<?xml version="1.0" encoding="UTF-8"?>
<rss version="2.0"
	xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
	xmlns:wfw="http://wellformedweb.org/CommentAPI/"
	xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
	xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom"
	xmlns:sy="http://purl.org/rss/1.0/modules/syndication/"
	xmlns:slash="http://purl.org/rss/1.0/modules/slash/"
	>

<channel>
	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; संसद मार्ग</title>
	<atom:link href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/feed/" rel="self" type="application/rss+xml" />
	<link>http://www.janokti.com</link>
	<description>राज-समाज और जन की आवाज</description>
	<lastBuildDate>Thu, 09 Sep 2010 15:11:57 +0000</lastBuildDate>
	<language>en</language>
	<sy:updatePeriod>hourly</sy:updatePeriod>
	<sy:updateFrequency>1</sy:updateFrequency>
	<generator>http://wordpress.org/?v=3.0.1</generator>
		<item>
		<title>देश की शिक्षा स्थिति : एक सच ?</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%9a/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%9a/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 08 Sep 2010 12:03:05 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रोहित कश्यप</dc:creator>
				<category><![CDATA[विमर्श/सुझाव/अभियान]]></category>
		<category><![CDATA[शिक्षा]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[controversy]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[mid-day-meal]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[social justice]]></category>
		<category><![CDATA[youth]]></category>
		<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=6620</guid>
		<description><![CDATA[आज एक दफा फिर से कुछ लिखने की कोशिश करने बैठा हूँ &#124; हाथ कंप्यूटर के की बोर्ड पर चलने शुरू हो गएँ हैं तो लगता है थोड़ा बहुत लिख... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%9a/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<div>
<p><a rel="attachment wp-att-6634" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%9a/attachment/lumbini/"><img class="alignleft size-medium wp-image-6634" title="lumbini" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/09/lumbini-300x200.jpg" alt="" width="300" height="200" /></a>आज एक दफा फिर से कुछ लिखने की कोशिश करने बैठा हूँ | हाथ कंप्यूटर के की बोर्ड पर चलने शुरू हो गएँ हैं तो लगता है थोड़ा बहुत लिख लूँगा | हाँ क्यूँ न लिखूंगा कोशिश करने वाले की कभी हार नहीं होती यह बात सबने सुन रखी है | मैंने भी कई बार इस शब्द को सुना है और आज उसी को लागु कर रहा हूँ | आज मैं सुबह से सोच रहा था की आज क्या लिखूंगा और मैंने अंतत काफी  जद्दोजहद के बाद फैसला किया की आज <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/" title="View all posts in शिक्षा" target="_blank">शिक्षा</a></span> पर ही कुछ लिखूंगा , आखिर हाल में हमने शिक्षक दिवस भी मनाया है | तो इससे बेहतर तो कुछ हो ही नहीं सकता है | शिक्षक दिवस तो हर वर्ष मानते हैं हम ,लेकिन जो वायदे और घोषणाएं उस दिन की जाती है वो फिर अमल में आ नहीं पाती है| आज देश के <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/" title="View all posts in शिक्षा" target="_blank">शिक्षा</a></span> मंत्री जो अपने को बहुत कुलीन समझते हैं , और समझे भी क्यूँ नहीं आखिर विदेशों में <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be/" title="View all posts in शिक्षा" target="_blank">शिक्षा</a></span> ग्रहण की , हमेशा से बड़े लोगों के उठना बैठना हुआ है , देश में शिक्षा की दशा को सुधारना चाह रहे हैं | लगातार नए-नए बिल संसद में सुधार को लेकर पेश किये जा रहे हैं , सहमती चाहे एक पे भी न बने आखिर पेश तो हो रहा है | विदेशी शिक्षण संस्थानों को भी निमंत्रण दिया जा रहा है , की आप आयें और देश में अपनी शाखा खोलें | वो शिक्षा के उच्च स्तर को लेकर काफी चिंतित दिख रहे हैं और खास कर के अंग्रेजी शिक्षा को लेकर वे काफी परेशान हैं | सही भी है आप ही सोचिये अगर आज के समय में अंग्रेजी न आती हो तो क्या होगा | अच्छे  माहौल में आप बैठने के काबिल नहीं रहेंगे , तथाकथित बड़े और सभ्य लोगों के नजरों में आपकी खातिरदारी नहीं होगी , और  आजकल ऐसा कौन नहीं चाहता है | तो अब तो आपको समझ आ ही गया होगा की शिक्षा मंत्री जी क्यूँ परेशान हैं | लेकिन एक बात जो पूरे मज़े को ख़राब कर रही है , शिक्षा मंत्री जिसको जानकर भी अनजान बने हुए हैं वो है भारत की असली शिक्षा की स्थिति | अब आईये हम इस हकीकत पर भी नज़र डालतें हैं | आज भी हमारे देश  कुल मिलाकर 12  लाख शिक्षकों की कमी है | आज भी 42  मिलियन बच्चे ( 1  मिलियन = 1000 ,000 )   जिनकी उम्र 6 से 14 वर्ष के बीच है स्कूलों से महरूम हैं | यह दिन पर दिन सुधर रहा है इसपर एक काली लेकिर ही छाई है | स्थिति तो और भी भयावह है आप ही बताईये आज भी देश के 16  प्रतिशत गांवों में प्रायमरी स्कूल की सुविधा नहीं है , और 17  प्रतिशत स्कूलों में सिर्फ एक शिक्षक है | अब बताईये क्या देश में शिक्षा की स्थिति अच्छी हो  रही है, उत्तर में मुझे नहीं लगता है की कोई कहेगा की सुधार आ रहा है | आज भी बिहार में प्रायमरी स्तर पर 1  लाख शिक्षकों की कमी है | झारखण्ड में 42 टीचरों के पद खाली हैं | और तो और उत्तरप्रदेश में तो 1000 प्रायमरी स्कूलों में तो शिक्षक ही नहीं हैं | और बिहार , झारखण्ड और राजस्थान में प्रत्येक प्रायमरी स्कूलों का औसत लें तो यह 2  शिक्षक प्रति स्कूल निकलेगा | देश में शिक्षा की ऐसी भयावह स्थित है और हमारे मंत्री महोदय विदेशी संस्थानों को आमंत्रण दे रहे हैं | सही ही कहते हैं की देश की शिक्षा की डोर उस आदमी के हाथ में देनी चाहिए जिसके देश के बारे में पता हो | ऐसे आदमी के हाथ में अगर व्यवस्था आएगी तो सुधार की संभावना रहेगी लेकिन अगर कपिल सिब्बल जैसे लोगों के हाथ में रही तो सुधार की संभावना बहुत कम है | स्थिति नीचे से लेकर ऊपर तक ऐसी ही है | क्या आपको नहीं लगता की हमारे देश में शिक्षा को सिर्फ ऐसे लोगों तक सीमित किया जा रहा है जो पहले से जागरूक हैं | अभी हाल में ही एक खबर आयी थी की एक लड़की जो इंजीनियरिंग की छात्रा थी ने सिर्फ इसलिए आत्महत्या कर ली की वो अंग्रेजी में कमजोर थी और इसके लिए क्लास में उसका मजाक बनाया जाता था | लेकिन इस और धयान देना जरूरी है जहाँ शुरू से ही पढाई नहीं हो पा रही है उनकी स्थिति कैसी होगी |  आज देश में शिक्षा के कानून के तहत शिक्षक और विद्यार्थियों के बीच औसत 1 : 30  का होना चाहिए लेकिन यह औसत आज भी 1 : 42  का है और बिहार में तो यह 1 : 83  का है | आज हमारे देश में कई ऐसी स्कूली बच्चे हैं जिनको अंग्रेजी नहीं आती है , मैंने खुद इसका परीक्षण किया है | अंग्रेजी के नाम पे वो बिल्कुल शुन्य हो जाते हैं | और अगर हम पिछड़े इलाकों की बात करे तो स्थिति बहुत ही ख़राब है | हकीकत को नजरंदाज नहीं किया जा सकता , लेकिन हमारे देश में इसको नजरंदार किया जा रहा है | भविष्य के सपने देखने में कोई बुराई नहीं है , लेकिन उसके लिए काम भी करना होता है यह हमें नहीं भूलना चाहिए | स्थिति ऊपर से लेकर नीचे तक एक ही समान है , आज भी समय- समय पर आने वाली रिपोर्ट देश की शिक्षा की स्थिति से अवगत कराती है , और हमेशा खामी ही निकालती है | और इस रिपोर्ट को कुछ दिनों के बाद एक बक्से में बंद कर दिया जाता है और बक्से को  उफनती नदी में डाल दिया जाता  है | जिसका कोई ठिकाना नहीं रहता | यही स्थिति देश की है , आयोग बिठाया जाता है और उनसे रिपोर्ट मांगी जाती है ,लेकिन वह सिर्फ आयोग को ही पता रहता है की उसने रिपोर्ट क्या बनायीं है | तो यहाँ पर एक गंभीर प्रश्न उठता है की आखिर कैसे हमारे देश की स्थिति शिक्षा मामले में अच्छी होगी , क्या देश में जो स्थिति है शिक्षा की उसके आधार पर हम आगे सकते हैं | बात बिल्कुल  स्पष्ट है हमें यहाँ हकीकत को लेकर नीति बनानी होगी नहीं तो स्थिति ठीक नहीं हो सकता ? सुधार तो ऐसी स्थिति में हो ही नहीं सकता | एक सशक्त नीति बने होगी और उसके पालन करना होगा | और ऐसी नीति सिर्फ वातानुकूलित में बैठ कर नहीं बन सकता , इसके लिए हकीकत से रूबरू होना होगा , नहीं तो कुछ नहीं हो सकता | हम सिर्फ भोजन और कपडे देकर शिक्षा के प्रति लोगों को जागरूक नहीं कर सकते | हमें सही में एक ऐसी मानसिकता से काम करने की जरूरत है जो हर वर्ग को ध्यान में रख कर बनायीं गयी हो |यह देश की शिक्षा का एक सच है जिसे हम चाह कर भी नकार नहीं सकते हैं | स्थिति और भी ख़राब है अगर हम जाँच करे तो हमें पता चलेगा | सुधार अगर नहींहोगा को बाद के दिनों में खाई को पाटना मुश्किल होगा?</p>
</div>
<p><span style="font-size: large;"> </span></p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%b7%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%a5%e0%a4%bf%e0%a4%a4%e0%a4%bf-%e0%a4%8f%e0%a4%95-%e0%a4%b8%e0%a4%9a/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>बड़े नोट बंद क्यों नहीं करते</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 04 Sep 2010 14:56:16 +0000</pubDate>
		<dc:creator>शंकर दत्त फुलारा</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[market]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=6449</guid>
		<description><![CDATA[अगर भ्रष्टाचार, आतंकवाद,नक्सलवाद और अर्थव्यवस्था में मंदी को समाप्त करना है, महंगाई को नियंत्रण में लाना है तो बड़े नोट बंद क्यों नहीं करते ? आज जितने भी &#8220;भ्रष्ट&#8221;पकड़े जा... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p><a rel="attachment wp-att-6530" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0/attachment/1000_rupee/"><img class="alignright size-medium wp-image-6530" title="1000_Rupee" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/09/1000_Rupee-300x247.jpg" alt="" width="300" height="247" /></a>अगर भ्रष्टाचार, आतंकवाद,नक्सलवाद और अर्थव्यवस्था में मंदी को समाप्त करना  है, महंगाई को नियंत्रण में लाना है तो बड़े नोट बंद क्यों नहीं करते ?<br />
