” भारत की जनगणना 2011 ” एक नज़र
0” भारत की जनगणना 2011 ” काफी चर्चा में है | जाती के आधार को लेकर राजनीतिक बबाल मचा हुआ है जबकि अभी तक कोई निश्चित फैसला सरकार की ओर
सिर्फ मातम-पुर्सी से काम नहीं चलने वाला है।हिन्दी भारत वर्ष में राज-काज की भाषा है,हमारे सम्मान की प्रतीक है,तो सभी प्रांतीय व स्थानीय भाषायें हिन्दी की बहनें।भारत-वर्ष में बोली जाने
सितम्बर हिन्दी के वार्षिक श्राद्ध का महीना है। हर संस्था और संस्थान इस महीने में हिन्दी दिवस, सप्ताह या पखवाड़ा मनाते हैं और इसके लिए मिले बजट को खा पी
“चल रे मटकी टम्मक टू ….” को “जॉनी जॉनी यस पापा…..” के सामने न जाने कितनी दफा शर्मिंदा होना पड़ा , अ-अनार के सामने ए-ऐपल्ल का, हमेशा से ही भारी
” भारत की जनगणना 2011 ” काफी चर्चा में है | जाती के आधार को लेकर राजनीतिक बबाल मचा हुआ है जबकि अभी तक कोई निश्चित फैसला सरकार की ओर
भारत-वर्ष में पुरातन काल में नारी शक्ति का अत्यधिक महत्व था।यहाँ की संस्कृति में नारी को एक महान शक्ति के रूप में आदर-सम्मान दिया जाता रहा है।वैदिक काल में इस
बिहार में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इसे देख कर कुछ दिनों से बिहार में हर दिन राजनीति में कुछ-न-कुछ हो रहा है। वोट की राजनीति करने
कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य पदार्थों के उत्पादन से सम्बंधित है.मानव सभ्यता के इतिहास में कृषि की खोज को इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि इसे नवपाषाणकालीन क्रांति
चुनाव नजदीक तो नेता नजदीक। जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट कार्ड की। उन्होंने अपने कार्यकाल में किये कामों की रिपोर्ट
बिहार में 11.500 करोड़ रुपयों के वित्तीय अनियमितता की बात सीएजी की रपट में सामने आई है. ये हेराफेरी का मामला वर्ष 2002 से 2008 के बीच का हैं .पटना
34. घटनास्थल पर तुरन्त न्याय 34.1 मानवाधिकार आयोग और महिला आयोग में न्यायाधीशों को नियुक्त करते हुए इन्हें न्यायिक शक्तियाँ प्रदान की जाएँगी और निम्न तीन प्रकार के मामलों में
56 से घटकर 30 क्विंटल रह गई यानि ये दावे पूरी तरह गलत हैं, झूठे हैं कि उपज बढ़ाने के लिए रासायनिक खेती की जरूरत है। सच तो यह है
33. ऊर्जा 33.1 सोलर सिस्टम और सौर ऊर्जा से चालित उपकरणों (बल्ब, पंखा, चूल्हा, इत्यादि) के निर्माण के लिए पाँच बड़े-बड़े कारखाने (पाँच अंचलों में एक-एक) स्थापित किए जायेंगे; जहाँ
देशपाल सिंह पंवार हिंदुस्तान की आजादी से पहले विंस्टन चर्चिल ने कहा था- आजादी मिलने पर हिंदुस्तान के नेता निकम्मे, घूसखोर और लुटेरे साबित होंगे। जुबान के मीठे और दिल