जाति आधारित जनगणना पर कुछ विचार
5जाति आधारित जनगणना को लेकर बुद्धिजीवी वर्ग भले ही दो भागों में बंट गया हो लेकिन हमारे नेता लगभग एकजुट ही हैं | और मंत्रिमंडल की हरी झंडी भी मिल
हर दस साल बाद होने वाली जनगणना का कुछ अंश पूरा हो चुका है, जबकि मुख्य काम (संदर्भ बिन्दु) नौ से 28 फरवरी, 2011 तक होगा। इससे संबंधित दो विषय
इस देश में जाति के आधार पर जनगणना करने और नहीं करने पर काफी समय से बहस चल रही है। अनेक विद्वान लेखकों ने जाति के आधार पर जनगणना करवाने
जाति जनगणना के बगैर लेखक :- शिवदयाल कई बार ऐसा लगता है जैसे भारत इकतीस राज्यों का नहीं, बल्कि छह हजार जातियों का संघ है। जाति को भारतीय समाज का एकमात्र
जाति आधारित जनगणना को लेकर बुद्धिजीवी वर्ग भले ही दो भागों में बंट गया हो लेकिन हमारे नेता लगभग एकजुट ही हैं | और मंत्रिमंडल की हरी झंडी भी मिल
हर दस साल बाद होने वाली जनगणना का कुछ अंश पूरा हो चुका है, जबकि मुख्य काम (संदर्भ बिन्दु) नौ से 28 फरवरी, 2011 तक होगा। इससे संबंधित दो विषय
इस देश में जाति के आधार पर जनगणना करने और नहीं करने पर काफी समय से बहस चल रही है। अनेक विद्वान लेखकों ने जाति के आधार पर जनगणना करवाने
जाति जनगणना के बगैर लेखक :- शिवदयाल कई बार ऐसा लगता है जैसे भारत इकतीस राज्यों का नहीं, बल्कि छह हजार जातियों का संघ है। जाति को भारतीय समाज का एकमात्र
नई दिल्ली | जनगणना में जाति को शामिल करने के विरोध में “सबल भारत” द्वारा संचालित “मेरी जाति हिंदुस्तानी आंदोलन” ने आज एक विशाल मार्च का आयोजन किया| सैकड़ों, छात्र
” भारत की जनगणना 2011 ” काफी चर्चा में है | जाती के आधार को लेकर राजनीतिक बबाल मचा हुआ है जबकि अभी तक कोई निश्चित फैसला सरकार की ओर
जातिगत जनगणना के बहाने इन दिनों जाति पर ही बहस छिड़ी है। अच्छी बात है। पर विरोध हो रहा है सिर्फ जातिगत जनगणना को लेकर। धरना प्रदर्शन हो रहे हैं,
फूलवा को यकीन नहीं हो रहा था, जब उसे पंचायत के गांव में सरकारी योजना मिड-डे-मील के लिए बच्चों का खाना बनाने वाले रसोईये के तौर पर सरकारी मुलाजिम बनाया
समाज की स्थापना के समय से ही जाति की अवधारणा किसी न किसी रूप में मौजूद रही थी, भल ही हम इसे वर्ग के रूप में स्वीकार करते हों। पूर्व
देश भर में जाति आधारित जनगणना पर जोरदार बहस चल रही है | समर्थन और विरोध के स्वर मुखर हो रहे हैं | एक ओर ” मेरी जात हिन्दुस्तानी ”