आज जितने भी &#8220;भ्रष्ट&#8221;पकड़े जा रहे हैं उनके पास केवल पांच सौ और हजार के नोट मिल रहे हैं, नकली नोटों का कारोबार करने वालों पर  भी यही बात लागू होती है | अगर छोटे नोट होते तो इतनी बड़ी मात्रा में इन्हें सँभालने के लिए बड़े गोदाम या इधर-उधर लेजाने के लिए बड़े-बड़े ट्रकों की आवश्यकता  होती ; जाहिर है इनको संभालना आसान नहीं होता और सबकी दृष्टि में आ जाता |  नकली नोटों की छपाई उसके मूल्य से अधिक पड़ने के कारण भी छपने बंद हो जाते | इन नकली नोटों के बंद होने से जो आतंकवादी  सीमा पार से दो-चार लाख के नकली नोटों के साथ यहाँ प्रवेश कर जाते हैं, तब मुमकिन नहीं होता |   यही बात न्यूनाधिक नक्सलवाद पर भी लागू  होती है | <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/" title="View all posts in भ्रष्टाचार" target="_blank">भ्रष्टाचार</a></span> और कालाधन साथ ही नकली करेंसी समाप्त करने का एकमात्र और आसान उपाय यही है कि बड़े नोट बंद कर दिए जाएँ | न केवल बंद कर दिए जाएँ अपितु ऐसी व्यवस्था बनायीं जाये कि फिर कभी बड़े नोट न छापे  जायं |</p>
<p>जो छोटी-मोटी खरीदारी है उसके लिए हजार पांच सौ रूपये लेकर जाने की आदत या अपनी जेबें और बटुआ (पर्स) या बैग आम जनता बना लेगी | बड़े लेन &#8211; देन भी अभी तक तो बड़े पैसे वाले बैंकों से ही करते हैं तब गरीब लोगों को भी इसके लिए कुछ अभ्यास और सुविधाओं  के बाद आदत पड़ जाएगी</p>
<p>अगली एक और मुख्य बात;<br />
&#8220;देश के भीतर जमा लगभग ६० लाख  करोड़ रूपये काला धन&#8221; एक मुस्त बहार आ कर देश के माननीयों और भ्रष्टों की पोल तो खोलेगा  ही साथ ही देश की अर्थव्यवस्था में गुणात्मक उछाल लायेगा  | जिससे शायद दस गुणा तेजी से भारत अपने नागरिको के लिए सुविधाएँ उपलब्ध करा पायेगा | दस गुणा इसलिए, क्योंकि ; बड़े नोट बंद होने के कारण <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/" title="View all posts in भ्रष्टाचार" target="_blank">भ्रष्टाचार</a></span> कम से कम होगा |</p>
<p>आज कदम कदम पर ए टी एम और बैंको की अन्य सुविधाएँ हैं जहाँ कम हैं वहां बधाई जा सकती हैं इस लिए मेरा तो ये सुझाव है कि सविधान में ये व्यवस्था होनी चाहिए कि अधिक से अधिक सौ रूपये से बड़ा नोट कभी न छापा जाये |</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ac%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a5%87-%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%9f-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%a8%e0%a4%b9%e0%a5%80%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%b0/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>4</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>मनरेगा में सिर्फ पैसा बहाने से कुछ नही होगा</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%be/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%be/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 21 Aug 2010 12:05:43 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रमेश भट्ट</dc:creator>
				<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[NREGS]]></category>
		<category><![CDATA[class-struggle]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[controversy]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[khushhal bharat]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[मनरेगा]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[विमर्श/सुझाव/अभियान]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=6072</guid>
		<description><![CDATA[आज से लगभग 4 साल पहले देश भर में रोजगार यात्राऐं निकाली जा रही थी। गीत गाया जा रहा था। हमारे लिए काम नही, हमें काम चाहिए। इसी समस्या को... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%be/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-medium wp-image-6073" title="araria_nrega_work" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/08/araria_nrega_work-300x206.jpg" alt="" width="300" height="206" />आज से लगभग 4 साल पहले देश भर में रोजगार यात्राऐं निकाली जा रही थी। गीत गाया जा रहा था। हमारे लिए काम नही, हमें काम चाहिए। इसी समस्या को ध्यान में रखते हुए 2006 में महात्मा गांधी ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना की शुरूआत हुई। यह विश्व की अकेली ऐसी योजना है जो मांगने पर जरूरतमन्दों को रोजगार की गारंटी देती है। योजना का मकसद लोगों को गांव में ही काम मुहैया कराना है। गांव में न सिर्फ स्थाई परिसंपत्तियों का निर्माण हो बल्कि महिला और पुरूषों को समान मजदूरी मिल सके। बीते चार सालों में केन्द्र सरकार इस योजना पर भारी भरकम खर्चा कर रही है। काम का आवेदन करने पर 15 दिन में रोजगार देना अनिवार्य है। काम पूरा होने की तिथि से 15 दिन के भीतर मजदूरी देने का प्रावधान है। अगर मजदूरी समय पर नही मिलती तो मजदूरी मुआवजा अधिनियम 1936 के तहत मुआवजा देना होगा। मनरेगा योजना 16000 करोड़ के बजट के साथ शुरू हुई । आज यानि 2010-11 में इस योजना को 41100 करोड़ रूपये आवंटित किये है। यह मांग आधारित कार्यक्रम है लिहाजा सरकार को जरूरत पड़ने पर धन की उपलब्धता करवानी होगी। बीते तीन साल के औसत रोजगार के आंकड़ों पर अगर नज़र डाली जाए तो</p>
<p style="text-align: justify;">साल                 औसत काम दिनों में</p>
<p style="text-align: justify;">2007-08               42</p>
<p style="text-align: justify;">2008-09               48</p>
<p style="text-align: justify;">2009-10               52</p>
<p style="text-align: justify;">इससे एक बात तो स्पष्ट है कानून बनने के चार साल के बाद में 100 दिन का रोजगार उपल्ब्ध कराने में आज भी हम नकामयाब रहे हैं। 11वीं पंचवर्षीय योजना के अर्धवार्षिक समीक्षा में <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be/" title="View all posts in मनरेगा" target="_blank">मनरेगा</a></span> कार्यक्रम में क्रियान्यवयन में पिश्चम बंगाल का रिपोर्ट कार्ड सबसे खराब रहा है। पिश्चम बंगाल 28 दिन का ही औसत रोजगार उपलब्ध करा पाया है। जबकि काम मुहैया कराने का राष्ट्रीय औसत 48 दिन है। मगर 15 राज्य मसलन हिमांचल, महाराष्ट्र, हरियाणा, असम, मेघालय, तमिलनाडू जम्मू और कश्मीर, उत्तराखण्ड, उड़ीसा, कर्नाटक, पंजाब, पिश्चम बंगाल, बिहार, गुजरात और केरल जैसे राज्य सालाना 48 दिन का औसत रोजगार मुहैया कराने में नकामयाब रहे हैं। सालाना आधार में देश भर में कितने परिवारों को रोजगार मिला इन आंकड़ों पर अगर गौर करें तो</p>
<p style="text-align: justify;">साल                कितने परिवारों को रोजगार मिला  करोड़ों में</p>
<p style="text-align: justify;">2006-07             2.10</p>
<p style="text-align: justify;">2007-08             3.39</p>
<p style="text-align: justify;">2008-09             4.51</p>
<p style="text-align: justify;">2009-10             5.06</p>
<p style="text-align: justify;">नरेगा के तहत 60 फीसदी न्यूनतम राशि मजदूरी के लिए खर्च करनी आवश्यक है। राज्यों ने इस बात का ध्यान रखा है कि योजना के मुताबिक 60 फीसदी न्यूनतम हिस्सा मजदूरी के तौर पर प्रदान करना है। एक नज़र राज्यवार मजदूरी के औसत आंकड़ों पर</p>
<p style="text-align: justify;">साल                आवंटित राशि का मजदूरी पर खर्च</p>
<p style="text-align: justify;">2006-07             66</p>
<p style="text-align: justify;">2007-08             68</p>
<p style="text-align: justify;">2008-09             67</p>
<p style="text-align: justify;">2009-10             68</p>
<p style="text-align: justify;">नरेगा के तहत कानून के मुताबिक 100 दिन का रोजगार मुहैया कराना जरूरी है। मगर इस कार्य में ज्यादातर राज्यों का रिपोर्ट कार्ड निराश करने वाला है। 100 दिन रोजगार पाने वाले परिवारों की अगर बात की जाए को रोजगार गारंटी का सच खुद पर खुद सामने आ जायेगा। 2006-07 में 10.29 फीसदी, 2007-08 में 10.62 फीसदी, 2008-09 में 14.48 फीसदी और 2009-10 में 13.24 फीसदी परिवारों को 100 दिन का रोजगार मिला पाया। अरूणांचल प्रदेश, नागालैण्ड, मणीपुर और मिजोरम जैसे राज्यों में किसी भी परिवार को 100 दिन का रोजगार नही मिल पाया। फरवरी 2006 से सितम्बर 2009 के बीच 79 लाख कार्य चलाए गए जिनमे केवल 31 लाख ही पूरे हो पाये जो पूरे काम का 39 फीसदी है। 2009-10 में 40.98 लाख काम चलाए गए जिनमें 67 फीसदी काम जल संरक्षण से जुड़े है।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">महात्मा गांधी नरेगा में शिकायतों का अंबार है। यह बात दिगर है कि हमारी सरकारों के कानों तक कितनी शिकायतें पहुंच पाती है। जो शिकायतें आम है उनमें प्रमुख है जागरूकता का अभाव, समय से काम का न मिलना, मजदूरी का समय पर और पर्याप्त राशि का न मिलना, मस्टर रोल जैसे उचित रिकार्ड का ना रखा जाना, बैंक और पोस्ट आफिसों के बार बार चक्कर लगाना और योजना के तहज तैयार का की गुणवत्ता। सरकारी आंकड़ों के लिहाज से बीते तीन सालों में 1331 शिकायतें सरकार के संज्ञान में आई जिसमें सबसे ज्यादा 419 उत्तर प्रदेश से 235 मध्य प्रदेश 180 राजस्थान 125 बिहार और 87 झारखण्ड से है।</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">महात्मा गाँधी नरेगा में महिलाओं की हिस्सेदारी में तमिलनाडू राज्य अव्वल रहा है। इस राज्य में <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be/" title="View all posts in मनरेगा" target="_blank">मनरेगा</a></span> में महिलाओं की हिस्सेदारी 79 फीसदी है जबकि 2008-09 साल में बिहार में 30 फीसदी झारखण्ड में 28 फीसदी और उत्तरप्रदेश में 18 फीसदी रही जो की कानून के प्रावधन जिसमें महिलाओं की न्यूनतम 33 फीसदी हिस्सेदारी होनी चाहिए से काफी नीचे है। नरेगा के तहत जारी किये जार्ब कार्ड की वैधानिकता 5 साल की होती है। पिछले साल सरकार के मजदूरी राशि को 100 रूपये तो कर दिया है मगर रोजगार की अवधि 100 दिन से ज्यादा करने पर हाथ खड़े कर दिये हैं। इसके पीछे सीधा सा तर्क है जब हम 100 दिन का रोजगार ही मुहैया नही कर पर रहे है तो काम के दिन बड़ाने से क्या फायदा। <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be/" title="View all posts in मनरेगा" target="_blank">मनरेगा</a></span> के काम का विस्तार किया गया है। इसके तहत सिंचाई सुविधा, बागवानी, पौंधा रोपण और वनीकरण जैसे कामों को लिया गया है। साथ ही इस बात पर जोर दिया गया है कि रोजगार देने में गरीब, अनुसूचित जाति, जनजाति को प्राथमिकता दी जाए। सरकार ने राष्ट्रीय स्वास्थ्य बीमा योजना का फायदा नरेगा कामगारों को देने का रास्ता साफ कर दिया है</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">महात्मा गांधी रोजगार में सरकार हर स्तर पर निगरानी व्यवस्था को मजबूत करना चाहती है। इसके लिए हर जिले पर एक लोकपाल नियुक्त करने के दिशानिर्देश जानी किये गए मगर पंजाब को छोड़कर अब तक किसी राज्य ने इस पर अमल नही किया। समाज के जागरूक लोगों का एक पैनल गठित करने की बात कही गई है। सोशल आडिट को आवश्यक कर दिया गया है। पंचायतों को अपनी भूमिका प्रमुखता से निभानी है। इस योजना को सफल बनाने में सांसदों का भी योगदान अहम हो सकता है। दरअसल जिला स्तर में निगरानी समिति का अध्यक्ष सासन्दों को बनाया गया है। बकायदा सालाना कितनी बैठकें राज्य वार होनी है या जिले वार होनी है इसके दिश निर्देश केन्द्र ने जानी कर रखें हैं। मसलन सालान आधार में 28 राज्यों में 112 बैठकें होनी चाहिए मगर 2006-07 में 35, 2007-08 में 36 और 2008-09 में 35 बैठकें भी हो पायी। हरियाणा, जम्मू और कश्मीर, मिजोरम ,दादर और नागर हवेली में पिछले 2 सालों में एक भी बैठक नही हुई। वही 619 जिलों में कुल 2476 बैठकें होनी चाहिए। मगर 2006-07 में 619, 2007-08 में 912 और 2008-09 में 579 बैठकें ही हुई। इन बैठको की अध्यक्षता हमारे सासन्द महोदयों को करनी थी। इससे पता चलता है कि निगरानी व्यवस्था की स्तर क्या है। यहां सांसदों का यह भी कहना है कि महज अध्यक्ष बना दिया गया है उनके पास किसी तरह की कोई ताकत नही है।</span></p>
