कांग्रेस की नाम-कब्जाऊ संस्कृति
2हाल ही में भारत के लोगो ने फ्रेंडशिप डे मनाया. भारतीय परिपेक्ष्य में सोचे तो कृष्ण-सुदामा के मिलाना के दिन से बेहतर कौन सा दिन दोस्ती के नाम हो सकता
बिहार विधानसभा चुनाव में चुनाव प्रचार को लेकर भाजपा ने अपने 40 प्रमुख प्रचारकों की सूची चुनाव आयोग के समक्ष पेश कर दिया है । राज्य में विधानसभा चुनाव 21
किसी फिल्म में सुना था , “ राजनीति में कोई किसी का दोस्त नहीं होता और ना ही दुश्मन ” ! सच ही तो है कौन , कब, किससे हाथ
बिहार विधानसभा चुनाव की तारीखें तीन बड़े हिन्दू पर्व के बीच पड़ रही है | इस बात से यह अनुमान लगाया जा रहा है कि आगामी विधानसभा चुनाव में मत
हाल ही में भारत के लोगो ने फ्रेंडशिप डे मनाया. भारतीय परिपेक्ष्य में सोचे तो कृष्ण-सुदामा के मिलाना के दिन से बेहतर कौन सा दिन दोस्ती के नाम हो सकता
बिहार में चुनावी बिसात बिछ गयी है , हर दल चुनाव के लिए पूरी तरह से तैयार दिख रहा है | बात भी वाजिब है जब चुनाव होना ही है
बीते लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में कांग्रेस ने लोकसभा की 22 सीटें जीतकर सबकों चौंका दिया। शायद खुद कांग्रेस के लोगों के लिए यह जीत किसी अचम्भे से कम नही
लेखक : भूतनाथ ” विकिलिक्स ” द्वारा अमेरिकी कार्यवाइयों के भंडाफ़ोड किये जाने और अमेरिकी सरकार द्वारा इसे संघीय व्यवस्था का उल्लंघन बताये जाने पर एक प्रश्न अपने-आप ही उठ खडा
दिल्ली में होने वाले गुलाममंडल खेलों के उद्घाटन, समापन आदि के लिए बने जवाहर लाल नेहरू स्टेडियम का नाम बिल्कुल ठीक रखा गया है, क्योंकि अंग्रेजों के जाने के बाद
ग्रामीण भारत ही असली भारत है। भारत की 80 प्रतिशत आबादी ग्रामीण अंचलों में निवास करती है तथा शेष 20 प्रतिशत आबादी भी अप्रत्यक्ष रूप से ग्राम्य जीवन से जुड़ी
मॉनसून सत्र के तीसरे दिन भी संसद में हंगामा जारी है | सारा विपक्ष एक स्वर में महंगाई के मुद्दे पर चर्चा और मतदान की मांग पर अड़ा हुआ है
‘अयोध्या में मंदिर वहीं, मस्जिद नहीं, बाबरी ढांचा कहीं नहीं।’ ठीक है, ठीक है, इस देश के बहुसंख्यक लोग भी यही चाहते हैं कि राम-मंदिर बने लेकिन साहब किस-किस को
लेखक : सुनील बघेल गुजरात के अहमदाबाद से ताल्लुक रखने वाले अमित शाह कोई मामूली राजनीतिज्ञ नहीं हैं. छियालीस वर्षीय शाह पिछले कई सालों से भाजपा के दिग्गज नेता लालकृष्ण
बिहार में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इसे देख कर कुछ दिनों से बिहार में हर दिन राजनीति में कुछ-न-कुछ हो रहा है। वोट की राजनीति करने