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आधुनिकता बनाम पौराणिकता

आधुनिकता बनाम पौराणिकता

2 शंकर दत्त फुलारा / 2010/05/26 10:55 am

आज वैज्ञानिक जो भी शोध कर रहे हैं और उसके निष्कर्षों पर पहुँच रहे हैं, ‘वह सब हमारे पौराणिक शास्त्रों में पहले से ही वर्णित है’। पर; क्योंकि आज आसुरी

प्लीज़ , उसे मेरा बाप मत कहो….

प्लीज़ , उसे मेरा बाप मत कहो….

3 पूजा सिंह आदर्श / 2010/05/21 1:52 pm

उसे मेरा बाप मत कहो,वो हैवान है ,वो पापा कहलाने के लायक नहीं है ,उसने मुझे,अपनी बेटी को अपनी हवस का शिकार बनाना चाहा,अपनी इज्ज़त बचाने के लिए मेरे पास

अतिथियों का बलात्कार !

अतिथियों का बलात्कार !

0 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/04/19 9:33 am

भारत हमारी संपूर्ण (मानव) जाति की जननी है तथा संस्कृत यूरोप के सभी भाषाओं की जननी है : भारतमाता हमारे दर्शनशास्त्र की जननी है , अरबॊं के रास्ते हमारे अधिकांश

शिक्षकों की गुणवत्ता में गिरावट

शिक्षकों की गुणवत्ता में गिरावट

3 जयराम "विप्लव" / 2010/02/21 3:07 pm

विश्वव्यापी आर्थिक संक्रमणकाल में जिसे देखो वही देश के हालात का रोना लेकर बैठा हुआ है। बौद्धिक जुगाली के केंद्र दिल्ली में तो विमर्श की कोई कमी नहीं है। हर

सभ्यता का कचरा- राजेन्द्र माथुर

सभ्यता का कचरा- राजेन्द्र माथुर

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/02/08 10:44 pm

सम्यता की एक महान समस्या कचरा है। कचरा सर्वत्र है। वह खेत में है और कारखानों में है। जब खेतों में प्राकृतिक खाद पड़ती थी, तब खेत में रासायनिक खाद

ब़ृहदेश्‍वर मंदिर चोल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है

ब़ृहदेश्‍वर मंदिर चोल स्थापत्य कला का उत्कृष्ट नमूना है

0 जनोक्ति डेस्क / 2009/11/15 2:19 pm

ब़ृहदेश्‍वर मंदिर चोल वास्‍तुकला का शानदार उदाहरण है, जिनका निर्माण महाराजा राजा राज (985-1012.ए.डी.) द्वारा कराया गया था। इस मंदिर के चारों ओर सुंदर अक्षरों में नक्‍काशी द्वारा लिखे गए