<p style="text-align: justify;">महात्मा गांधी नरेगा एक ऐतिहासिक योजना है। इसके लिए ग्रामीण विकास का एक बड़ा हिस्सा खर्च किया जा रहा है। मगर जरूरतमन्दों तक अभी भी योजना का सम्पूर्ण लाभ नही पहुंच पा रहा है। इसके लिए राज्य सरकारों को गम्भीरता से काम करना होगा। साथ ही केन्द्र सरकार को अच्छा प्रदर्शन करने वाले राज्यों को प्रोत्साहित करना चाहिए साथ ही खराब प्रदर्शन करने वाले राज्यों पर जुर्माना लगाना चाहिए। सिर्फ पैसा बहाने से कुछ नही होगा । मनरेगा के तहत कराये जा रहे कार्यो की समीक्षा करनी होगी। योजना जरूरत ऐतिहासिक है मगर इसे बेहतर बनाने के लिए हम सभी को मिलकर प्रयास करना पड़ेगा।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%97%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%ab-%e0%a4%aa%e0%a5%88%e0%a4%b8%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%b9%e0%a4%be/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>कश्मीर-स्वायत्तता बनाम विस्थापितों की समस्या ?</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b5/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b5/#comments</comments>
		<pubDate>Wed, 18 Aug 2010 10:59:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator>डा ० पुरुषोत्तम मीणा</dc:creator>
				<category><![CDATA[राष्ट्रीय]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[accountability]]></category>
		<category><![CDATA[anti terrorism]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[kahsmir]]></category>
		<category><![CDATA[khushhal bharat]]></category>
		<category><![CDATA[naxalites]]></category>
		<category><![CDATA[pakistaan]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[terrorism]]></category>
		<category><![CDATA[youth]]></category>
		<category><![CDATA[कश्मीर]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[जवाहर लाल नेहरू]]></category>
		<category><![CDATA[प्रधानमन्त्री]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[शिमला समझौता]]></category>
		<category><![CDATA[सेना]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5956</guid>
		<description><![CDATA[इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि कश्मीर का अन्तर्राष्ट्रीयकरण करने के लिये बहुत कुछ तत्कालीन प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू की अपरिपक्वता एवं अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में उनकी... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b5/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-full wp-image-5957" title="kashmiri pandit" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/08/kashmiri-pandit.jpg" alt="" width="420" height="578" />इस बात से कोई भी इनकार नहीं कर सकता कि <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0/" title="View all posts in कश्मीर" target="_blank">कश्मीर</a></span> का अन्तर्राष्ट्रीयकरण करने के लिये बहुत कुछ तत्कालीन प्रधानमन्त्री जवाहर लाल नेहरू की अपरिपक्वता एवं अन्तर्राष्ट्रीय मामलों में उनकी नासमझी उत्तरदायी है। जिसे हम दशकों से भुगत रहे हैं, लेकिन जैसा कि कुछ लोग कहते हैं कि <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0/" title="View all posts in कश्मीर" target="_blank">कश्मीर</a></span> मामले को पंजाब की तरह से हल किया जाना चाहिये। यह अनुचित और अविवेकपूर्ण बात है। पंजाब और कश्मीर को एक ही नजर से नहीं देखा जा सकता। हाँ आतंक से निपटने के मामले में हमें स्पष्ट नीति बनानी चाहिये और देश के किसी भी कौने में सिर उठाने वाले आतंक के विरुद्ध कठोरतम निर्णय लेने से नहीं हिचकना चाहिये, बेशक आतंकवादी कोई भी क्यों न हों।</p>
<p style="text-align: justify;"><span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80/" title="View all posts in प्रधानमन्त्री" target="_blank">प्रधानमन्त्री</a></span> के एक बयान को आधार बनाकर कश्मीर को और अधिक स्वायत्तता के सम्बन्ध में, देश के लोगों की चिन्ता जायज है। ऐसा कोई भी निर्णय भारत संघ को कमजोर करने वाला सिद्ध होगा। अत: भारत सरकार को ऐसे किसी भी प्रकार के ऐसे निर्णय से बचना चाहिये, जो बाद में अन्य प्रान्तों के लिये नजीर बने। यदि केन्द्र सरकार देश के लोगों की चिन्ता को दरकिनार करके कश्मीर को गैर-जरूरी स्वायत्तता प्रदान करने के लिये संसद में कोई विधेयक लाती है तो विपक्षी दलों से उस विरोध की उम्मीद नहीं, जो कि जरूरी है। अत: देश की एकता तथा अखण्डता को अक्षुण्य बनाये रखने के लिये समर्पित देशभक्त नागरिकों को ऐसे किसी भी निर्णय के विरोध में सडकों पर उतरने के लिये मानसिक रूप से पहले से ही तैयार होना होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">इसके साथ-साथ हम सभी भारतीयों को केवल भावनाओं में बहकर ऐसी बातें नहीं करनी चाहिये, जो देश के माहौल को खराब करती हों या नयी पीढी को कश्मीर की समस्या को ईमानदारी से देखने और निर्णय करने से रोकती हों, क्योंकि इतिहास को बदला नहीं जा सकता। इसलिये हमें नेहरू की एक राजनैतिक गलति के साथ-साथ यह भी याद रखना चाहिये कि 14 एवं 15 अगस्त, 1947 की रात्री को भारत विभाजन के समय केवल पाकिस्तान और भारत नाम के दो राष्ट्रों का ही जन्म नहीं हुआ था, बल्कि उस समय अखण्ड कश्मीर भी भारत संघ या पाकिस्तान का हिस्सा नहीं था। बाद में घटित घटनाओं के परिणामस्वरूप कश्मीर सरकार ने विवश होकर, कश्मीर के भारत में विलय का समझौता किया था। हम सभी जानते हैं कि विवशता में किये गये समझौते या निर्णयों के परिणाम बहुत कम सकारात्मक होते हैं। <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b6%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b2%e0%a4%be-%e0%a4%b8%e0%a4%ae%e0%a4%9d%e0%a5%8c%e0%a4%a4%e0%a4%be/" title="View all posts in शिमला समझौता" target="_blank">शिमला समझौता</a></span> भी इसका उदाहरण है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस पृष्ठभूमि में अन्तर्राष्ट्रीय बिरादरी के सामने सम्मानपूर्वक खडे रहने के लिये, भारत सरकार का यह वैधानिक दायित्व है कि वह तत्कालीन कश्मीर सरकार के साथ हुए समझौते का सम्मान एवं क्रियान्वयन ईमानदारी से करे। यही नहीं कश्मीर के भारत में विलय के समय तत्कालीन भारत सरकार और कश्मीर सरकार के बीच हुए करार को सम्मान दिया जाना सभी भारतीय नागरिकों को भी कानूनी और नैतिक दायित्व है।</p>
<p style="text-align: justify;">एक सवाल यह भी उठाया जाता है कि कश्मीर के भारत में विलय के करार को भारत सरकार समाप्त क्यों नहीं कर देती। ऐसा कहने वाले कानून और अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति के साथ-साथ भारत की गरिमा का आकलन करने में भावनाओं को बीच में लाते हैं और ऐसे विचारक भारत संघ का गलत अर्थ लगाने का दुराग्रह करते हैं। बीज को समाप्त करके वृक्ष की रक्षा करना बुद्धिमतापूर्ण तर्क नहीं है। हाँ विलय के करार को संशोधित किया जा सकता है। जिसे समझने की जरूरत है। वर्तमान करार को समाप्त करके, भारत संघ के हित में नया करार करने के लिये जम्मू एवं कश्मीर राज्य में ऐसे दल या गठबन्धन को पूर्ण बहुत मिलना जरूरी है, जो कश्मीर के भारत में विलय के समझौते को वर्तमान सन्दर्भों में नया रूप देने को राजनैतिक रूप से तैयार हो। जब तक ऐसा नहीं होगा, कश्मीर समस्या को लेकर भावनाओं में बहने या भावनाओं को भडकाने से कोई समाधान सम्भव नहीं है।</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन यदि विलय सम्बन्धी वर्तमान करार को समाप्त नहीं कर पाना संवैधानिक और ऐतिहायिक बाध्यता है, तो इसका अर्थ ये भी नहीं है कि देश के प्रति संदिग्ध भारतीय कश्मीरियों की जायज-नाजायज मांगों के समक्ष भारत सरकार को नतमस्तक हो जाना चाहिये। सवा सौ करोड भारत के लोगों का सशक्त नेतृत्व करते हुए केन्द्र सरकार को अपनी रीढ की हड्डी मजबूत रखनी होगी। जिससे आतंकियों को प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन देने वालों को कडा सन्देश जाये। जरूरत पडने पर आतंकियों के विरुद्ध लगातार और योजनाबद्ध अभियान चलाकर, लिट्टे की तरह उनके सफाये पर भी ध्यान दिया जाना जरूरी है। ऐसे मामलों में मानव अधिकारों का सवाल भी खडा होता है, मैं स्वयं भी मानव अधिकारों का पैरोकार हूँ, लेकिन जब बात हद से आगे निकल जाये और <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b8%e0%a5%87%e0%a4%a8%e0%a4%be/" title="View all posts in सेना" target="_blank">सेना</a></span> एवं पुलिस के प्रति क्रूरता का वर्ताव हो रहा हो, तो फिर कुछ न कुछ तो करना ही होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">उपरोक्त के साथ ही हमें यह भी याद रखना होगा कि कश्मीर से विस्थापित लोगों की पुन: वापसी पर भी विचार करना होगा। जिसके लिये किसी दल विशेष को जिम्मेदार ठहराकर गाली देने या कोसने से कुछ भी हल नहीं निकलने वाला। क्योंकि विस्थापित लोगों की पुन: कश्मीर में वापसी सम्भव नहीं हो पाने के लिये केवल काँग्रेस या यूपीए सरकार ही दोषी नहीं है, बल्कि सभी राजनैतिक दल समान रूप से जिम्मेदार हैं, जो कभी न कभी इस देश पर राज कर चुके हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">कोई साधारण व्यक्ति भी इस बात को समझ सकता है कि राजनीति करने और अपने वोट बैंक को मजबूत करने के लिये कश्मीर के विस्थापितों की बातें तो खूब की जाती हैं, लेकिन कोई सार्थक कदम नहीं उठाया जाता है। अन्यथा क्या कारण है कि छोटी-छोटी बातों पर संसद में ताण्डव करने वाले राजनैतिक दल कश्मीर से विस्थापित किये गये लोगों की पुन: वापसी के लिये संसद में जरूरत के अनुसार आवाज तक नहीं उठाते?