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हिंदी सिनेमा का सफ़र -2

हिंदी सिनेमा का सफ़र -2

2 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/10 8:51 am

हिंदी सिनेमा के इतिहास में अब तक आपने पढ़ा (पिछली पोस्ट पढ़ें ) फिल्मों ने जब बोलना शुरू किया तो दर्शकों को बड़ा अचरज हुआ। चलती-फिरती तस्वीरें बोलने भी लगीं,

हिंदी सिनेमा का सफ़र- 1

हिंदी सिनेमा का सफ़र- 1

2 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/05 8:20 am

आज भारत विश्व में सर्वाधिक फिल्में निर्मित करनेवाला देश है लेकिन देश में सिनेमा की शुरुआत आसान नहीं रही। आज हमारा सिनेमा जिस मुकाम पर है, उसे वहां तक पहुंचने

मीडियामोरचा अब वेब पर

मीडियामोरचा अब वेब पर

5 जनोक्ति डेस्क / 2010/07/08 6:57 pm

पटना से संचालित हो रहे मीडिया के सरोकार पर आधारित ई-पत्रिका मीडियामोरचा अब अपने नए कलेवर के साथ पाठकों और प्रशंषकों के बीच वेब पर अवतरित हो गया है। सरोकारों

हेट नहीं, आई लव, लव स्टोरीज !

हेट नहीं, आई लव, लव स्टोरीज !

0 पुष्पेन्द्र आल्बे / 2010/07/01 7:15 pm

रोमांटिक फिल्मों के मामलें में बॉलीवुड का रिकॉर्ड रोजर फेडरर के खेल के माफिक ही उजला रहा है. चाहे वह साठ के दशक की राजकूपर-नरगिस अभिनीत “आवारा” हो या फिर

हर घर बागबान

हर घर बागबान

2 अजय केशरी / 2010/06/14 9:12 pm

मेरा उनसे कोई खून का रिश्ता नहीं था फिर भी मै उनसे बराबर मिलता था घंटो मै उनसे बातें करता था उनको भी अच्छा लगता था मझसे बातें करना। मेरा

केवल सेरलीन को ही ढकोगे

केवल सेरलीन को ही ढकोगे

10 नरेन्द्र निर्मल / 2010/06/02 8:27 pm

हालिया कुछ दिनों पहले एक अजीबो गरीब एफएम का प्रशारण सुना, सुनकर हास्यास्पद भी लगा। क्योंकि जिनके मुंह से सुना वह काफी वल्गर उच्चारण कर रहे थे। हम बात कर

पंडिताईन बुढिया पगला गई है

पंडिताईन बुढिया पगला गई है

1 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/05/10 12:21 pm

सुभाषचंद्र बोस ने एक बार कहा था कि जीवन में कोई चीज़ इतनी हानिकारक और ख़तरनाक नहीं जितना डांवांडोल स्थिति में रहना । आज विभिन्न चैनलों पर जो धारावाहिक प्रसारित

सपनों का सिनेमा

सपनों का सिनेमा

0 उमेश पंत / 2010/05/08 8:50 pm

अक्सर इंसान सपने देखता है , कल्पनाओं में उनको जीता है और जब तन्द्रा टूटती हैं तो सोचने लगता है कि जो हमने देखा उसका अर्थ आंखिर था क्या ?

अच्छी कहानी , फ्लॉप फ़िल्में

अच्छी कहानी , फ्लॉप फ़िल्में

1 पुष्पेन्द्र आल्बे / 2010/04/22 6:18 pm

पिछले सप्ताह बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुई दो फ़िल्में ” पाठशाला” और “फूंक-२” हिंदी सिनेमा में एक नए चलन की ओर इशारा करती है. यह  इन दिनों रिलीज हो रही

”कर्मयुद्ध” की शूटिंग

”कर्मयुद्ध” की शूटिंग

0 शशि सिन्घल / 2010/04/10 11:23 pm

इन दिनों मुंबई के फ्यूचर स्टूडियो में धारावाहिक ”कर्मयुद्ध” की शूटिंग लगातार चल रही है. ऐसे ही एक शूट हो रहा था अभिनेत्री वैष्णवी जो की इस धारावाहिक में पुलिस