जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार |
1जनता से चुनावी वादा : – महंगाई कम करेंगे |सत्ता में आने पर : – पेट्रोल -डीजल-गैस की कीमत बढ़ाई| जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है इस राष्ट्रीय अपराध
भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा का भूतपूर्व अनशन सफल माना गया था। देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अनुठी सी लहर दौड़ उठी थी। वहीं फिर बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और
स्वतंत्रता के बाद हमारे देश ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिकों ने अपने कीर्तिमान हर क्षेत्र में रचे हैं। हमारे कीर्तिमान और हमारी उपलब्धियां राजनीति,
मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में 49वें ओवर की दूसरी गेंद पर महेंद्र सिंह धोनी के छक्का मारते ही देश भर में ‘इंडिया-इंडिया’ के नारे गूंजने लगे। चक दे इंडिया। कुछ
जनता से चुनावी वादा : – महंगाई कम करेंगे |सत्ता में आने पर : – पेट्रोल -डीजल-गैस की कीमत बढ़ाई| जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है इस राष्ट्रीय अपराध
भ्रष्टाचार के खिलाफ अण्णा का भूतपूर्व अनशन सफल माना गया था। देश में भ्रष्टाचार के खिलाफ एक अनुठी सी लहर दौड़ उठी थी। वहीं फिर बाबा रामदेव ने भ्रष्टाचार और
स्वतंत्रता के बाद हमारे देश ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिकों ने अपने कीर्तिमान हर क्षेत्र में रचे हैं। हमारे कीर्तिमान और हमारी उपलब्धियां राजनीति,
मुम्बई के वानखेड़े स्टेडियम में 49वें ओवर की दूसरी गेंद पर महेंद्र सिंह धोनी के छक्का मारते ही देश भर में ‘इंडिया-इंडिया’ के नारे गूंजने लगे। चक दे इंडिया। कुछ
खबर है कि CWG और 2G घोटालों से घिरी मनमोहन सरकार अब बजट सत्र में भ्रष्टाचार निरोधक कानून लाने की तैयारी कर रही है। केन्द्रीय कानून मंत्री वीरप्पा मोइली के
आज हमारे लिये सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है कि देश या समाज के लिये न सही, कम से कम अपने आपके और अपनी आने वाली पीढियों के सुखद एवं सुरक्षित
हकीम लुकमान ने दुकान खोली, तो आज हर दिन की अपेक्षा अधिक रोगी दिखाई दिये। इतना ही नहीं, कई अति विशिष्ट जन (वी.आई.पी) भी उनकी प्रतीक्षा में था। हकीम साहब
बिहार विधानसभा चुनाव की कुल 243 सीटों पर छह चरणों में मतदान संपन्न हुआ | इस चुनाव में सभी चरणों को मिला कर देखा जाए तो 52 फीसदी मतदाताओं ने
बिहार की राजनीति और चुनाव की जांच-पड़ताल कर रहे हैं संजय शर्मा बदलाव की इच्छा जब जब बलवती हुई है, बिहार के चुनाव का आधार जातिगत नहीं रहा . 1977
सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त.