</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">क्या यह समय की मांग नहीं कि कश्मीर विलय के प्रस्ताव की शर्तों को ध्यान में रखते हुए, कश्मीर के मूल वासिन्दों को वापस कश्मीर में बसाया जावे और कश्मीर पर निर्णय लेते समय या कश्मीर की सरकार के चुनाव के समय इन विस्थापितों को भी शामिल किया जावे।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">क्या यह जरूरी नहीं हो गया है कि विस्थापितों की समस्या का समाधान नहीं होने तक भारत सरकार पर निर्णायक दबाव बनाने के लिये क्रमिक भारत बन्द हो, हर दिन कहीं न कहीं भारत यात्रा चलती रहे और संसद का संचालन तब तक रुका रहे, जब तक कि सरकार निर्णय लेकर क्रियान्वयन की समयबद्ध योजना पेश नहीं कर देती है! कौन करेगा यह सब? निश्चय ही उन्हीं दलों को करना होगा, जिन्हें इस मुद्दे पर वोट मिलते हैं और जो इस मुद्दे को बार-बार उठाते रहने का नाटक करते रहते हैं। लेकिन ऐसा क्यों नहीं हो रहा है? इसके पीछे भी गहरी साजिश की बू आती है! कुछ दलों के लिये जानबूझकर कश्मीरी विस्थापितों का मुद्दा जिन्दा रखना राजनैतिक जरूरत है। जिससे उन्हें वोट मिलते रहें और इस देश का माहौल शान्त एवं सौहार्दपूर्ण नहीं बन पाये।</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसे हालातों से निपटने के लिये प्रत्येक भारतीय को आगे आना होगा। लेखक अपना काम कर रहे हैं, लेकिन जिन लोगों को कश्मीर विस्थापितों के दर्द का अहसास है, उन्हें अपने-अपने गॉव, कस्बे और शहर में इस बात के लिये आवाज उठानी होगी और मुद्दे को अंजाम तक पहुँचाये बिना रुकना नहीं होगा, तब ही कुछ आशा की जा सकती है। अन्यथा तो लोगों को गुमराह किया जाना और हिन्दू-मुसलमानों को भडकाने के नाम पर रोटी खाने वालों का एवं पेड न्यूज राईर्स का धन्धा चलता रहेगा।</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%95%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a5%8d%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%a4%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%ae-%e0%a4%b5/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>2</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>ममता का मिशन पश्चिम बंगाल</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 17 Aug 2010 18:10:01 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रमेश भट्ट</dc:creator>
				<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[bhajpa]]></category>
		<category><![CDATA[class-struggle]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[maoist]]></category>
		<category><![CDATA[marks]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[नक्सलवादी आंदोलन]]></category>
		<category><![CDATA[नक्सली]]></category>
		<category><![CDATA[पश्चिम बंगाल]]></category>
		<category><![CDATA[लोकसभा चुनाव]]></category>
		<category><![CDATA[वामपन्थी]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5937</guid>
		<description><![CDATA[ममता बनर्जी का लालगढ़ दौरा विवादों से भरा रहा। नक्सली कमाण्डर आजाद पर दिया उनका बयान दूसरे दलों के नेताओं में बदहजमी पैदा कर गया और उसका असर संसद में... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-full wp-image-5939" title="mamta banarji" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/08/mamta-banarji.jpg" alt="" width="320" height="312" />ममता बनर्जी का लालगढ़ दौरा विवादों से भरा रहा। नक्सली कमाण्डर आजाद पर दिया उनका बयान दूसरे दलों के नेताओं में बदहजमी पैदा कर गया और उसका असर संसद में दिखाया दिया। लगे हाथों बीजेपी ने सरकार खासकर प्रधानमन्त्री से स्पष्टीकरण की मांग कर डाली। किसी तरह यूपीए के संकटमोचक प्रणव मुखर्जी बयान देकर मामले की आग को ठण्डा किया। ऐसा लग रहा है कि दूर सबेर ममता <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8/" title="View all posts in कांग्रेस" target="_blank">कांग्रेस</a></span> के लिए ऐसी मुश्किलें खड़ी करती रहेंगी। वह भी तब तक जबतक उनका मिशन बंगाल पूरा नही हो जाता। दरअसल ममता लालगढ़ को अपने कब्जे में करना चाहती है जो वामपन्थियों का मजबूत गड़ है। यहां बड़े पैमाने पर अनुसूचित जाति और जनजाती की जनसंख्या है जिसपर पूरी तरह वामपन्थियों का कब्जा है। मौजूदा समय में वामपन्थी नीतियों के खिलाफ चल रही हवा को वह और आग देना चाहती है ताकि इसकी तपिस कामरेडो के 33 साल के राज के अन्त में आखिरी कील साबित हो। पिश्चम बंगाल में कुल 292 विधानसभा सीटें है। जादुई आंकड़ा 147 का है यानि ममता के अपने मिशन को हकीकत में बदलना है तो 147 सीट तक पहुंचना होगा। इसमें से अकेले लालगढ़ में 41 और 6 लोकसभा सीटें है। 2009 के <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5/" title="View all posts in लोकसभा चुनाव" target="_blank">लोकसभा चुनाव</a></span> में सीपीएम इसमें पांच लोकसभा सीटें पुरूलिया, बांकुरा, झारग्राम, घाटल और मिदनापुर जीतेने में कामयाब रही। टीएमसी में खाते में केवल बीशनपुर सीट आई। जबकि 2004 के <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%b2%e0%a5%8b%e0%a4%95%e0%a4%b8%e0%a4%ad%e0%a4%be-%e0%a4%9a%e0%a5%81%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%b5/" title="View all posts in लोकसभा चुनाव" target="_blank">लोकसभा चुनाव</a></span> में सभी 6 सीटें सीपीएम के पक्ष में थी। 2001 में जब टीएमसी और <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8/" title="View all posts in कांग्रेस" target="_blank">कांग्रेस</a></span> ने गठबंधन में साथ मिलकर चुनाव लड़ा था तो उन्हें 41 में से महज़ 4 सीटों पर सन्तोश करना पड़ा। 2006 के विधानसभा चुनाव में दोनों साथ नही थे मगर कांग्रेस के खाते में 3 सीटें आई जबकि ममता के हाथ कुछ नही लगा। राजनीतिक जानकार ममता की लालगढ़ रैली के पीछे यही एक वजह मानते है।  लोकसभा चुनाव के हिसाब से ममता के पास इस समय 130 विधानसभा सीटें है। यानि पूर्ण बहुमत से 17 सीटें दूर। इन 17 सीटों की कसक ममता लालगढ़ से पूरी करना चाहती है।</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a4%ae%e0%a4%a4%e0%a4%be-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%a8-%e0%a4%aa%e0%a4%b6%e0%a5%8d%e0%a4%9a%e0%a4%bf%e0%a4%ae-%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%be%e0%a4%b2/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>संसाधनों से संपन्न देश और विपन्न जनता</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%94%e0%a4%b0/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%94%e0%a4%b0/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 17 Aug 2010 10:22:16 +0000</pubDate>
		<dc:creator>सुमित श्रीवास्तव</dc:creator>
				<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[AFSPA]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[NREGS]]></category>
		<category><![CDATA[RTI]]></category>
		<category><![CDATA[accountability]]></category>
		<category><![CDATA[anti terrorism]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[court]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[khushhal bharat]]></category>
		<category><![CDATA[magistrate]]></category>
		<category><![CDATA[mid-day-meal]]></category>
		<category><![CDATA[people's politics]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[social justice]]></category>
		<category><![CDATA[youth]]></category>
		<category><![CDATA[एकच्छ्त्र शासक]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[बौद्धिक लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष अदालत]]></category>
		<category><![CDATA[विशेष न्यायालय]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5896</guid>
		<description><![CDATA[लेखिका : &#8211; मांडवी शर्मा भारत एक विशालतम, कृषि प्रधान एवं संसाधनों से संपन्न देश है! पृथ्वी पर अगर किसी अन्य देश या जगह को देखे तो पायगे कि इस... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%94%e0%a4%b0/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h3 id="knol-subtitle" title="Click on the &quot;Edit this knol&quot; button to switch to edit mode and change this field."><span style="color: #0000ff;">लेखिका : &#8211; मांडवी शर्मा</span></h3>
<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-medium wp-image-5907" title="fci india godown" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/08/fci-india-godown-300x189.jpg" alt="" width="300" height="189" />भारत एक विशालतम, कृषि प्रधान  एवं संसाधनों से संपन्न देश है!  पृथ्वी पर अगर किसी अन्य देश या जगह को देखे तो पायगे कि इस जगह के अतिरिक्त न तो कोई स्थान है जहाँ पर सभी प्रकार की जलवायु, प्रकृति संपदा के भंडार , समुद्रो का  समावेश , हिमालय की वादियाँ एवं रेगिस्थान का अदभुत योग एक साथ मिले! प्रथ्वी पर अगर किसी अन्य देश या जगह खोजने निकले तो पायगे की भारतवर्ष कि भोगोलिक   स्थिथि  ऐसी  है जहाँ पर प्रकृति ने सारा नजारा एक साथ समायोजित कर रखा है! प्रकृति का ऐसा संयोग अगर किसी जगह या देश में हो तो उसमे रहने वाले प्राणी की  जीवनचर्या एवं सभ्यता और संस्कृति भी निश्चित रूप से उत्तम होगी. भारत देश की संस्कृति एवं सभ्यता ऐसी है  कि यहाँ पर रहने  वाले प्राणियों  ने  रहन- सहन के ऐसे ढंग  एवं दार्शनिक और आध्यात्मिक विचार अपनाये  है कि वे ही जीवन यापन करने की उत्कृष्ठ तरीके हुए!</p>
<p style="text-align: justify;">अनेको  धर्मो का एक साथ होना यह दर्शाता है कि जीवन का आधार एक ही है , सभी प्राणी एक है और सभी के हितो की कामना करते हुए अपना एहिलोकिक जीवन इस प्रकार से व्यतित करना चाहिए कि उनके आध्यात्मिक विकास मे किसी प्रकार की कठिनाई न हो!  तभी तो हमारे देश की संस्कृति के मूल मंत्र है &#8221; वसुदैव कुटुम्बकम &#8211; सारी  प्रथ्वी  अपना कुटुंब है &#8221;  एवं  &#8220;सर्व भवन्तु सुखिन:&#8221; &#8211; सभी प्राणी के हितो की कामना करना!</p>
