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नक्सलियों के आय के प्रमुख स्रोत

नक्सलियों के आय के प्रमुख स्रोत

1 त्रिपुरारी कुमार / 2010/11/10 6:46 pm

निशा दास की रिपोर्ट रांची से झारखंड में नक्सल समस्या एक जटिल समस्या बनी हुई है। लंबे समय से इस जंजाल से निकलने का यहां के राजनेताओं के साथ -साथ नौकरशाहों

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

1 शिरीष खरे / 2010/11/04 5:56 pm

सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त.

बोलने से पहले सोचा नहीं था (राहुल गांधी)

बोलने से पहले सोचा नहीं था (राहुल गांधी)

2 पंकज मिश्रा / 2010/10/10 4:49 am

राहुल गांधी। इस समय कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव हैं और युवा कांग्रेस की देखरेख की जिम्मेदारी निभा रहे हैं। उन्हें भविष्य का प्रधानमंत्री कहा जाता है, हालांकि उन्होंने कभी नहीं

‘तोता-रटंत’ राहुल के निरर्थक बोल

‘तोता-रटंत’ राहुल के निरर्थक बोल

3 पवन कुमार अरविंद / 2010/10/08 9:52 am

कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी ने देशभक्त संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तुलना प्रतिबंधित और कुख्यात आतंकी संगठन सिमी से करके अपने नासमझी और अपरिपक्वता का ठोस परिचय दिया

बयानबाजी के बादशाह हैं सोनिया कांग्रेस के महासचिव राहुल

बयानबाजी के बादशाह हैं सोनिया कांग्रेस के महासचिव राहुल

2 जयराम "विप्लव" / 2010/10/07 5:41 pm

मंगलवार को मध्यप्रदेश के टीकमगढ़ में कांग्रेस महासचिव और गाँधी परिवार के युवराज राहुल गाँधी ने कहा कि उनकी नजर में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) और प्रतिबंधित स्टूडेंट इस्लामिक मूवमेंट

मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन

मार्क्सवादियों का दोहरा शीर्षासन

0 डॉ. वेदप्रताप वैदिक / 2010/10/01 3:32 pm

यदि कार्ल मार्क्स अपनी कब्र से उठकर कभी भारत आ पहुंचें तो वे हक्के-बक्के रह जाएंगे| वे अपने भारतीय चेलों को चीनी चेलों से भी आगे-आगे दौड़ता हुआ पाएंगें| बंगाल

राहुल बाबा किस मुंह से भारतीयता का पाठ पढ़ा रहे हैं ?

राहुल बाबा किस मुंह से भारतीयता का पाठ पढ़ा रहे हैं ?

1 जयराम "विप्लव" / 2010/09/08 8:46 pm

आजकल लोकतान्त्रिक राजवंश के युवराज राहुल गांधी युवाओं को खुद से जोड़ने का अभियान जोर-शोर से सरकारी पैसे पर चला रहे हैं । इसी अभियान के तहत राहुल कभी बिहार

देश की शिक्षा स्थिति : एक सच ?

देश की शिक्षा स्थिति : एक सच ?

0 रोहित कश्यप / 2010/09/08 5:33 pm

आज एक दफा फिर से कुछ लिखने की कोशिश करने बैठा हूँ | हाथ कंप्यूटर के की बोर्ड पर चलने शुरू हो गएँ हैं तो लगता है थोड़ा बहुत लिख

मनरेगा में सिर्फ पैसा बहाने से कुछ नही होगा

मनरेगा में सिर्फ पैसा बहाने से कुछ नही होगा

1 रमेश भट्ट / 2010/08/21 5:35 pm

आज से लगभग 4 साल पहले देश भर में रोजगार यात्राऐं निकाली जा रही थी। गीत गाया जा रहा था। हमारे लिए काम नही, हमें काम चाहिए। इसी समस्या को

स्वतंत्रता बेमानी है !

स्वतंत्रता बेमानी है !

1 अमित कुमार मीत / 2010/08/21 2:02 pm

63 साल बाद भी तिरंगा शान से लाल किले कि प्राचीर पर लहर रहा है.तिरंगे के लहरने का कारण वादियों में चलने वाली हवा है न कि हमारा जोश.वो निरंतर