Post Tagged with: "history,इतिहास"

कानपुर में कला समागम

कानपुर में कला समागम

0 माणिक जी / 2010/05/25 4:47 pm

एक तरफ आज के दौर में विद्यार्थियों में अपने करिअर बनाने और बिगाड़ने की मची हुई है वहीं हम देख रहे हैं कि इस जीवन की राहें बड़ी विकट स्तिथि

बुन्देली लोकसाहित्य पर पहचान का संकट

बुन्देली लोकसाहित्य पर पहचान का संकट

3 कुमारेन्द्र / 2010/05/20 11:32 am

किसी भी क्षेत्र के विकास में उस क्षेत्र संस्कृति की अहम् भूमिका रहती है। संस्कृति, भाषा, बोली आदि के साथ-साथ उस क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासत, लोकसाहित्य, लोककथाओं, लोकगाथाओं, लोकविश्वासों, लोकरंजन

कोई भी तकनीक मनुष्य का विकल्प नहीं  : डा० दुर्गा प्र० अग्रवाल

कोई भी तकनीक मनुष्य का विकल्प नहीं : डा० दुर्गा प्र० अग्रवाल

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/04/17 9:25 am

रपट : पल्लव कुमार ,उदयपुर मनुष्य ताड़ पत्र से छापाखाने तक आया है। सब कुछ वैसा ही नहीं है जैसा हजार या पांच हजार बरस पहले था फिर मुद्रित शब्द

कौटिल्य के बारे में मणिशंकर प्रसाद के विचार

कौटिल्य के बारे में मणिशंकर प्रसाद के विचार

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/24 12:00 am

भारतीय राजनीतिक चिंतन के इतिहास में कौटिल्य एक ऐसा नाम है जिसके व्यक्तित्व और कृतित्व दोनों में विलक्षणता है। कौटिल्य का ‘अर्थशास्त्र’ कई संदर्भों में दुरूह होते हुए भी अर्थ-व्यवस्था,

झूठ नहीं बोलता इतिहास:जगदीश चंद्रिकेश

झूठ नहीं बोलता इतिहास:जगदीश चंद्रिकेश

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/03/23 12:23 am

इतिहास हमेशा विजेताओं का हुआ करता है या शासकों का, पराजित या शासितों का नहीं, क्योंकि इतिहास तो वही लिखवा सकते हैं, और लिखवाते हैं, जो सत्ता में होते हैं।

क्यों ना इतिहास दुबारा लिखा जाये ?

क्यों ना इतिहास दुबारा लिखा जाये ?

1 जयराम "विप्लव" / 2009/08/19 3:45 pm

जिन्ना लेकर उत्पन्न ताजा विवादों ने एक बार फ़िर इतिहास को कटघरे में ला खड़ा किया है । बात आडवानी की हो या जसवंत की मसले के पीछे प्रमाणिक इतिहास की जानकारी का अभाव है । अब तक के ज्ञात इतिहास की प्रमाणिकता को चुनौती देने का साहस हम भारतीयों में न के बराबर है ।दरअसल, हमारा इतिहास हमारा है हीं नही

हिन्द स्वराज और आज की चुनौतियां

2 जनोक्ति डेस्क / 2009/08/08 9:57 am

वर्ष 2009 हिन्द स्वराज का शताब्दी वर्ष है। महात्मा गांधी की कृतियों में हिन्द स्वराज का महत्व सबसे अधिक माना जा सकता है। हिन्द स्वराज में गांधी जी ने एक प्रकार से अपने सपने के स्वाधीन भारत का चित्र खींचा था। हालांकि उन्होंने यह पुस्तिका 1909 में लिखी थी परंतु इसमें लिखी बातों पर वे अंत तक डटे रहे थे। यही कारण था कि जब उन्हें प्रतीत हुआ कि देश स्वाधीन होने वाला है, तो 1945 में उन्होंने पंडित नेहरू को एक पत्र लिख कर हिन्द स्वराज पढ़ने की सलाह दी ताकि देश के विकास उसी अनुसार किया जा सके