शिक्षा का वास्तविक ध्येय
0वर्तमान शिक्षण में बालकों के मस्तिष्क में ठूंस-ठूंसकर भरी गई जानकारियों को तीन घंटे में उत्तरपुस्तिका में उगल देना होता है। जितनी अधिक जानकारी विद्यार्थी दे सकता है, उतना ही
विश्वव्यापी आर्थिक संक्रमणकाल में जिसे देखो वही देश के हालात का रोना लेकर बैठा हुआ है। बौद्धिक जुगाली के केंद्र दिल्ली में तो विमर्श की कोई कमी नहीं है। हर
नीतीश कुमार आजकल ख़ुशी से कहते फ़िर रहे हैं कि उनके राज में गरीब -गुरवा की बेटियां सरकारी ड्रेस में सायकिल पर सवार होकर स्कूल जाती हैं . अब का
वर्तमान शिक्षण में बालकों के मस्तिष्क में ठूंस-ठूंसकर भरी गई जानकारियों को तीन घंटे में उत्तरपुस्तिका में उगल देना होता है। जितनी अधिक जानकारी विद्यार्थी दे सकता है, उतना ही
विश्वव्यापी आर्थिक संक्रमणकाल में जिसे देखो वही देश के हालात का रोना लेकर बैठा हुआ है। बौद्धिक जुगाली के केंद्र दिल्ली में तो विमर्श की कोई कमी नहीं है। हर
नीतीश कुमार आजकल ख़ुशी से कहते फ़िर रहे हैं कि उनके राज में गरीब -गुरवा की बेटियां सरकारी ड्रेस में सायकिल पर सवार होकर स्कूल जाती हैं . अब का