान की छात्राएं भारत-पाक संबंधों के बारे में क्या सोचती हैं
आतंकियों के परिवार को हर संभव मदद का निर्णय करने वाली मनमोहन की खडाऊं सरकार इसे मानवता का नाम दे रही है | तो फ़िर क्या मानवता के नाते सिर्फ
यदि कार्ल मार्क्स अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे| वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें| बंगाल
बिहार विधानसभा चुनाव को शांति से संपन्न कराने के लिए एक ओर चुनाव आयोग और राज्य सरकार अपनी तैयारियों में जुटा है वहीं दूसरी ओर राज्य विरोधी नक्सली भी चुनाव
[pullquote]देश में सब कुछ ठीक -ठाक चल रहा है | ठीक-ठाक का सही मतलब भारत में क्या होता है ये आप सभी जानते हैं | क्योंकि जब तक कोई कारगिल
भाजपा की वसुन्धरा राजे सरकार को भ्रष्ट और भू-माफिया से साठगांठ रखने वाली सरकार घोषित करके जनता से विकलांग समर्थन हासिल करने वाली राजस्थान की काँग्रेस सरकार में भी इन
बरांबकी उन 200 जिलों में से एक था जिसे साल 2006 में महात्मा गांधी नरेगा के तहत चुना गया। यहां योजना को लागू हुए चार साल से ज्यादा बीत चुके
राजेश त्रिपाठी फिल्म ‘पीपली लाइव’ का ‘नत्था’ भले ही न मरता हो और उसकी मौत का इंतजार करते मीडिया को भले ही निराशा हुई हो लेकिन हकीकत कुछ और ही