Post Tagged with: "india"

देश को अशांत करने का मसौदा है ये बिल

देश को अशांत करने का मसौदा है ये बिल

0 saurabh chauhan / 2011/06/08 9:43 pm

वातावरण को देखिये बहुत हलचल है! कही पुलिस का डंडा है तो कही आम आदमी का आंदोलन या अनशन! क्या जरुरत है आम जनता को आज डेल्ही के दरबार में

क्रिकेट का भारतीयकरण या भारतीयों का क्रिकेटीकरण?

क्रिकेट का भारतीयकरण या भारतीयों का क्रिकेटीकरण?

1 पवन कुमार अरविंद / 2011/04/05 9:52 pm

मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में 49वें ओवर की दूसरी गेंद पर महेंद्र सिंह धोनी के छक्का मारते ही देश भर में ‘इंडिया-इंडिया’ के नारे गूंजने लगे। चक दे इंडिया। कुछ

आम लोगों की एकजुटता से झुकेगी सत्ता

आम लोगों की एकजुटता से झुकेगी सत्ता

0 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/11/29 8:07 pm

आज हमारे लिये सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है कि देश या समाज के लिये न सही, कम से कम अपने आपके और अपनी आने वाली पीढियों के सुखद एवं सुरक्षित

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

1 शिरीष खरे / 2010/11/04 5:56 pm

सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त.

उच्च न्यायालय का फैसला और विवाहित बेटियां

उच्च न्यायालय का फैसला और विवाहित बेटियां

5 प्रीति श्रीवास्तव / 2010/11/04 5:42 pm

- प्रीति वैसे तो ये पढ़ कर सचमुच बहुत अच्छा लगा की अब विवाहित बेटियां भी अपने पिता की ज़गह अपने घर को चला सकती है और अपने कर्तव्यों का

लोकत्रंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -27

लोकत्रंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -27

0 देवसूफी राम बंसल / 2010/10/19 4:48 am

भारत की वर्तमान स्थिति ऐसी है जिसे राजनेताओं द्वारा जनता की लूट कहा जा सकता है, इसी लूट को भारत की वर्तमान ‘राजनीति‘ कहा जा सकता है. ऐसी स्थिति में

हिंदी सिनेमा का सफ़र -4

हिंदी सिनेमा का सफ़र -4

1 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/16 9:19 am

हिंदी सिनेमा के इतिहास में अब तक आपने पढ़ा (पिछली पोस्ट पढ़ें ) सामाजिक-पारिवारिक समस्याओं पर बनीं फिल्में 1930-1940 तक के बड़े बैनर थे न्यू थिएटर्स, प्रभात, बांबे टॉकीज, मिनर्वा

हिंदी सिनेमा का सफ़र -3

हिंदी सिनेमा का सफ़र -3

1 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/13 9:00 am

हिंदी सिनेमा के इतिहास में अब तक आपने पढ़ा (पिछली पोस्ट पढ़ें ) पुराने जमाने में भी हिट थीं जोड़ियां पुराने जमाने में फिल्मों के प्रमुख कलाकारों के चयन के

हिंदी सिनेमा का सफ़र -2

हिंदी सिनेमा का सफ़र -2

2 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/10 8:51 am

हिंदी सिनेमा के इतिहास में अब तक आपने पढ़ा (पिछली पोस्ट पढ़ें ) फिल्मों ने जब बोलना शुरू किया तो दर्शकों को बड़ा अचरज हुआ। चलती-फिरती तस्वीरें बोलने भी लगीं,

हिंदी सिनेमा का सफ़र- 1

हिंदी सिनेमा का सफ़र- 1

2 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/05 8:20 am

आज भारत विश्व में सर्वाधिक फिल्में निर्मित करनेवाला देश है लेकिन देश में सिनेमा की शुरुआत आसान नहीं रही। आज हमारा सिनेमा जिस मुकाम पर है, उसे वहां तक पहुंचने