<p style="text-align: justify;">हमारे देश में अनेको  प्रकार के  संसाधन   होते  हुए आज भी हम विकासशील है इसके विपरीत   अन्य  छोटे  देश  जहाँ  इन  सभी  संसाधनों के निमित्त मात्र होते हुए भी वे हमारे देश से अग्रणी होते जा रहे है! इसका प्रमुख कारण है हमारी राजनितिक   व्यवस्था एवं देश प्रेम में कमी!</p>
<p style="text-align: justify;">राजनीति ने हमारे समस्त  संसाधनों को ऐसे तहस &#8211; नहस कर रखा है जैसे चावल में घुन लगना!  लोग अपने स्वार्थ के लिए देश के अदभुत संसाधनों का दुरुप्रयोग कर रहे है ! देश की मिटटी , जो कभी अपनी सुघन्ध के लिए जानी जाती थी वो आज के दौर में विलुप्त होती जा रही है. जगह-जगह लोग उपजाऊ भूमि पर निर्माण ऐसे कर रहे है जैसे कोई भूकंप आ रहा हो!  इस  आपा-धापी में लोग देश की अमुल्य निधि को  बर्बाद करने में लगे है!</p>
<p style="text-align: justify;">अगर आप किसी समस्याओं के बारे में सोचे और चिंतन एवं मनन करे तो पायेगे  कि सभी समस्याओं की जड़ है दिशाहीन राजनीति एवं देश के मुद्दे ! जिसके कारण हम सभी प्रभावित  है! किसी भी मुद्दे  एवं समस्याओं मे सोचे तो  केवल एक बात पर आ कर dhyaan  केन्द्रित हो जाता है कि हमारे देश में जो देश प्रेम के प्रति जज्बा  एवं प्यार था वो अब कम होता जा रहा है इसका यह मतलब नहीं है कि देश प्रेम नहीं है. परन्तु देश एवं देश भगतो के प्रति जो आदर , सम्मान होना चाहिए और जो इसके हकदार है  जो हमारी वैश्विकरण के कारण विलुप्त होता जा रहा है. वर्ष में एक दो मौके पर हम उनको यार करने के बाद भूल जाते है, स्कूलों में देश प्रेम एवं देश भगतो के प्रति जो सम्मान एवं पाटयक्रम होना चाहिए जो अब नग़एय होता जा रहा है. हमे अपनी  संस्कृति एवं सभ्यता के बारे में जो नई पीढ़ी को देना चाहिए उससे हम कोसो दूर होते जा रहे है!</p>
<p style="text-align: justify;">दिशाहीन राजनीति के कारण हम देश के  प्रमुख मुद्दे एवं समस्याओं को समझने एवं सुलझाने में अछम होते जा रहे है, राजनीति  में आने वाले लोग किस उद्देश्य से आते इस बात का जनमानस में पता ही नहीं चलता वो केवल अपने  स्वार्थ को पूरा करने में लगे है , देश के प्रति उनकी क्या जिम्मेदारियां है उन्हे पता ही नहीं , सभी लोग पेड़ के फल खाने में लगे है किसी को उसके खाद , पानी आदि के बारे में सोचना तो दूर बस उसकी टहनियों को  काटना ही एकमात्र  उद्देश्य रह गया है.</p>
<p style="text-align: justify;">देश   को अगर विश्व शक्ति बनाना है तो हमको इन सभी बुराइयों को दूर करना ही होगा और ऐसी व्यवस्था करनी होगी जिससे अच्छे विचार एवं चरित के लोग आगे आये जिनका  देश हित में ही सर्वोपरि एकमात्र उद्देश्य हो और जो इस अग्रणी विरासत संरक्षण प्रदान कर सके!</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%a7%e0%a4%a8%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%b8%e0%a5%87-%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%aa%e0%a4%a8%e0%a5%8d%e0%a4%a8-%e0%a4%a6%e0%a5%87%e0%a4%b6-%e0%a4%94%e0%a4%b0/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>अब युद्ध छेड़ना होगा</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%9b%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%9b%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/#comments</comments>
		<pubDate>Tue, 10 Aug 2010 17:32:58 +0000</pubDate>
		<dc:creator>विजय कुमार</dc:creator>
				<category><![CDATA[सुझाव]]></category>
		<category><![CDATA[class-struggle]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[maoist]]></category>
		<category><![CDATA[marks]]></category>
		<category><![CDATA[naxalites]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[terrorism]]></category>
		<category><![CDATA[उग्रवाद]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[नक्सलवादी आंदोलन]]></category>
		<category><![CDATA[नेपाल]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[माओवाद]]></category>
		<category><![CDATA[मार्क्स]]></category>
		<category><![CDATA[राष्ट्रपति]]></category>
		<category><![CDATA[लाल झंडा]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ग संघर्ष]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[सम्पादक उवाच

 capitalist]]></category>
		<category><![CDATA[सर्वहारा]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5718</guid>
		<description><![CDATA[&#8221; संघर्ष, मुठभेड़ और युद्ध &#8220; सामान्य रूप से ये तीनों शब्द लगभग एक से लगते हैं; पर इनमें बड़ा अंतर है। ये अलग-अलग संदर्भ में प्रयोग होते हैं और इसीलिए... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%9b%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-full wp-image-5726" title="Indian-army556" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/08/Indian-army556.jpg" alt="" width="370" height="278" />&#8221; संघर्ष, मुठभेड़ और युद्ध &#8220; सामान्य रूप से ये तीनों शब्द लगभग एक से लगते हैं; पर इनमें बड़ा अंतर है। ये अलग-अलग संदर्भ में प्रयोग होते हैं और इसीलिए इनके नियम भी अलग-अलग ही हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">खेल के मैदान में दो खिलाड़ी या दल जीतने के लिए भिड़ते हैं। खेल में कई बार, और अंतिम समय में तो प्रायः चरम संघर्ष की स्थिति आ ही जाती है। खिलाड़ी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करने का प्रयास करते हैं। अत्यधिक उत्साह के कारण कभी-कभी कुछ नियम विरुद्ध कार्य (फाउल) भी हो जाते हैं। ऐसे में निर्णायक (रेफरी) गलती करने वाले को चेतावनी देता है और कभी-कभी उसे मैदान से बाहर भी भेज देता है। कई बार तो खेल में हार-जीत भी इसी कारण हो जाती है।</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन संघर्ष के इस दौर के बाद भी खिलाड़ियों के मन में एक दूसरे के प्रति द्वेष या शत्रुता नहीं होती, क्योंकि वे खेल के नियम और अनुशासन से बंधे होते हैं। इसलिए कोई भी जीते या हारे; पर अंततः खेल भावना ही विजयी होती है।</p>
<p style="text-align: justify;">दूसरे शब्द मुठभेड़ की यदि व्याख्या करें, तो यह विरोधियों में होती है। इसका कारण वैचारिक भी हो सकता है और धन, धरती या अन्य कोई स्वार्थ भी। इसमे दोनों पक्ष एक-दूसरे को शारीरिक, मानसिक या आर्थिक हानि भी पहुंचाते हैं; लेकिन इन दोनों के ऊपर देश का संविधान है। यदि कोई न्यायालय की शरण ले, तो गलती करने वाले को दंड भुगतना पड़ता है। कहीं-कहीं लोग सरकार की शरण में जाने की बजाय अपनी जातीय या क्षेत्रीय पंचायत में चले जाते हैं। वह भी अर्थदंड, गांव या जाति बहिष्कार आदि सजा देकर मामले को निबटा देती है।</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन युद्ध इन सबसे बहुत बड़ी चीज है। युद्ध करने वाले न संविधान को मानते हैं और न ही नैतिकता या खेल भावना को। उनका उद्देश्य तो दूसरे पक्ष को अधिकाधिक शारीरिक, मानसिक और आर्थिक हानि पहुंचाकर उनका मनोबल तोड़ना और उनके जन-धन पर अधिकार करना होता है। दो देशों में होने वाले युद्ध इसी श्रेणी में आते हैं। सामान्यतः यदि कोई दूसरे की हत्या कर दे, तो उसे आजीवन कारावास या फांसी होती है, जबकि युद्ध में शत्रुओं को मारने वाले को सम्मानित किया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस दृष्टि से हम अपने देश के वर्तमान घटनाक्रम को देखें। क्या नक्सलवादी कम्युनिस्टों द्वारा देश में मचाया जा रहा तांडव युद्ध से कम है; क्या मुस्लिम आतंकियों द्वारा किये जा रहे जेहादी विस्फोट युद्ध नहीं हैं; क्या घुसपैठ द्वारा जनसंख्या बढ़ाकर भारत को दारुल इस्लाम बनाने का षड्यन्त्र युद्ध नहीं है; क्या कश्मीर घाटी से सब हिन्दुओं को खाली हाथ भगाने के बाद उसे पूर्णतः पाकिस्तान बना देने का प्रयास युद्ध नहीं है; इनके पीछे चीन हो या पाकिस्तान या फिर अमरीका; क्या येन-केन-प्रकारेण इनका सिर कुचलना अपराध है ?</p>
<p style="text-align: justify;">दुनिया भर में इसका उत्तर चाहे जो हो; चाणक्य और भर्तृहरि के नीति श्लोक चाहे जो कहें; भगवान श्रीकृष्ण ने गीता और महाभारत में चाहे जो कहा और किया हो; पर हमारी परम सेक्यूलर सरकारों का दृष्टिकोण इस बारे में सदा आत्मघाती ही रहा है। इसीलिए ये समस्याएं घटने की बजाय तेजी से बढ़ रही हैं। यानि ‘मर्ज बढ़ता गया, ज्यों-ज्यों दवा की।’</p>
<p style="text-align: justify;">बात बिलकुल साफ है कि बंगलादेशी घुसपैठिये, पाक प्रेरित आतंकवादी और नक्सलवादी कम्युनिस्ट हमारे शत्रु हैं। वे लगातार भारतवासियों को मार रहे हैं। हमारी पुलिस, सी.आर.पी.एफ, बी.एस.एफ और सेना लड़ तो रही है; पर युद्ध घोषित न होने से उनके हाथ बंधे हैं। अतः हमें भी इनके विरुद्ध युद्ध घोषित कर सेना को खुली छूट देनी चाहिए। अब काम पुलिस या अर्धसैनिक बलों से नहीं चलेगा। यदि मौका मिले, तो 1965, 1971 या करगिल दोहराना सेना के लिए कठिन नहीं है। वह कुछ ही दिन में शत्रुओं को समूल नष्ट कर सकती है।</p>
<p style="text-align: justify;">एक बात और भी ध्यान देने योग्य है कि युद्ध के समय सीमावर्ती क्षेत्र को भी खाली करा लिया जाता है। इसके बाद भी यदि कोई वहां रहे, तो उसकी हानि की जिम्मेदार सेना नहीं होती। यही स्थिति इस युद्ध में भी है। जो लेखक, पत्रकार, वकील या साधुवेशी लोग शत्रुओं के लिए सहानुभूति या आर्थिक साधन जुटा रहे हैं, उन्हें समझना होगा कि इस युद्ध में अपने जानमाल की हानि के जिम्मेदार वही हैं, शासन या सेना नहीं।</p>
<p style="text-align: justify;">दिल्ली, मुंबई या कोलकाता के वातानुकूलित क्लब और होटलों में गोष्ठी करने वाले कुछ भ्रष्ट बुद्धिवादियों के मन भले ही अपने इन साथियों के लिए धड़कते हों; पर आम नागरिक के मन में इनके लिए कोई सहानुभूति नहीं है। उसकी दृष्टि में ये सब एक ही थैली के चट्ट-बट्टे हैं। उसका बस चले, तो अपराधियों के साथ इन तथाकथित बुद्धिवादियों का भी एनकाउंटर कर दे।</p>
<p style="text-align: justify;">लेकिन बलिहारी है भारत देश की, जहां देशभक्तों का अपमान और सेक्यूलरों का सम्मान होता है। कश्मीर घाटी में 32 दांतों के बीच जीभ की तरह काम कर रहे सैनिक एक ओर पत्थरबाजों और आतंकियों के निशाने पर हैं, तो दूसरी ओर शासन-प्रशासन के। वे गोली चलाएं, तो प्रदेश और देश का शासन उन्हें गरियाता है, और न चलाएं तो पत्थर और गोलीबाज उनकी जान ले लें। गुजरात को देखें, तो नापाक पाकिस्तान में बैठे आकाओं के निर्देश पर चलने वाले अपराधियों को मारकर राज्य को आतंक से मुक्त कराने वाले जेल में हैं, जबकि उन माफिया गिरोहों के समर्थक मंूछों पर ताव दे रहे हैं। ऐसे में कौन भविष्य में इन आतंकवादियों के विरुद्ध युद्ध करेगा ?</p>
