चुनाव और चुनौती
0चुनाव में दो तरह की चुनौती होती हैं एक तो जनता को रिझाने की और दूसरी बिखरते कुनबे को समेटने की। नेता और दल सही मायनों में वही कहलाता है
दौडा-दौडा भागा भागा सा….जी हां आज बिहार की राजनीति के हाल की चाल लगभग इसी तरह की हो चुकी है । चुनाव से पहले जितनी पैंतरेबाजी हो सकती है सब
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषक उहापोह की स्थति में हैं | कौन दल जीतेगा या कौन हारेगा ? बात केवल इतनी सी नहीं है | असल मुद्ददा है
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गये हैं | इसी के मद्देनजर भाजपा चुनाव समिति की दो दिवसीय बैठक पटना में हो रही है
चुनाव में दो तरह की चुनौती होती हैं एक तो जनता को रिझाने की और दूसरी बिखरते कुनबे को समेटने की। नेता और दल सही मायनों में वही कहलाता है
दौडा-दौडा भागा भागा सा….जी हां आज बिहार की राजनीति के हाल की चाल लगभग इसी तरह की हो चुकी है । चुनाव से पहले जितनी पैंतरेबाजी हो सकती है सब
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर राजनीतिक विश्लेषक उहापोह की स्थति में हैं | कौन दल जीतेगा या कौन हारेगा ? बात केवल इतनी सी नहीं है | असल मुद्ददा है
बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी तैयारियों में जुट गये हैं | इसी के मद्देनजर भाजपा चुनाव समिति की दो दिवसीय बैठक पटना में हो रही है
बिहार में चुनाव का शंखनाद होने के बाद जाति के अपने-अपने समीकरण की चर्चा जोर पकडने लगी है । अब विकास की बात बिहार भी करता है लेकिन जाति के
राजनीति चीज है ऐसी जो कुछ भी करवाए ! सच में सत्ता का खेल बहुत ही घिनौना है और इसे और भी बदतर बनाया है जनता के राजनीतिक अंधभक्ति ने
बिहार में होने वाले आगामी विधानसभा चुनाव में भाजपा-जद(यु) गटबंधन के अनेक बड़े नेता द्वारा बिहार में किये गए विकास व उसके बदलते तस्वीर पर टिप्पणी कर राजनितिक लावह उठाने में लगे
बिहार मे चुनावी शंखनाद बज चुका है और अब हमारे नेतागण को एक बार फिर से जनता की अदालत मे पेश होना है । उसी जनता की अदालत मे जो
जनाब मुख्यमंत्री महोदय, आप के वादों पर पिछले चुनाव में मेरे परिवार से आप को 9 वोट दिए गये,इस उम्मीद पर कि मेरा नहीं तो मेरे गाँव का विकास होगा |
बिहार में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव को लेकर कांग्रेस और जनता दल (युनाइटेड) के बीच विकास कार्यो का श्रेय लेने की होड़ शुरू हो गई