Post Tagged with: "hindi"

भारत माता ग्रामवासिनी

भारत माता ग्रामवासिनी

0 शारदा मोंगा / 2010/09/15 11:14 am

भारत माता ग्रामवासिनी, भारत माता ग्रामवासिनी, शस्य श्यामला सुखद सुहासिनी, हिम-किरीट सुशोभित भाल है, गंगा जमुना कंठ धार है, सागर पवित्र पांव चूमता, पा सुगंध समीर झूमता, शीतल मलयज मधुर

हिंदी की उपेक्षा का दोषी कौन ?

हिंदी की उपेक्षा का दोषी कौन ?

2 राजेश त्रिपाठी / 2010/09/14 9:26 pm

हिंदी की अपने ही घर में दुर्दशा पर चिंता जाहिर करने के पहले एक घटना का जिक्र करना जरूरी समझता हूं जो हिंदी दिवस नामक रस्मअदायगी या प्रहसन को तार-तार

हिन्दी का महत्व व विड़म्बनायें

हिन्दी का महत्व व विड़म्बनायें

13 अरविन्द विद्रोही / 2010/09/14 8:46 pm

सिर्फ मातम-पुर्सी से काम नहीं चलने वाला है।हिन्दी भारत वर्ष में राज-काज की भाषा है,हमारे सम्मान की प्रतीक है,तो सभी प्रांतीय व स्थानीय भाषायें हिन्दी की बहनें।भारत-वर्ष में बोली जाने

राष्ट्रभाषा हिंदी को बांटने का कुचक्र

राष्ट्रभाषा हिंदी को बांटने का कुचक्र

1 विजय कुमार / 2010/09/14 8:34 pm

सितम्बर हिन्दी के वार्षिक श्राद्ध का महीना है। हर संस्था और संस्थान इस महीने में हिन्दी दिवस, सप्ताह या पखवाड़ा मनाते हैं और इसके लिए मिले बजट को खा पी

मेरी प्यारी हिन्दी,मुझे माफ करना

मेरी प्यारी हिन्दी,मुझे माफ करना

0 नवीन देवांगन / 2010/09/13 8:40 pm

“चल रे मटकी टम्मक टू ….” को  “जॉनी जॉनी यस पापा…..” के सामने न जाने कितनी दफा शर्मिंदा होना पड़ा , अ-अनार के सामने ए-ऐपल्ल का, हमेशा से ही भारी

राष्ट्रभाषा की दिनो दिन दुर्गती

राष्ट्रभाषा की दिनो दिन दुर्गती

2 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/06/01 8:46 pm

संस्कृत मां, हिन्दी गृहिणी और अंग्रेजी नौकरानी है, ऐसा कथन डॉ. फादर कामिल बुल्के का है जो संस्कृत और हिन्दी की श्रेष्ठता को बताने के लिए सम्पूर्ण है। मगर आज

कोई भी तकनीक मनुष्य का विकल्प नहीं  : डा० दुर्गा प्र० अग्रवाल

कोई भी तकनीक मनुष्य का विकल्प नहीं : डा० दुर्गा प्र० अग्रवाल

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/04/17 9:25 am

रपट : पल्लव कुमार ,उदयपुर मनुष्य ताड़ पत्र से छापाखाने तक आया है। सब कुछ वैसा ही नहीं है जैसा हजार या पांच हजार बरस पहले था फिर मुद्रित शब्द