<p style="text-align: justify;">इस पीड़ा को कोई पंजाब को पाकिस्तान प्रेरित खालिस्तानी आतंकवादियों से मुक्त कराने वाले पुलिस अधिकारी के.पी.एस गिल से पूछे। वे बताते हैं कि घोर अंधकार के उन काले दिनों में पंजाब के मुख्यमंत्री बेअंत सिंह का वरदहस्त उनकी पीठ पर था। उन्होंने खूंखार आतंकियों की हिट लिस्ट बनाकर अपने साथियों को खुली छूट दी; पर आतंक समाप्ति के बाद उन जांबाज पुलिस वालों पर ही मुकदमे ठोक दिये गये। मजबूरी में कुछ ने आत्महत्या कर ली और कुछ आज भी जेल में सड़ रहे हैं। यह युद्ध को संघर्ष या मुठभेड़ समझने का ही दुष्परिणाम है।</p>
<p style="text-align: justify;">इसलिए यदि हमें देश को इन घुसपैठियों, नक्सलवादी कम्युनिस्टों और इस्लामी आतंकियों से मुक्त कराना है, तो इनके विरुद्ध खुला युद्ध छेड़ना होगा। छुटपुट संघर्ष, मुठभेड़ या वार्ताओं से काम बनने वाला नहीं है। भारत की जनता हर बार की तरह इस बार भी तन, मन और धन से सहयोग करेगी; पर एक बार शासन वोट राजनीति की मानसिकता से ऊपर उठकर युद्ध घोषित तो करे।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%ae%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%b6-%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5-%e0%a4%85%e0%a4%ad%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a8/%e0%a4%b8%e0%a5%81%e0%a4%9d%e0%a4%be%e0%a4%b5/%e0%a4%85%e0%a4%ac-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%a6%e0%a5%8d%e0%a4%a7-%e0%a4%9b%e0%a5%87%e0%a4%a1%e0%a4%bc%e0%a4%a8%e0%a4%be-%e0%a4%b9%e0%a5%8b%e0%a4%97%e0%a4%be/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>दस टकिये पत्रकारों का दर्द</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/%e0%a4%a6%e0%a4%b8-%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/%e0%a4%a6%e0%a4%b8-%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d/#comments</comments>
		<pubDate>Sat, 31 Jul 2010 08:17:19 +0000</pubDate>
		<dc:creator>संजय कुमार</dc:creator>
				<category><![CDATA[चौथा खंभा]]></category>
		<category><![CDATA[मीडिया-संसार]]></category>
		<category><![CDATA[RTI]]></category>
		<category><![CDATA[controversy]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[film-tv]]></category>
		<category><![CDATA[inflation rate]]></category>
		<category><![CDATA[market]]></category>
		<category><![CDATA[media]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[price increasing]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[social justice]]></category>
		<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[मंहगाई]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5503</guid>
		<description><![CDATA[दूसरों के दुखःदर्द व जुल्म सितम के लिए रोजाना लड़ाई लड़ने वाले कलम के सिपाहियों के हक के लिए कोई खड़ा नहीं दिखता है। समाज में व्याप्त बराबरी-गैरबराबरी से पत्रकारों... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/%e0%a4%a6%e0%a4%b8-%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-medium wp-image-5504" title="AA040013" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/freelance-journalist-of-india-i-246x300.jpg" alt="" width="246" height="300" />दूसरों के दुखःदर्द व जुल्म सितम के लिए रोजाना लड़ाई लड़ने वाले कलम के सिपाहियों के हक के लिए कोई खड़ा नहीं दिखता है। समाज में व्याप्त बराबरी-गैरबराबरी से पत्रकारों को भी दो-चार होना पड़ता है। खास तौर से उनकी माली स्थिति पर नजर डाले तो एक ऐसा बराबरी-गैरबराबरी सामने आता है जो चैंकाता तो है ही साथ ही सोचने के लिए मजबूर भी करता है। सवाल है मीडिया में काम करने वाले कस्बा से लेकर महानगर तक के पत्रकारों की माली स्थिति का ? और उनके साथ जो शोषण हो रहा है उसके पक्ष में खड़ा होने का ? जहां एक पत्रकार दस से बारह घण्टे काम करता है और एवज में एक सरकारी आदेशपाल से भी कम तनख्वाह पाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">मीडिया हाउसों में कार्यरत मीडियाकर्मी जहां एक ओर मीडिया के चकाचैंध ग्लैमर से प्रभावित हैं। वहीं एक ऐसा वर्ग भी है जो अखबार में काम करते हुए जीने के लिए संघर्ष कर रहा है। कहने का तात्पर्य यह है कि जहां एक ओर मीडियाकर्मियों को दस हजार से एक लाख तनख्वाह मिलती है तो वहीं ऐसे भी मीडियाकर्मी है जिन्हें 15 सौ रुपये महीने पर सुबह से देर शाम तक खबरों के पीछे भागना पड़ता है। जाहिर सी बात है कि जैसा काम वैसा दाम की परिपाटी मीडिया हाउसों में कुलाचे मार रहा है। अनुभव और नाम के सहारे हजारों की तनख्वाह पाने वाला बड़ा पत्रकार भी उतना ही श्रम करता है जितना एक आम पत्रकार। बल्कि मुफ्सिल का पत्रकार तो और ही ज्यादा काम करता है। मुफ्सिल में घटने वाली सुबह की खबर पर वह लगातर बना रहता है। उसे डाक संस्करण से लेकर देर रात के संस्करण के लिए खबर को डेवलप कर लगातार भेजना पड़ता है।</p>
<p style="text-align: justify;">पत्रकारों के बीच एक सामान वेतन नहीं हो सकता लेकिन जिंदगी जीने के लिए जितना चाहिये वह तो मिलनी ही चाहिये? श्रमजीवी पत्रकारों के वेतन को लेकर सरकारी और गैरसरकारी स्तर पर प्रयास चले, लेकिन मीडिया हाउस के मालिकों ने नौकरी की परिभाषा ही बदल दी। संपादक हो या पत्रकार अमूमन सभी की बहाली अब अनुबंध के आधार पर हो रही है। जब इच्छा हुई रख लिया और निकाल दिया। वहीं बड़े नाम इसका फायदा भी उठा रहे हैं। जहां दूसरे मीडिया हाउस ने ज्यादा पैसे दिये, तुंरत पहले को छोड़, दूसरे को पकड़ लिया। वहीं सबसे बुरा हाल निचले स्तर के पत्रकारों का है वे हमेषा हासिये पर रहते हैं। मजेदार बात यह है कि अब मीडिया हाउस जब किसी को अपने  यहाँ रखता है तो उससे एक बौंड भरवाता है जिसमें उसका पेशा  पत्रकारिता नहीं बल्कि खेती बाड़ी, व्यवसाय आदि भरवाया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">दूसरों के शोषण-उत्पीड़न के खिलाफ आवाज उठाने वाले स्वयं पत्रकार अपनी आवाज उठाने से वंचित रह जाते हैं ? देखा जाये तो पत्रकारों की जिंदगी रोज संघर्षों से भरी है। अमूमन हर मीडिया हाउसों द्वारा पत्रकारों का आर्थिक और शारीरिक शोषण जारी है। लेकिन विरोध की गुंज सुनाई नहीं पड़ती है। सबसे बड़ा मुद्दा आर्थिक  शोषण का है। चैंकने वाला तथ्य यह है कि छोटे और बड़े मीडिया हाउसों में 15 सौ रूपये के मासिक पर पत्रकारों से 10 से 12 घंटे काम कराया जाता है। यहीं नहीं उन पत्रकारों के पास मीडिया हाउस द्वारा कोई अनुबंध पत्र / नियुक्ति पत्र नहीं दिया जाता है। प्रबंधन की मर्जी जब नौकरी पर रखे या जब चाहे नौकरी से निकाल दे। भुगतान दिहाड़ी मजदूरों की तरह मास्टर रौल जैसा है। महीने के आखिर में एक मास्टर रौल पर हस्ताक्षर करवाया जाता है और भुगतान के बाद उसे फाड़कर फेंक दिया जाता है। वेतन के मामले में पीड़ित कलम के सिपाहियों का हाल सरकारी आदेशपालों से भी बुरा है।</p>
<p style="text-align: justify;">देश  के राज्यों में अधिकांश  युवा पत्रकार अपने कैरियर की शुरुआत मामूली सी तनख्वाह 1500 रुपये पर करते हैं। अगर देखा जाए तो दिहाड़ी मजदूरों को जितनी मजदूरी एक महीने में दी जाती है, उससे कम पत्रकारों को दी जाती है। बिहार से प्रकाशित कई अखबारों में कमोवेश स्थिति ऐसी ही है। वहीं कस्बाई पत्रकारों को अखबार मीडिया हाउस की ओर से अधिकतम 3000 रुपये प्रति माह दिये जाते हैं। जबकि बड़े पैमाने पर हजार 12 सौ रूपये मासिक पर रखा जाता है। उन्हें समाचार संकलन के अलावा अखबार के लिए विज्ञापन भी जुटाना होता है। पहले सेंटीमीटर या कालम के हिसाब से भुगतान दिया जाता था लेकिन अब प्रति खबर या मासिक भुगतान किया जाता है। बिहार के कस्बा और छोटे जगहों पर कार्यरत पत्रकारों ने बताया कि अखबार को आंदोलन, बदलाव आदि का नारा देने वाले बड़े समाचार पत्र समूह द्वारा एक स्ट्रींगर को प्रति समाचार 10 या 12 रु. दिये जाते हैं, चाहे खबर एक कालम की हो या चार कालम की। भुगतान तय रहता हैं वही 10 या 12 रूपये प्रति खबर। वहीं सुपर स्ट्रींगर को प्रति माह दो से तीन हजार दिया जाता है। जहां तक छोटे समाचार पत्र का सवाल है तो वे कस्बा और छोटे जगहों पर कार्यरत पत्रकारों को एक पैसा भुगतान नहीं करते हैं हां उनके समाचार जरूर छपते हैं। साथ ही उन्हें विज्ञापन लाने को कहा जाता है जिस पर कमीशन दिया जाता है। जबकि अखबार के मुख्य कार्यालयो में कार्यरत स्ट्रींगर और सुपर स्ट्रींगर को तीन हजार से 14 हजार रूपये प्रतिमाह दिये जाते हैं। संपादक/प्रबंधक तनख्वाह तय करते हैं। वहीं चैंकाने वाला तथ्य यह है कि अमूमन हर अखबार कस्बा या छोटे शहरों में किसी को भी अपना प्रतिनिधि रख लेते हैं उसे खबर के लिए कोई भुगतान नहीं किया जाता है। बल्कि वह जो विज्ञापन लाता है उस पर उसे कमीषन दिया जाता है। अखबार का संपादक/प्रबंधक जानते हैं कि वह बेगार पत्रकार अखबार के नाम पर अपनी दुकान चलायेगा ? जो उसकी मजबूरी बन जाती है आखिर  दिन भर अखबार के लिये बेगार करेगा तो खायेगा क्या ?  बिहार के सासाराम में एक छोटे समाचार पत्र के लिए रिपोर्टिंग करने वाला एक पत्रकार अपना नाम छुपाते हुए कहता हैं कि हालात यह है कि पैसा मिले या न मिले किसी मीडिया हाउस से जुड़ने के लिए पत्रकारों की लम्बी कतार है। बिना पैसे और विज्ञापन के कमीशन पर काम करने वाले पत्रकार मौजूद है तो भला क्यों कोई मासिक वेतन पर किसी को रखे ? यही हाल देश के अन्य क्षेत्रों का है।</p>
<p style="text-align: justify;">मजेदार बात यह है कि इसमें वे लोग भी शामिल हैं जो पत्रकारों के हित के लिए लम्बी-चैड़ी बातें करते हैं। तर्क दिया जाता है कि पत्रकारिता के पेशे  में ऐसे लोग आ गये है जो तिकड़मी, अनस्कील्ड और कहीं नौकरी नहीं लगी तो पत्रकार बन गये आदि आदि। सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर उन्हें रखता कौन है ? अखबार ही न ? और आज अखबार संपादक कम प्रबंधक अधिक चला रहा है।</p>
<p style="text-align: justify;">प्रख्यात पत्रकार स्व.प्रभाष जोशी ने भारतीय मीडिया द्वारा चुनाव के दौरान पैसे लेकर खबर छापने की परिपाटी के खिलाफ जो मुहिम छेड़ी थी, उसकी गुंज संसद और चुनाव आयोग में सुनाई दी है। पिछले लोकसभा चुनाव के दौरान देशभर में ये गुंज सुनाई दी थी। अब संसद में भी इसकी गुंज सुनाई पड़ी है। राज्यसभा में सांसदों ने पैसे लेकर मीडिया द्वारा खबर छापने की खतरनाक बढ़ती प्रवृति के खिलाफ गंभीर चर्चा की। पैसे लेकर खबर छापने की मीडिया के सोच के खिलाफ केवल सांसद ही नहीं बल्कि पिछले ही दिनों  पूर्व मुख्य निर्वाचन आयुक्त नवीन चावला ने भी चिंता व्यक्त की और इसे गलत करार भी दिया। पैसे लेकर खबर छापने की प्रथा कोई नई नहीं है और इसपर हो-हल्ला तब मचा जब स्व. प्रभाष जोशी ने पूरे देश भर में मीडिया के इस सोच के प्रति जन आंदोलन चला दिया था। गत लोकसभा चुनाव और कुछ राज्यों में हुए विधानसभा चुनाव के दौरान यह खुलकर सामने आ गया था। मीडिया ने पैसे लेकर खुलेआम खबर छापने का सिलसिला जारी रखा। यह हो-हल्ला लोकतंत्र के निर्माण में, लोकतंत्र के ही एक खंभे द्वारा किया गया। इस मसले पर पत्रकार भी दो खेमें में नजर आये।</p>
