एकछत्र शासन का घोषणापत्र-10
010. कृषि 10.1 जहाँ तक सम्भव होगा- बड़े पैमाने पर कृषि योग्य जमीन का किसी भी और काम के लिये इस्तेमाल नहीं होने दिया जायेगा. (रिहायशी या औद्योगिक नगर बसाने
आज से लगभग 4 साल पहले देश भर में रोजगार यात्राऐं निकाली जा रही थी। गीत गाया जा रहा था। हमारे लिए काम नही, हमें काम चाहिए। इसी समस्या को
उपसंहार जब किसी देश का समाज आर्थिक और भौतिक ही नहीं नैतिक और आध्यात्मिक दृष्टि से भी समृद्ध हो, जब किसी देश के युवा मस्तिष्क से प्रतिभाशाली, शरीर से बलिष्ठ
63 साल बाद भी तिरंगा शान से लाल किले कि प्राचीर पर लहर रहा है.तिरंगे के लहरने का कारण वादियों में चलने वाली हवा है न कि हमारा जोश.वो निरंतर
10. कृषि 10.1 जहाँ तक सम्भव होगा- बड़े पैमाने पर कृषि योग्य जमीन का किसी भी और काम के लिये इस्तेमाल नहीं होने दिया जायेगा. (रिहायशी या औद्योगिक नगर बसाने
9. आर्थिक विभाजन 9.1 देश के नागरिकों को तीन आयवर्गों में बाँटा जायेगा:- क) निम्न आयवर्ग- साठ हजार रूपये से कम वार्षिक आय/छ्ह एकड़ से कम कृषि भूमि (मैदानी भाग
8. कराधान 8.1 साठ हजार से दो लाख रूपये तक की वार्षिक आय पर क्रमशः 1 से 15 प्रतिशत का व्यक्तिगत आयकर लिया जायेगा (जैसे- साठ हजार पर 1 प्रतिशत,
7. काला धन 7.1 चरणबद्ध तरीके से देश के प्रत्येक नागरिक (राष्ट्रपति महोदय से लेकर किसी आश्रम के महन्त तक) से उनकी आय, आय के स्रोत तथा उनकी व्यक्तिगत चल-अचल
6. नया सरकारी वेतनमान: एक खाका 6.1 नये सरकारी वेतनमान (5.1) का एक खाका यहाँ (नीचे) प्रस्तुत है- इस वेतनमान में 3,000 से 12,000 तक की श्रेणियों पर प्रतिवर्ष 50
5. सरकारी खर्च 5.1 एक नया सरकारी वेतनमान तैयार किया जायेगा, जिसमें न्यूनतम व अधिकतम वेतन-भत्तों-सुविधाओं के बीच पाँच गुना से ज्यादा का अन्तर
4. सबके लिये रोजगार 4.1 इस घोषणापत्र में आगे कई ऐसी योजनाओं, परियोजनाओं तथा निर्माण कार्यों (जैसे, प्रत्येक सौ की आबादी पर एक-एक शिक्षाकर्मी, स्वास्थ्यकर्मी
3. भ्रष्टाचार निवारण: निचले स्तर पर 3.1 थाना स्तर पर 5-5 सतर्कता मजिस्ट्रेटों की नियुक्ति की जायेगी, जो अगर चाहें, तो अपनी सहायता के लिये (क) स्थानीय गणमान्य नागरिकों को
दिलीप गुप्ता मध्यप्रदेश का मन्दसौर जिला मादक पदार्थो की तस्करी और नशे के लिए विख्यात है। बडे़ पैमाने पर जिले में अफीम की खेती होती है और तस्करी भी एक बड़ा
देश में हर ओर तथा हर क्षेत्र में भ्रष्टाचार ही भ्रष्टाचार बोलबाला है। शोर मचाने वाले और भ्रष्टचार में फंसने वाले भी बखूबी जानते हैं जिसकी पूंछ उठाओ वही मादा