Post Tagged with: "लोकतान्त्रिक भारत"

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

सड़ता अनाज सड़ता तंत्र

1 शिरीष खरे / 2010/11/04 5:56 pm

सरकार चंद पूंजीपतियों के लिए रियायतों का अंबार लगा रही है और करोड़ों लोगों की खाद्य सुरक्षा के लिए उसके पास न अनाज है और न पैसे का कोई बंदोबस्त.

उच्च न्यायालय का फैसला और विवाहित बेटियां

उच्च न्यायालय का फैसला और विवाहित बेटियां

5 प्रीति श्रीवास्तव / 2010/11/04 5:42 pm

- प्रीति वैसे तो ये पढ़ कर सचमुच बहुत अच्छा लगा की अब विवाहित बेटियां भी अपने पिता की ज़गह अपने घर को चला सकती है और अपने कर्तव्यों का

लोकतंत्र में लोक उलझा तंत्र से

लोकतंत्र में लोक उलझा तंत्र से

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/03 6:45 pm

श्याम नारायण रंगा ’अभिमन्यु भारत एक लोकतांत्रिक देश है। विश्व के सबसे बडे इस लोकतंत्र मे तंत्र का निर्माण लोक द्वारा किया जाता है और जनता का जनता के द्वारा

हहाती जनसँख्या पर चुप्पी ठीक नहीं

हहाती जनसँख्या पर चुप्पी ठीक नहीं

0 आम आदमी / 2010/11/03 11:06 am

POPULATION SHOULD BE CONTROLLED ANYWAY पिछली जनगणना के बाद जनसंख्या संबंधी आधिकारिक आँकड़े जारी किये गये, राजनीतिक दलों ने अपने-अपने नजरिये से इसे देखा और अपने हिसाब से व्याख्या की।

कांग्रेस ,नक्सलवाद और गरीबी

कांग्रेस ,नक्सलवाद और गरीबी

1 जनोक्ति डेस्क / 2010/11/02 9:24 pm

मुरारी सिंह कंडारी 1947 से 1975 तक बिहार में कांग्रेस की सत्ता रही, इसी बीच दलितों को सरकारी जमीन के पट्रेट तो दिए गए पर उस जमीन पर कोई दलित

दूध का दूध और पानी का पानी

दूध का दूध और पानी का पानी

0 पवन कुमार अरविंद / 2010/10/28 12:36 pm

कांग्रेस शासित राजस्थान पुलिस के आतंकवाद निरोधी दस्ते (एटीएस) ने अजमेर धमाके की जाँच पूर्ण किए बिना ही इन्द्रेश कुमार का नाम उछाल दिया है। इन्द्रेश कुमार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ

जम्मू में राष्ट्रीयता उफान पर

जम्मू में राष्ट्रीयता उफान पर

2 जनोक्ति डेस्क / 2010/10/27 5:13 pm

जम्मू -कश्मीर विलय को लेकर मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला का विवादास्पद बयान आने के बाद मंगलवार को जम्मू संभाग के विभिन्न दलों व सामाजिक संगठनों ने इस मुद्दे पर अमरनाथ आदोलन

क्या उमर अब्दुल्ला प्री -५३ का मतलब जानते हैं ?

क्या उमर अब्दुल्ला प्री -५३ का मतलब जानते हैं ?

0 जनोक्ति डेस्क / 2010/10/27 2:05 pm

[pullquote] कश्मीर पर अरुंधती और गिलानी के साथ उमर अब्दुल्ला के गैरजिम्मेदाराना बयान पर जनोक्ति के पास एक पाठक का मेल आया है | ” कश्मीर की आवाज़ ” नाम

कश्मीर की कहानी

कश्मीर की कहानी

1 जयराम "विप्लव" / 2010/10/25 10:10 pm

सालों से कश्मीर की धरती भारत माँ के सपूतों के खून से लाल होती आई है | लाशों की ढेर में ढँक गया है धरती का स्वर्ग | घाटी से

पूर्ण-विलय के उपरांत जनमत संग्रह का औचित्य

पूर्ण-विलय के उपरांत जनमत संग्रह का औचित्य

1 पवन कुमार अरविंद / 2010/10/25 8:01 pm

जम्मू-कश्मीर में आत्मनिर्णय या जनमत संग्रह कराने की मांग का कहीं कोई औचित्य नहीं है। ये मांगें किसी भी प्रकार से न तो संवैधानिक हैं और न ही मानवाधिकार की