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सोमरस के विषय में कुछ निराकरण

सोमरस के विषय में कुछ निराकरण

3 ANAND PANDEY / 2010/11/25 5:53 pm

बहुत दिनों के पहले हमने सोमरस पर एक लेख लिखा था जिसमें कई वैदेशिक विद्वानों के मतों का उल्‍लेख तथा यथाशक्‍य उनका दुराग्रह खण्‍डन किया गया था  ।  किन्‍तु पर्याप्‍त

घी और सूर्य किरणों में पुष्टिदायक तत्त्व- वेदों में विज्ञान !

घी और सूर्य किरणों में पुष्टिदायक तत्त्व- वेदों में विज्ञान !

1 ANAND PANDEY / 2010/11/12 3:31 pm

विदित हो कि आज का विज्ञान चिल्ला-चिल्ला कर घी को और सूर्य की किरणों को उर्जा का स्रोत कहता है ! और आज सभी लोग इस बात को स्वीकार करते भी हैं

यज्ञ हो तो हिंसा कैसे ।। वेद विशेष ।।

यज्ञ हो तो हिंसा कैसे ।। वेद विशेष ।।

0 ANAND PANDEY / 2010/11/11 3:29 pm

।। सम्‍पूर्ण मन्‍त्र यहाँ देखें ।। संकेत – अग्‍ने यं ……………………………………………………….. इद्देवेषु गच्‍छति ।। (ऋग्‍वेद – 1/1/4) भावार्थ – हे अग्निदेव । आप जिस हिंसा रहित यज्ञ को चारों ओर

वेदों में विज्ञान

वेदों में विज्ञान

1 ANAND PANDEY / 2010/11/09 1:39 pm

।। मूल मन्‍त्र यहाँ देखें ।। आज के युग में भारतीय मेधा के प्रथम प्रदर्शन ‘वेद’ विद्या के प्रसार प्रचार की बहुत ही आवश्‍यकता है । वेदों के विषयों में

कब मिलेगा आधी आबादी को पूरा हक़ ?

कब मिलेगा आधी आबादी को पूरा हक़ ?

0 कीर्ति सिंह / 2010/04/27 6:56 pm

आलेख : – कीर्ति सिंह , सहायक संपादक मीडियामोर्चा , पटना आधी आबादी का सच यह है कि आज भी आजादी के वर्षों बाद पूरी तरह से सशक्तिकरण नहीं हो

नारी की आज़ादी

नारी की आज़ादी

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/04/06 10:32 pm

पिछले कई दशक से हमारे समाज में महिलाओं को पुरुषों के बराबर का दर्जा देने के सम्बन्ध में एक निर्थक सी बहस चल रही है. जिसे कभी महिला वर्ष मना

कौटिल्य के बारे में मणिशंकर प्रसाद के विचार

कौटिल्य के बारे में मणिशंकर प्रसाद के विचार

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/24 12:00 am

भारतीय राजनीतिक चिंतन के इतिहास में कौटिल्य एक ऐसा नाम है जिसके व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों में विलक्षणता है। कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ कई संदर्भों में दुरूह होते हुए भी अर्थ-व्यवस्था,

झूठ नहीं बोलता इतिहास:जगदीश चंद्रिकेश

झूठ नहीं बोलता इतिहास:जगदीश चंद्रिकेश

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/23 12:23 am

इतिहास हमेशा विजेताओं का हुआ करता है या शासकों का, पराजित या शासितों का नहीं, क्योंकि इतिहास तो वही लिखवा सकते हैं, और लिखवाते हैं, जो सत्ता में होते हैं।

प्राचीन भारतवर्ष में नारी

प्राचीन भारतवर्ष में नारी

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/22 11:58 pm

भारतवर्ष में सदा से स्त्रियों का समुचित मान रहा है। उन्हें पुरुषों की अपेक्षा अधिक पवित्र माना जाता रहा है। स्त्रियों को बहुधा ‘देवी’ संबोधन से संबोधित किया जाता है।

त्रयम्बकेश्वर जाने के बाद….

त्रयम्बकेश्वर जाने के बाद….

0 उमेश पंत / 2009/10/20 4:29 pm

इस बार त्रयम्बकेश्वर जाना हुआ। लगा कि भक्ति और आस्था ये ऐसे शब्द हैं जिनका कट्टरवाद से कोई लेना देना नहीं है। महाराष्ट्र में नासिक के पास एक छोटा सा