बिहार में चुनावी समर का शंखनाद
0बिहार मे चुनावी शंखनाद बज चुका है और अब हमारे नेतागण को एक बार फिर से जनता की अदालत मे पेश होना है । उसी जनता की अदालत मे जो
बिहार का चुनाव क्या हो रहा है सभी छोटे बड़े राजनेताओं कि जुबान पर बस विकाश का ही मुद्दा छाया हुआ है। अब हर नेता अपनी जनसभा में केवल विकास
21 अक्तूबर गुरुवार को बिहार विधानसभा चुनाव के पहले चरण में सभी 47 विधानसभा क्षेत्रों में मतदान का काम संपन्न हो गया । पहले चरण में 54.31 प्रतिशत मतदाताओं ने
बिहार चुनाव में देश के सभी दिग्गज कूद पड़े हैं | मनमोहन सिंह से लेकर राहुल गाँधी तक ने अपने मुख-टैंक नीतीश कुमार की ओर खोल दिए हैं | एक
बिहार मे चुनावी शंखनाद बज चुका है और अब हमारे नेतागण को एक बार फिर से जनता की अदालत मे पेश होना है । उसी जनता की अदालत मे जो
राजेश त्रिपाठी फिल्म ‘पीपली लाइव’ का ‘नत्था’ भले ही न मरता हो और उसकी मौत का इंतजार करते मीडिया को भले ही निराशा हुई हो लेकिन हकीकत कुछ और ही
एएचआरसी यानी एशियन ह्यूमन राइटस् कमीशन के अनुसार मध्यप्रदेश में 28 बच्चों ने कुपोषण के चलते दम तोड़ दिया है. पीडित बच्चों के परिवार सरकारी योजनाओं के तहत भोजन और
लुकस टेटॆ अब हमारे बीच नही हैं, लेकिन लुकस टेटॆ अब हर उस भारतीय के दिल मे है जिसने भारत को प्यार किया है । नक्सलियों की कायरता एवं बर्बरतापूर्ण
अगर भ्रष्टाचार, आतंकवाद,नक्सलवाद और अर्थव्यवस्था में मंदी को समाप्त करना है, महंगाई को नियंत्रण में लाना है तो बड़े नोट बंद क्यों नहीं करते ? आज जितने भी “भ्रष्ट”पकड़े जा
श्रम और रोजगार मन्त्रालय भारत की एक बड़ी आबादी को ध्यान में रखकर अपनी नीतियां बनाता है। देश का असंगठित क्षेत्र मतलब 39 करोड़ से ज्यादा लोग इस मन्त्रालय के
एक नत्था की कहानी ने इतना बबाल मचाया हुआ है लेकिन ये मत भूलिए इस देश में एक-दो नहीं करोड़ों नत्थाओं की जमात है | क्या हुआ जो पीपली लाइव
जनाब मुख्यमंत्री महोदय, आप के वादों पर पिछले चुनाव में मेरे परिवार से आप को 9 वोट दिए गये,इस उम्मीद पर कि मेरा नहीं तो मेरे गाँव का विकास होगा |
बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और जनता दल (युनाइटेड) के बीच विकास कार्यो का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई
आज से लगभग 4 साल पहले देश भर में रोजगार यात्राऐं निकाली जा रही थी। गीत गाया जा रहा था। हमारे लिए काम नही, हमें काम चाहिए। इसी समस्या को