Post Tagged with: "film-tv"

हिंदी सिनेमा का सफ़र -4

हिंदी सिनेमा का सफ़र -4

1 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/16 9:19 am

हिंदी सिनेमा के इतिहास में अब तक आपने पढ़ा (पिछली पोस्ट पढ़ें ) सामाजिक-पारिवारिक समस्याओं पर बनीं फिल्में 1930-1940 तक के बड़े बैनर थे न्यू थिएटर्स, प्रभात, बांबे टॉकीज, मिनर्वा

हिंदी सिनेमा का सफ़र -3

हिंदी सिनेमा का सफ़र -3

1 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/13 9:00 am

हिंदी सिनेमा के इतिहास में अब तक आपने पढ़ा (पिछली पोस्ट पढ़ें ) पुराने जमाने में भी हिट थीं जोड़ियां पुराने जमाने में फिल्मों के प्रमुख कलाकारों के चयन के

हिंदी सिनेमा का सफ़र -2

हिंदी सिनेमा का सफ़र -2

2 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/10 8:51 am

हिंदी सिनेमा के इतिहास में अब तक आपने पढ़ा (पिछली पोस्ट पढ़ें ) फिल्मों ने जब बोलना शुरू किया तो दर्शकों को बड़ा अचरज हुआ। चलती-फिरती तस्वीरें बोलने भी लगीं,

हिंदी सिनेमा का सफ़र- 1

हिंदी सिनेमा का सफ़र- 1

2 राजेश त्रिपाठी / 2010/10/05 8:20 am

आज भारत विश्व में सर्वाधिक फिल्में निर्मित करनेवाला देश है लेकिन देश में सिनेमा की शुरुआत आसान नहीं रही। आज हमारा सिनेमा जिस मुकाम पर है, उसे वहां तक पहुंचने

‘ द होली वाईव्स ‘ ,धर्म के नाम पर

‘ द होली वाईव्स ‘ ,धर्म के नाम पर

0 उमेश पंत / 2010/09/30 8:02 am

हाल ही में रितेश शर्मा की एक डाक्यूमेंट्री फिल्म दिल्ली में प्रदर्शित की गई जिसमें देवदासी प्रथा जैसी ऐसी कुरीति पर सवाल उठाये गये जिसपर मेनस्ट्रीम मीडिया में आजकल मुश्किल

सूखती स्याही और कुन्द होती खबरों की धार

सूखती स्याही और कुन्द होती खबरों की धार

0 के .पी. त्रिपाठी / 2010/09/10 10:46 pm

“मत कहो, आकाश में कुहरा घना है, यह किसी की व्यक्तिगत आलोचना है ” दुष्यंत कुमार की यह पंक्ति वर्तमान मीडिया परिवेश में अक्षरतः सटीक बैठती हैं। कलम की स्याही सूख रही

सिर्फ हस्ताक्षर करना जानते थे महबूब खान

सिर्फ हस्ताक्षर करना जानते थे महबूब खान

0 राजेश त्रिपाठी / 2010/09/01 8:09 am

छोटे कद और बुलंद हौसले वाले महबूब खान का जन्म गुजरात में बड़ौदा जिले के अंतर्गत एक छोटे से गांव सरार काशीपुर में 7 सितंबर 1906 को हुआ था। लिखने-पढ़ने

इलैक्ट्रॉनिक मीडिया नया विलन

इलैक्ट्रॉनिक मीडिया नया विलन

0 अखिलेश शर्मा / 2010/08/24 9:58 am

80 के दशक की यादें ताज़ा हो गईं. तब गांव में एक बड़े हॉल में एक टीवी पर वीडियो फिल्में देखने जाता था. चाहे शक्ति कपूर हो, अमरीश पुरी या फिर

मनोरंजक  खबरिया चैनल

मनोरंजक खबरिया चैनल

0 संजय कुमार / 2010/08/23 9:51 pm

तेजी से दर्शकों के मानसपटल पर छा जाने वाले संचार क्रांति के सशक्त माध्यम, खबरिया चैनल मनोरंजन चैनलों में तब्दील होते जा रहे हैं। राजनीतिक खबरों को पीछे धकेलते हुए

अभिव्यक्ति की आज़ादी और मर्यादा

अभिव्यक्ति की आज़ादी और मर्यादा

0 विजय कुमार / 2010/08/14 11:30 am

किसी भी लोकतान्त्रिक देश में अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता होना ही चाहिए। फिर भी इस विषय पर बार-बार विवाद खड़े होते हैं। प्रायः लोग इसे राजनीति में घसीटकर इस या उस