<p style="text-align: justify;">मीडिया ने अपने को बाजारवाद के चंगुल में डालकर संभवतः मीडिया को व्यवसायिक नजरिये से परोस दिया। हो-हल्ला तो चुनाव के दरम्यिन नेताओं द्वारा अपने फेवर में पैसे देकर खबर को प्रकाशन प्रसारण से हुआ। लेकिन गुपचुप तरीके से नये-नये हथकंडों के जरिए खबर छापने/प्रसारित करने का सिलसिला जारी है। इसमें दस टकिया पत्रकारों को मोहरा बनाया जा रहा है। यह चैंकाने वाला तथ्य है या नहीं, यह नहीं कहा जा सकता लेकिन बिहार के कई जिलों में तैनात पत्रकारों से खबर छापने के बदले अखबारों की प्रतियां बिकवाई जाती है। इसमें बड़े मीडिया गु्रप शामिल हैं। बिहार के कई जिलों के अखबारों से जुड़े पत्रकारों ने बताया कि किसी भी कार्यक्रम या खबर को छापने के लिए संबंधित संस्था या व्यक्ति से पैसे न लेकर उससे खबर छापने के एवज में अखबार की प्रतियां खरीदने पर दवाब बनाया जाता है। अखबार द्वारा अपने संवाददाताओं पर विज्ञापन के लिए दबाव बनाने की बात पुरानी हो चुकी है लेकिन प्रतियां बिकवाने का नया फंडा निकाल लिया गया हैं। यानी खबर छपने के बदले अखबार की प्रतियां खरीदों ? बदले में अखबार मालिक अपनी तिजोरी भर रहे हैं और दस टकिया पत्रकार जहां था वहीं खड़ा हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">मीडिया में इस तरह की परिपाटी का जन्म लेना मीडिया के लिए भयावह है और जिस तरह की सोच मीडिया के अंदर बढ़ती जा रही है वह काफी खतरनाक है। पत्रकार को पत्रकार न रख, उसे सेल्स एजेंट के तौर पर मीडिया हाउस इस्तेमाल कर रहा है।</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%bf%e0%a4%a8%e0%a5%87%e0%a4%ae%e0%a4%be-%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be-%e0%a4%ac%e0%a5%8d%e0%a4%b2%e0%a5%89%e0%a4%97-%e0%a4%ab%e0%a4%bf%e0%a4%b2%e0%a5%8d/%e0%a4%ae%e0%a5%80%e0%a4%a1%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a4%be/%e0%a4%a6%e0%a4%b8-%e0%a4%9f%e0%a4%95%e0%a4%bf%e0%a4%af%e0%a5%87-%e0%a4%aa%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8b%e0%a4%82-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%a6%e0%a4%b0%e0%a5%8d/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>0</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>मुलायम-कल्याण मैत्री अध्याय का लाभ कांग्रेस को</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 12:49:20 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रमेश भट्ट</dc:creator>
				<category><![CDATA[यूपी-बिहार]]></category>
		<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[bhajpa]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[mulayam singh]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5490</guid>
		<description><![CDATA[बीते लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में कांग्रेस ने लोकसभा की 22 सीटें जीतकर सबकों चौंका दिया। शायद खुद कांग्रेस के लोगों के लिए यह जीत किसी अचम्भे से कम नही... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-medium wp-image-5491" title="congress (1)" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/congress-1-226x300.jpg" alt="" width="226" height="300" />बीते लोकसभा चुनाव में उत्तरप्रदेश में <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8/" title="View all posts in कांग्रेस" target="_blank">कांग्रेस</a></span> ने लोकसभा की 22 सीटें जीतकर सबकों चौंका दिया। शायद खुद <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%b8/" title="View all posts in कांग्रेस" target="_blank">कांग्रेस</a></span> के लोगों के लिए यह जीत किसी अचम्भे से कम नही थी। मगर जीत तो जीत है चाहे उसके लिए कोई भी कारण गिनाए जाए। कांग्रेसियों के इसके पीछे राहुल फैक्टर काम करता दिखाई दिया। पिछले कुछ सालों में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी ने उत्तरप्रदेश को अपनी राजनीतिक प्रयोगशाला बनाया है। देश को सबसे ज्यादा प्रधानमन्त्री देने वाले इस राज्य में कांग्रेस का ग्राफ 1989 के बाद लगातार गिरता चला गया। एक समय जो मुस्लिम समुदाय कांग्रेस का प्रबल समर्थक था, बाबरी विध्वंस के बाद वह उससे दूर होता चला गया। मगर 2009 के लोकसभा चुनाव में वह वापस कांग्रेस की तरफ आता दिखाई दिया। यही कारण है कि कांग्रेस को न सिर्फ वोट फीसदी बल्कि सीट का भी फायदा मिला। उपर से मुलायम कल्याण मैत्री अध्याय का लाभांश सीधे-सीधे कांग्रेस के खाते में गया। बहरहाल कारण जो भी हो कांग्रेसी 2012 में यूपी के दुर्ग में झण्डा गाड़ने का सपना अकेले दम पर देखने लगे है। अब सवाल यह कि क्या यह ख्याली पुलाव है या वाकई इस बात पर दम है। दरअसल पिछले कुछ महिनों में यूपी में हुए 16 विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के छोली में 2 सीटें ही गई। जबकि सबसे अहम मुददा यह रहा कि फिरोजाबाद सीट पर 1800 वोट लाने वाली कांग्रेस मात्र 6 महिने में 350000 वोट के साथ सपा के गड़ में सेंध लगा गई। इस चुनाव ने मुलायम को एक सबक भी दिया की जनता ज्यादा दिन तक परिवारवाद और मनमाने फैसले के बोझ तले नही दबी रह सकती। कांग्रेस पार्टी ने इस समय युद्ध स्तर पर सदस्यता अभियान चला रखा है। हाल के आंकड़ों से यह पता लगता है कि यह अभियान के तहत कांग्रेस से जुड़ने वाले लोगों की संख्या 20 लाख से बड़कर 60 लाख के आसपास पहुंच गई है। इस साल यूपी में पंचायत चुनाव तय है। 2011 में शहरी निकाय के चुनाव और 2012 में विधानसभा चुनाव है। इसके बाद 2014 के लोकसभा चुनाव। बहरहाल सबसे पहले राहुल गांधी यूपी में कांग्रेसी कार्यकर्ताओं में नए जोश का संचार कर रहे है। दलितों के घर भोजन कर रहे है ताकि माया की दलित जमीन को दरका सके। इधर मायावती की सामाजिक संरचना को तोड़ना किसी भी पाट्री के लिए नामुमकिन दिख रहा है। मुलायम सिंह मुसलमानों से कल्याण को गले लगाने के लिए माफी मांग चुके है। देखना दिलचस्प यह होगा कि यह माफीनामा वापस मुस्लिमों को उनकी ओर खींच पायेगा या नही। इधर अजीत सिंह की पार्टी का कांग्रेसीकरण होना मुश्किल लग रहा है। इस काम में सबसे बडी चुनौति उनके खुद के बेटे है जो मथुरा लोकसभा सीट से सांसद हैं। बहरहाल देश को सबसे बड़े राज्य जहां से 404 विधायक चुने जाते है। 80 सांसदों दिल्ली चुन कर आते है। वह राजनीतिक लिहाज से कितना महत्वपूर्ण है आप और हम समझ सकते है।</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%ae%e0%a5%81%e0%a4%b2%e0%a4%be%e0%a4%af%e0%a4%ae-%e0%a4%95%e0%a4%b2%e0%a5%8d%e0%a4%af%e0%a4%be%e0%a4%a3-%e0%a4%ae%e0%a5%88%e0%a4%a4%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80-%e0%a4%85%e0%a4%a7%e0%a5%8d/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
		<item>
		<title>अगर सरकारें अप्रासंगिक हो गयीं हैं&#8230;तो</title>
		<link>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9/</link>
		<comments>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9/#comments</comments>
		<pubDate>Fri, 30 Jul 2010 12:23:54 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[संसद मार्ग]]></category>
		<category><![CDATA[AFSPA]]></category>
		<category><![CDATA[Education]]></category>
		<category><![CDATA[NREGS]]></category>
		<category><![CDATA[RTI]]></category>
		<category><![CDATA[accountability]]></category>
		<category><![CDATA[anti terrorism]]></category>
		<category><![CDATA[bhajpa]]></category>
		<category><![CDATA[bjp]]></category>
		<category><![CDATA[class-struggle]]></category>
		<category><![CDATA[congress]]></category>
		<category><![CDATA[controversy]]></category>
		<category><![CDATA[corruption]]></category>
		<category><![CDATA[democracy]]></category>
		<category><![CDATA[india]]></category>
		<category><![CDATA[jayram viplav]]></category>
		<category><![CDATA[khushhal bharat]]></category>
		<category><![CDATA[maoist]]></category>
		<category><![CDATA[market]]></category>
		<category><![CDATA[marks]]></category>
		<category><![CDATA[mid-day-meal]]></category>
		<category><![CDATA[naxalites]]></category>
		<category><![CDATA[people's politics]]></category>
		<category><![CDATA[politics]]></category>
		<category><![CDATA[religion]]></category>
		<category><![CDATA[social justice]]></category>
		<category><![CDATA[terrorism]]></category>
		<category><![CDATA[youth]]></category>
		<category><![CDATA[अंधेर नगरी]]></category>
		<category><![CDATA[उग्रवाद]]></category>
		<category><![CDATA[कांग्रेस]]></category>
		<category><![CDATA[नक्सलवादी आंदोलन]]></category>
		<category><![CDATA[बौद्धिक लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[भारतनामा]]></category>
		<category><![CDATA[भ्रष्टाचार]]></category>
		<category><![CDATA[माओवाद]]></category>
		<category><![CDATA[मार्क्स]]></category>
		<category><![CDATA[लाल झंडा]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतंत्र]]></category>
		<category><![CDATA[लोकतान्त्रिक भारत]]></category>
		<category><![CDATA[वर्ग संघर्ष]]></category>
		<category><![CDATA[शासन प्रणाली]]></category>

		<guid isPermaLink="false">http://www.janokti.com/?p=5485</guid>
		<description><![CDATA[लेखक : भूतनाथ &#8221; विकिलिक्स &#8221; द्वारा अमेरिकी कार्यवाइयों के भंडाफ़ोड किये जाने और अमेरिकी सरकार द्वारा इसे संघीय व्यवस्था का उल्लंघन बताये जाने पर एक प्रश्न अपने-आप ही उठ खडा... <a class="meta-more" href="http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9/">Read more <span class="meta-nav">&#187;</span></a>]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<h2 style="text-align: right;"><strong><span style="color: #0000ff;">लेखक : भूतनाथ</span></strong></h2>
