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राजभाषा हिंदी से सम्बंधित संघीय नीतियाँ

राजभाषा हिंदी से सम्बंधित संघीय नीतियाँ

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/10/19 2:58 am

संघ की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है । संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतराष्ट्रीय रूप है {संविधान का अनुच्छेद343

हिंदी विमर्श ,  विषय : भाषा प्रदूषण

हिंदी विमर्श , विषय : भाषा प्रदूषण

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/10/15 12:12 am

आयोजक : आनंद जी शर्मा हिन्दी भाषा-प्रदूषण के विरुद्ध प्रहार कीजिये ! क्या हिंदी बदल रही है? विजय कुमार मल्होत्रा : पिछले डेढ़ दशक में हिंदी का स्वरूप काफ़ी बदल गया

खंजर बनाता हूं,

खंजर बनाता हूं,

1 शारदा मोंगा / 2010/09/23 4:16 pm

खंजर बनाता हूं, जानते हुए कि- क़त्ल के काम आता है पर क्या करूँ? पेशा जो है मेरा, पेट का सवाल है ! अपने ही- कत्ल हो रहे हैं! और

दिनकर जी के जन्म दिवस पर एक कवितान्जली

दिनकर जी के जन्म दिवस पर एक कवितान्जली

1 प्रकाश पंकज / 2010/09/23 1:53 pm

राष्ट्रकवि श्री रामधारी सिंह ‘दिनकर’ जी के जन्म दिवस के शुभ अवसर पर मेरी और से एक कवितान्जली : “ईश्वर के काव्यदूत “ ओ ईश्वर के काव्यदूत तुम फिर से

है अपना हिंदुस्तान कहाँ.

है अपना हिंदुस्तान कहाँ.

3 शारदा मोंगा / 2010/09/22 4:16 pm

है अपना हिंदुस्तान कहाँ. वह बसा हमारे गावों में, पगडंडी कच्ची राहों में. फूटी टूटी सी सड़कों में, बैलगाड़ी को हांक रहे, दूर दराज़ की राहों में, खपरैलों की कतारों

कौन तुम!

कौन तुम!

2 शारदा मोंगा / 2010/09/21 4:22 pm

कौन तुम!! मेरे संगीत कुञ्ज में, मधुर तार सी, निशब्द- झंकार बन कर, अमृत रस छलकाती हो, कौन तुम! मेरे हृदय पटल पर, सुंदर चित्र सी उतर , स्वर्गिक आनंद

मौत जिसको कह रहे हो,जिंदगी का नाम है

मौत जिसको कह रहे हो,जिंदगी का नाम है

0 शारदा मोंगा / 2010/09/21 9:03 am

मौत जिसको कह रहे हो, जिंदगी का नाम है. मौत से डरना डराना, कायरों का नाम है. मुर्दा दिलों की क्या कहें, जो रोज़ ही मरते रहें. जिंदा दिलों का

मेरे अपने

मेरे अपने

2 डॉ. शालिनीअगम अग्रवाल / 2010/09/20 1:32 pm

मेरे अपने, ‘कुछ गुमसुम से, कुछ चुप-चुप से, निर्निमेष शून्य में तकते है! अपने इसी व्यक्तित्व से क्षण भर में ही मोह लेते है&#

सितार बजाया करती हूँ,

सितार बजाया करती हूँ,

3 शारदा मोंगा / 2010/09/20 1:21 pm

सितार बजाया करती हूँ, मेरा जीवन, प्रतिपल, हरदम, संगीतमय मेरा हरक्षण, सुंदर मधुर स्वरों से मैं , आभूषित हो, तार गुंजाया करती हूँ, सितार बजाया करती हूँ, मधुर स्वरों के

रात भर का वह गहरा अँधेरा,

रात भर का वह गहरा अँधेरा,

0 शारदा मोंगा / 2010/09/20 1:20 pm

रात भर का वह गहरा अँधेरा, रात भर का वह गहरा अँधेरा, गहन अवसाद था बहुतेरा, रजनी चुपचाप अश्रु बहाती, तुहिन कणों से धरा नहलाती, अरुणिमा पूरब में छटी जब,