असंठित श्रमिकों की वर्तमान स्थिति
0साभार : आईएलओ प्रकाशित पुस्तक “मुक्ति की रह” अनौपचारिक अर्थव्यवस्था मोटे तौर पर इस प्रकार परिभाषित की जा सकती है- ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें अनिगमित उद्यम, अनियत या दिहाड़ी मजदूर है। भारत सहित
भारत को गांवों का देश कहा जाता है. अर्थात भारत को पहचान देने वाली विशेषताओं एवं जीवनशक्ति प्रदान करने वाले कारकों की नींव ग्रामीण व्यवस्था पर टिकी होती है. भारत
1996-97 से लेकर 2008-09 तक के रबड् की आँकडे जो भारतीय रबड् बोर्ड द्वारा प्रसारित की गई हैं . उनके विश्लेषण करने पर हेराफेरी के कई सबूत मिलते हैं . एक हेक्टर रबड् की खेती से एक लाख रुपये तक का लाभ मिलता हैं। परन्तू रबड् बोर्ड की तरफ से हेरा फेरी के आँकडे प्रसारित करके दाम ऊपर नीचे होने में मदद किया जा रहा है . यह किसानों के खिलाफ है
साभार : आईएलओ प्रकाशित पुस्तक “मुक्ति की रह” अनौपचारिक अर्थव्यवस्था मोटे तौर पर इस प्रकार परिभाषित की जा सकती है- ऐसी अर्थव्यवस्था जिसमें अनिगमित उद्यम, अनियत या दिहाड़ी मजदूर है। भारत सहित
भारत को गांवों का देश कहा जाता है. अर्थात भारत को पहचान देने वाली विशेषताओं एवं जीवनशक्ति प्रदान करने वाले कारकों की नींव ग्रामीण व्यवस्था पर टिकी होती है. भारत
1996-97 से लेकर 2008-09 तक के रबड् की आँकडे जो भारतीय रबड् बोर्ड द्वारा प्रसारित की गई हैं . उनके विश्लेषण करने पर हेराफेरी के कई सबूत मिलते हैं . एक हेक्टर रबड् की खेती से एक लाख रुपये तक का लाभ मिलता हैं। परन्तू रबड् बोर्ड की तरफ से हेरा फेरी के आँकडे प्रसारित करके दाम ऊपर नीचे होने में मदद किया जा रहा है . यह किसानों के खिलाफ है