<p style="text-align: justify;"><img class="alignright size-medium wp-image-5486" title="Indian Gov &amp; Politics" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2010/07/Indian-Gov-Politics-259x300.jpg" alt="" width="259" height="300" />&#8221; विकिलिक्स &#8221; द्वारा अमेरिकी कार्यवाइयों  के भंडाफ़ोड किये जाने और अमेरिकी सरकार द्वारा इसे संघीय व्यवस्था का उल्लंघन बताये जाने पर एक प्रश्न अपने-आप ही उठ खडा होता है कि क्या सिर्फ़ सरकारें ही व्यवस्था को बनाये रखती हैं,बाकि सब तंत्र उसका उल्लघंन ही करते हैं??</p>
<p style="text-align: justify;">जबसे हमने लिखित इतिहास को पढा और उसके माध्यम से सब कालों में &#8220;सरकारों&#8221;का जो आचरण जाना और समझा है उससे तो ठीक उल्टा ही प्रमाणित होता है,अब तक के लिखित इतिहास के अनुसार हमने यही देखा है कि तरह-तरह की सरकारों ने किस-किस प्रकार के &#8220;सुनियोजित-कुकर्म&#8221; किये हैं और जब विभिन्न व्यक्तियों या किन्ही सामाजिक संगठनों ने उनके विरुद्द किसी भी प्रकार की आवाज़ उठायी या आंदोलन भी किया तो किस प्रकार से इस &#8220;तथाकथित &#8221; सरकारों ने उनका गला घोंटा है या कि अपनी सेना और अपने अधीन तंत्र के द्वारा किस प्रकार की हिंसा के द्वारा कुचला है और मज़ा तो यह भी है कि यह सब आज इस तथाकथित लोकतांत्रिक कहे जाने वाले &#8220;सभ्य&#8221; युग में भी हो रहा है,अंतर सिर्फ़ इतना है कि ऐसा आचरण करने वाली लोकतांत्रिक कही जाने वाली सरकारों का ढंग और कम्युनिस्ट सरकारों का ढंग एक-दूसरे थोडा अलग है.</p>
<p style="text-align: justify;">इससे कभी-कभी ऐसा भी प्रतीत होता है कि लोकतांत्रिक देशों में लोक-तंत्र का अर्थ महज इतना ही होता है कि नागरिक अपनी मनमानी करें और अगर सरकार को यह नागवार गुजरे तो वह अपनी मनमानी करे&#8230;फर्क सिर्फ़ इतना है कि सरकार की मनमानियां एक भयानक अत्याचार से भी भीषण हो सकती हैं,बाद में भले वह हटा दी जाये और बाद वाली सरकार उससे भी जाहिल साबित हो&#8230;..</p>
<p style="text-align: justify;">अब तक यही समझा जाता रहा है कि लोगों द्वारा चुनी गयी सरकारों में लोगों के हित ज्यादा सुरक्षित होते हैं,हालांकि ज्यादातर इतिहास इस बात की न सिर्फ़ तस्दीक नहीं करता बल्कि इसे नकारता भी है.सरकार के लोग,उपर से नीचे तक चाहे वो कोई भी हों,खुद के कर्म को उचित और आम नागरिक के कर्मों को ज्यादातर गलत बताते हैं&#8230;.यह गलत होना गैर-कानूनी होने से लेकर देशद्रोह होना तक भी हो सकता है,यहां तक कि इसी तर्ज़ पर आज तक तमाम लोकतांत्रिक देशों के कानून उनके खुद के ही संविधान की धज्जियां उडाते दिखायी देते हैं&#8230;..और मज़ा यह है कि जिन कानूनों के बिना पर आम लोगों को कडी-से-कडी सज़ा तक दे दी जाती है&#8230;.उन्हीं कानूनों की चिथडे उनके रखवाले हर वक्त करते हुए दिखायी देते हैं, मगर चुंकि हर आदमी अपनी ही समस्याओं से भरा उन्हें निपटाने में पगलाया रहता है&#8230;..उसे गरज़ ही नहीं होती इस सबको देखने की [जब तक कि वो खुद नहीं इस सब झमेले में फ़ंस जाये ]&#8230;.और सिर्फ़ और सिर्फ़ इसीलिए यह सब चलता रहता है&#8230;..लोग आंख मूंद कर अपना-अपना जीवन व्यतीत करते रहते हैं&#8230;.और सरकारी दुनिया में बिल्ली के भाग से छींका टूटता रहता है&#8230;..उस टूटे हुए छींके से ये सरकारी लोग [बिल्लियां]मलायी मार-मार कर खाते रहते हैं&#8230;.यहां तक कि कोई आम नागरिक भी अगर इस मलायी को चाटना चाहे तो उसे निस्संदेह किसी ना किसी सरकारी हाथ की मदद का ही सहारा लेना होता है&#8230;.मज़ा यह कि कल को अगर यह सब उजागर भी होता है तो इसका ठीकरा हर हालत में उस गैर-सरकारी व्यक्ति या समूह के माथे पर ही फ़ूटना होता है&#8230;.अगर सरकारी हाथ कुछ ज्यादा ही काला हो गया हो तो तो सरकार खुद आगे बढ्कर उसे बचाया करती है&#8230;क्युंकि सरकार में भी तो ना जाने कितने ही पक्ष होते हैं,जिन्होने इस मलायी को चाटने में अपना भी मूंह मारा होता है&#8230;&#8230;</p>
<p style="text-align: justify;">इसका सीधा मतलब आप यह भी लगा सकते हो कि सरकार का दामन हमेशा साफ़ ही होता है&#8230;हम जैसे बेईमान और भ्रष्ट लोग ही सरकार का मूंह काला किये जाते हैं[सरकार के साथ मूंह काला नहीं करते....!!!]और इसीलिये सरकार का विरोध करने वाले&#8230;..सरकार अलग सोचने वाले&#8230;सरकार से बिल्कुल ही भिन्न नीति रखने वाले&#8230;.और सरकार के गलत कार्यों का विरोध करने वाले ना सिर्फ़ उसकी [गोपनीय]संघीय व्यवस्था का उल्लंघन करने वाले समझे जाते हैं,अपितु देशद्रोही तक भी साबित किये जा सकते हैं&#8230;&#8230;प्रत्येक सरकारी व्यक्ति,चाहे वह कितना ही अदना-सा&#8230;.किसी भी सामान्य समझदारी का गैर-जानकार&#8230;या कि बिल्कुल ही टुच्ची सी समझ रखने वाला भी क्यों ना हो&#8230;..उसके अधिकार.. उसकी ताकत&#8230;.उसका अहंकार&#8230;.उसका रुतबा&#8230;उसकी कडकता&#8230;.उसका रूआब&#8230;.और सबसे बढ्कर ना जाने किन अनजान जगहों से आने वाला अथाह धन उसे हमसे इतर साबित करते हैं&#8230;.मगर वह देश-द्रोही कभी नहीं कहला सकता&#8230;.अगर कभी कहला भी गया तो यह माना जाता है कि जरूर ही उसके खिलाफ़ कोई गहरी राजनीतिक साजिश रची गयी है&#8230;और इसके पीछे अवश्य ही विपक्षी राजनीतिक दल है&#8230;.और इस प्रकार उस गद्दार व्यक्ति या समूह इस तरह के तमाम देश-द्रोही कार्यों के प्रति आंख मूंद ली जाती है&#8230;.और ऐसा क्यों ना हो&#8230;..आखिर उस हमाम में सभी शरीक जो हैं&#8230;..</p>
<p style="text-align: justify;">सरकार के अनुदान से चलने वाला बहुतेरा मीडिया भी इस हमाम का ही वासी ही होता है&#8230;.इस मलायी का चटोरा&#8230;..सो एक तरफ़ मीडिया का एक हिस्सा उस गलत व्यक्ति/समूह या सरकार के इन कारनामों को उजागर कर रहा होता है&#8230;.वहीं&#8230;.यह मीडिया-विशेष अपनी पूरी ताकत और जद्दोजहद के संग उन गलत कार्यों में बराबर का भागीदार बन कर सरकार का वकील बनकर उन तमाम गलत पक्षों के पक्ष में तमाम निराधार और घटिया दलीलें पेश करता है&#8230;.जिन्हें हम बेसिर-पैर के  कुतर्क साबित कर सकते हैं&#8230;.और समय-समय पर ऐसा करते भी हैं&#8230;&#8230;मगर ऐसा कब तक चले&#8230;..और क्योंकर चले&#8230;..??सरकारों का कार्य क्या सिर्फ़ मनमानी करना है&#8230;.??सरकारें क्या किसी और लोक से उतरी हैं और किसी के भी प्रति उत्तरदायी  नहीं हैं&#8230;..??और आम आदमी का कोई और काम नहीं है क्या,जो वह सरकारों और उससे जुडे तमाम लोगों पर नज़र रखे&#8230;.और अपना महत्वपूर्ण काम-धाम छोड देने की कीमत चुका कर &#8220;ऐसे लोगों” की पोल खोजता चले&#8230;..??सरकारें एयरकंडीशंड रूमों में बैठ कर तमाम उल्टे-सीधे निर्णय ले ले&#8230;.फिर आम आदमी या संगठन  सडक पर आंदोलन करता चले&#8230;..??जब सब राय आम आदमी को देनी है&#8230;.और सरकार को उसके हर किये हुए कर्म का अच्छा-बूरा बतलाना है&#8230;..तो फिर ऐसे निकम्मे लोगों को सरकार बनाने का न्योता ही क्यों देना है&#8230;??</p>
<p style="text-align: justify;">क्या सरकार होने का मतलब यही होता है&#8230;..कि आप मनमानी करते रहो&#8230;..मनमाने निर्णय लेकर अपने ही नागरिकों की जान सांसत में डालते रहो&#8230;.उनका जीवन जीना हराम करते रहो&#8230;..??अपनी ऊंची अट्टालिकायें खडी करते रहो&#8230;..सब तरह का नाजायज काम उन्हीं नियमों के छेदों की आड में करते रहो&#8230;जिसकी बिना पर तुम किसी दूसरे को जेल में झोंक देते हो&#8230;.???और मीडिया-कोर्ट और सभी तरह के संगठन सरकार के पीछे भोंपू और लाठी लेकर दौडते फ़िरें&#8230;.???समझ नहीं आता कि आखिर सरकार है तो आखिर है क्या&#8230;.??सरकारें हम बनाते हैं हममे से कुछ लोगों को अपना प्रतिनिधि बनाकर हमारे बीच सब किस्म की व्यवस्था कायम करने के लिये&#8230;.वो भी अपने खर्च से हुए चुनाव से और अपने ही खर्च पर दिये जाने वाले उन हज़ारों नेताओं और तमाम सरकारी लोगों को वेतन देकर&#8230;..और सब सरकार बनाते ही सिर्फ़ &#8220;अपनी व्यवस्था &#8221; कायम करने लग जायें&#8230;.तो उन्हें वापस कैसे बुलाया जाये&#8230;..और उनके लिये किस तरह की सज़ा तय हो&#8230;अब सिर्फ़ इसी एक बात पर विचार करना है हमारे समाज रूपी तंत्र को&#8230;.अगर सरकारें अप्रासंगिक हो गयीं हैं&#8230;तो उसी की वजह से न सिर्फ़ यह कु-व्यवस्था फ़ैलती है&#8230;.बल्कि नस्लवाद-आतंकवाद नाम नासूर भी यहीं से पनपता है&#8230;.पल्लवित होता है&#8230;..जिस तरह अपराधियों का इलाज लाठी-डंडे-कोडे तथा अन्य तरह की सज़ायें तय हैं&#8230;..उसी तरह यही सजायें क्या इन लोगों के लिये नहीं तय की जा सकती&#8230;.अगर माननीय न्यायालय कानूनों में छेद की वजह से उचित फ़ैसला कर पाने में अक्षम है&#8230;.तो फिर जनता को ही क्यों नहीं इसका ईलाज करना चाहिये&#8230;.!! मुझे उम्मीद है कि यह अनपढ-गरीब और सतायी हुई जनता एकदम ठीक फैसला लेगी&#8230;..हो सकता है कि सभ्य लोगों को उसका फैसला &#8220;जंगल का कानून सरीखा लगे&#8230;&#8221;मगर अगर सब तरफ़ जंगली लोग ही हों&#8230;और आम जनता के अधिकारों का बर्बरतापूर्वक हनन कर रहे हों तो आप किस तरह उनका इलाज सो कोल्ड सभ्य कानूनों द्वारा कर सकते हैं&#8230;.!!</p>
<p style="text-align: justify;">पानी सर से अत्यधिक उपर जा चुका है&#8230;.जनता को अब फैसला लेना ही होगा&#8230;.कि उसे क्या चाहिये&#8230;..एक अमानवीय और किसी भी प्रकार की उचित सोच से रहित सरकार&#8230;&#8230;और उसकी नाक तले ऊंघ रहा निकम्मा प्रशासन&#8230;&#8230;कि इन सबसे मुक्ति&#8230;..अगर दूसरे रास्ते की मन में है&#8230;.तब तो आगे बिल्कुल रद्दोबदल कर डालिये&#8230;&#8230;अपने बीच से एकदम नये लोग निकालिये&#8230;.और उन्हें चेतावनी देकर ही संसद और विधान सभाओं में भेजिये&#8230;..और अभी&#8230;&#8230;अभी के लिये यही कहुंगा कि इस वर्तमान को अभी-की-अभी उखाड फेंकिये&#8230;..और यह आप सब&#8230;.हम सब&#8230;.यानि कि आम जनता ही कर सकती है&#8230;..क्योंकि <span class='wp_keywordlink_affiliate'><a href="http://www.janokti.com/tag/%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0/" title="View all posts in भ्रष्टाचार" target="_blank">भ्रष्टाचार</a></span>ियों को सज़ा देने में हमारा कानून&#8230;..और हमारा संविधान भी पस्त हो चुका है&#8230;..!!!</p>
<p style="text-align: justify;">&#8211;</p>
]]></content:encoded>
			<wfw:commentRss>http://www.janokti.com/%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/%e0%a4%85%e0%a4%97%e0%a4%b0-%e0%a4%b8%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%85%e0%a4%aa%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b8%e0%a4%82%e0%a4%97%e0%a4%bf%e0%a4%95-%e0%a4%b9/feed/</wfw:commentRss>
		<slash:comments>1</slash:comments>
		</item>
	</channel>
</rss>
