अयोध्या का हाल और सवाल , कौन देगा जबाव ?
0‘अयोध्या में मंदिर वहीं, मस्जिद नहीं, बाबरी ढांचा कहीं नहीं।’ ठीक है, ठीक है, इस देश के बहुसंख्यक लोग भी यही चाहते हैं कि राम-मंदिर बने लेकिन साहब किस-किस को
राजनीति चीज है ऐसी जो कुछ भी करवाए ! सच में सत्ता का खेल बहुत ही घिनौना है और इसे और भी बदतर बनाया है जनता के राजनीतिक अंधभक्ति ने
बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा-जद(यु) गटबंधन के अनेक बड़े नेता द्वारा बिहार में किये गए विकास व उसके बदलते तस्वीर पर टिप्पणी कर राजनितिक लावह उठाने में लगे
बिहार मे चुनावी शंखनाद बज चुका है और अब हमारे नेतागण को एक बार फिर से जनता की अदालत मे पेश होना है । उसी जनता की अदालत मे जो
‘अयोध्या में मंदिर वहीं, मस्जिद नहीं, बाबरी ढांचा कहीं नहीं।’ ठीक है, ठीक है, इस देश के बहुसंख्यक लोग भी यही चाहते हैं कि राम-मंदिर बने लेकिन साहब किस-किस को
बिहार में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इसे देख कर कुछ दिनों से बिहार में हर दिन राजनीति में कुछ-न-कुछ हो रहा है। वोट की राजनीति करने
चुनाव नजदीक तो नेता नजदीक। जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट कार्ड की। उन्होंने अपने कार्यकाल में किये कामों की रिपोर्ट
बिहार में 11.500 करोड़ रुपयों के वित्तीय अनियमितता की बात सीएजी की रपट में सामने आई है. ये हेराफेरी का मामला वर्ष 2002 से 2008 के बीच का हैं .पटना
अशोक सम्राट की नगरी पाटलिपुत्र, गौतम बुद्ध एवं महाबीर की ज्ञान स्थली, गुरु गोविन्द सिंह की जन्म-स्थली, राजनीति के सबसे बड़े ज्ञाता चाणक्य की धरती, महात्मा गाँधी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की कर्म भूमि पर जो माननीय विधायकों
एक के बाद एक सात गमलों का काम तमाम कर दिया ..ऐसी हुंकारे भर रही थी मानो साक्षात देवी काली प्रलय मचाने विधान मंडल में उतर गई हों । अचानक
आज दिनांक २०/०७/२०१० दिन मंगल वार को बिहार विधान सभा का तापमान एकाएक ऐसा बढ़ा कि हमारे माननीय सदस्य गण अपना आपा खो दिए और बिहार के चहरे पर एक
पहले चारा चोर गद्दी चोर और अब खजाना चोर गद्दी चोर…….शर्म..शर्म..शर्म और कुछ नही । ये है हाल बिहार विधानसभा का । अचानक जनता के रहनुमा बने इन तांडवकारी विधायकों