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काले धन की कालिख

काले धन की कालिख

0 देवसूफी राम बंसल / 2011/07/06 9:24 am

अपनी जिस आय पर कोई व्यक्ति समुचित आयकर का भुगतान नहीं करता है, उतना धन व्यक्ति का कालाधन कहलाता है. अतः कालाधन वैध तथा अवैध दोनों प्रकार के आय स्रोतों

जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार |

जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार |

1 जयराम "विप्लव" / 2011/06/25 2:32 pm

जनता से चुनावी वादा : – महंगाई कम करेंगे |सत्ता में आने पर : – पेट्रोल -डीजल-गैस की कीमत बढ़ाई| जनता से वादाखिलाफी सबसे बड़ा भ्रष्टाचार है इस राष्ट्रीय अपराध

भ्रष्टाचार में खूब तरक्की कर रहा है भारत  !

भ्रष्टाचार में खूब तरक्की कर रहा है भारत !

1 जितेन्द्र कुमार नामदेव / 2011/05/31 7:58 pm

स्वतंत्रता के बाद हमारे देश ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिकों ने अपने कीर्तिमान हर क्षेत्र में रचे हैं। हमारे कीर्तिमान और हमारी उपलब्धियां राजनीति,

माओवाद की राजधानी ‘मनातू’ जहाँ सांसद भी जाने से डरते हैं |

माओवाद की राजधानी ‘मनातू’ जहाँ सांसद भी जाने से डरते हैं |

2 जयराम "विप्लव" / 2011/02/05 4:52 pm

जनोक्ति की टीम झारखण्ड में माओवाद की जमीन तलाशने के लिए राजधानी रांची से होते हुए पलामू ( डाल्टेनगंज ) पहुंची | पलामू की जमीन पर कदम रखने से पहले

आम लोगों की एकजुटता से झुकेगी सत्ता

आम लोगों की एकजुटता से झुकेगी सत्ता

0 डा ० पुरुषोत्तम मीणा / 2010/11/29 8:07 pm

आज हमारे लिये सबसे जरूरी और महत्वपूर्ण है कि देश या समाज के लिये न सही, कम से कम अपने आपके और अपनी आने वाली पीढियों के सुखद एवं सुरक्षित

नक्सलियों के आय के प्रमुख स्रोत

नक्सलियों के आय के प्रमुख स्रोत

1 त्रिपुरारी कुमार / 2010/11/10 6:46 pm

निशा दास की रिपोर्ट रांची से झारखंड में नक्सल समस्या एक जटिल समस्या बनी हुई है। लंबे समय से इस जंजाल से निकलने का यहां के राजनेताओं के साथ -साथ नौकरशाहों

दीपावली, आर्य चाणक्य और वर्तमान राजनेता

दीपावली, आर्य चाणक्य और वर्तमान राजनेता

2 सुमंत विद्वांस / 2010/11/07 2:35 pm

दीपावली का उल्लेख हो और दीपों की बात न हो, ये संभव नहीं है। अमावस की रात में आने वाली दीपावली को ये छोटे-छोटे दीप ही रोशन करते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं कि जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अँधेरे को दूर कर देता है, उसी तरह हमारा एक छोटा प्रयास भी एक दिन कोई बड़ा परिवर्तन ला सकता है। बस! मन में उत्साह और अपने संकल्प की पूर्ति के लिये लगन होनी चाहिये। दीपावली के इस अवसर पर दीपों की बात निकली, तो मुझे चाणक्य के जीवन का एक प्रसंग आ रहा है।

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

1 शिरीष खरे / 2010/11/04 5:56 pm

सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त.

लोकत्रंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -27

लोकत्रंत्र के आगे बौद्धिक लोकतंत्र -27

0 देवसूफी राम बंसल / 2010/10/19 4:48 am

भारत की वर्तमान स्थिति ऐसी है जिसे राजनेताओं द्वारा जनता की लूट कहा जा सकता है, इसी लूट को भारत की वर्तमान ‘राजनीति‘ कहा जा सकता है. ऐसी स्थिति में

आप कैसे युवा हैं ?

आप कैसे युवा हैं ?

1 शंकर दत्त फुलारा / 2010/10/10 5:09 am

(जिन्हें भारत एक गड़रियों का देश था पढ़ाया गया है जिन्हें ये पढाया गया है कि हिन्दू धर्म ग्रंथों में केवल कहानिया हैं और कुछ नहीं, कैसे युवा हैं आप