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आलम ए गुम की चीज़ कितनी अज़ीज़

आलम ए गुम की चीज़ कितनी अज़ीज़

0 जुनैद मुनकिर / 2010/06/02 8:54 am

आलम ए गुम की चीज़ होती है, जान कितनी अज़ीज़ होती है. अच्छा शौहर गुलाम होता है, अच्छी बीवी कनीज़ होती है. बात बिगडे तो जाए रुसवाई, बात बन कर

गम का है मौसम….

गम का है मौसम….

0 नरेन्द्र निर्मल / 2009/12/05 4:03 pm

गम का है मौसम, मौसम जुदाई का, तुझको कसम है जाना, तेरी खुदाई का, गम का है मौसम………………. तुझको मैं भूलूं, भूल न पाऊ मैं, विरहा की अगनी में,  जलता