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	<title>JANOKTI : जनोक्ति :  राज-समाज और जन की आवाज &#187; लोकतान्त्रिक भारत</title>
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		<title>मूक समाज में जान की कीमत सिर्फ 27 रूपए  !</title>
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		<pubDate>Mon, 26 Sep 2011 06:10:10 +0000</pubDate>
		<dc:creator>पूजा शुक्ला</dc:creator>
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		<description><![CDATA[जान की कीमत लगा दी गई है, मात्र 27 रुपये, इससे सस्ती कीमत पर आपको जान इस महंगाई के युग में कही नहीं मिलेगी. यहाँ इस जूनून के बाज़ार में जान सुलभ है, यहाँ हर तरह की जान मिल जायेगी, तरह ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><strong><a href="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/09/planning-commission-32-rupee.jpg"><img class="alignright size-large wp-image-19884" title="planning commission 32 rupee" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/2011/09/planning-commission-32-rupee-500x366.jpg" alt="जान की कीमत"width="400" height="366" /></a>जान की कीमत लगा दी गई है, मात्र 27 रुपये</strong>, इससे सस्ती कीमत पर आपको जान इस महंगाई के युग में कही नहीं मिलेगी. यहाँ इस जूनून के बाज़ार में जान सुलभ है, यहाँ हर तरह की जान मिल जायेगी, तरह तरह से ली जाने वाली जान बन्दुक-गोली, तलवार, त्रिशूल, मजहबी जूनून, रोड रेज, या दहेजी सब उपलब्ध है. इस बाज़ार में संवेदना, पीड़ा दुर्लभ कमोडिटी है तब ऐसे में जुनूनी करें भी तो क्या करें व्यापार तो करना ही है ना, सो जान का कारोबार ही सही.<br />
इस मार्केट में किसी ने ये नियम नहीं लिखा की की जान लेना पाप है, जान की कीमत लगाना गुनाह है. इस बाज़ार में इंसानियत शर्मिंदा होना किसी को मालूम नहीं, यहाँ इंसानियत के वजूद को अभी जन्म लेना है. अभी वक़्त आना है की किसी बेवा, माँ या मजलूम बच्चो के बारें में सोचा जा सके, असल में इनकी  तिजारत शुरू ही वहां से होती है जहा इन जैसे मजलूमों की मजबूरियाँ का आगाज़ होता है .<br />
कुछ लोग चाँद सी उंचाई को तय कर चुकें है और कुछ नैनो तकनीकि जैसे सूक्ष्म हो गयें है पर शुक्र है, इस जुनूनी बाज़ार पर इसका कोई असर नहीं पड़ा है. यहाँ आज भी जुनूनी जात-पात , ऊँच-नीच , धर्म-बिरादरी, झूठी शान-रिवायत के आदिम युग में है जहाँ इंसान ही इंसान का शिकार कर रहा है और सरलता से जाने मुहैय्या करा रहा है. &#8216;मानवता&#8217; नामक केमिकल लोचा का भी किसी जुनूनी पर इसका कोई असर नहीं होता. इन पर जब भी मुश्किलें या जूनून  सवार होता है ये बंदूक ले स्कूलों में फायरिंग कर देतें है या चुपकें से कही धमाके कर हजारो को बिलखता छोड़ निकल जाते है, इन्हें तो बस जाने चाहियें. इनकें यहाँ अभी भी गीता कुरान या इंसानी हकूको के मतलब समझायें जाने जरूरी नहीं समझे गए है. यहाँ कोई किताब ये नहीं कहती की एक बेगुनाह को मारना पूरी इंसानियत को मारने के समान है.<br />
लाख बुरे होने पर भी ,स्याह मौंजू होने पर भी ये जुनूनी उन समाजो से बेहतर है जो इन सब बातों को पढने-लिखने, सुनने और मानने का दावा करतें है पर इंसान की जान को रद्दी समझतें है. ऐसे सफेदपोश जुल्म करते है की इनका समाज बदस्तूर हिटलर, लादेन, सद्दाम, प्रभाकरण दे सकें. ये सफेदपोश है अभिजय्त्य है सत्तासुधा प्राप्त है, संपन्न है, स्वार्थ परक है, दलीलों में माहिर है, ये लोग अपने गुनाह नज़रंदाज़ कर जुनूनियों पर जंगली होने का आरोप लगाते है. दरअसल ये ज्यादा बडे गुनाहगार है ये सब संपन्नता मद में चूर है, जब कोई हादसें का शिकार हो छटपटाता सड़क पर पड़ा रहता है तब ये सब चुप खड़ें रहतें है, वे चुप रहतें है जब अपाहिज कन्या, रेल कम्पार्टमेंट में रुसवा होती है या जब कभी कोई &#8216;सनकी भीड़&#8217; मजलूमों पर टूट पड़ती है. ये चुप रहतें है, क्योंकि वे भगत सिंह या संदीप उन्नीकृष्णन नहीं, वे केवल &#8216;सभ्य&#8217; है.<br />
झाँके, निहारे अपने को आइने में, और पूछे अपने आप से, क्यों हज़ारो की भीड़ महिलाओं को नग्न कर घुमाती है, क्यूँ पुलिस अधिकारी एक विक्षिप्त को पीटता है और हम ताली बजाकर मजा लेतें है, कैसे हमारी आंखों के सामने, वर्दी वाले गुंडे महिलाओं को भी खदेड़-खदेड़ कर लाठियां भांजतें हुए, बर्बर तांडव करतें हैं और हमारी आँखें वो मंजर देखने के बाद आद्र या रक्तिम नहीं होती, कैसे कोई हथियार लहराकर रंगदारी कर चलता बनता है और हम घरो में दुबके रहतें है. क्या वाकई हमारी इंसानियत सुप्त है, क्या हम स्वयं ही इन्सनियात के मायने समझ नहीं पाएं है अगर ये सही है तो फिर क्यों हम उस जुनूनी को इंसानियत का दुश्मन कहें, जो इंसानी जान को २७ रुपये के मोल में तौलता है. जुनूनियो  ने तो बुद्ध गाँधी के अहिंसा को नहीं पढ़ा ना ही अहिंसा व् रक्षा के मर्म को नहीं जाना, उन लोगो ने इंसान के काम आना इंसानियत का पाठ भी नहीं पढ़ा है, ये सब तो हमने पढ़ा है पर कमाल है सब कुछ  देखने-सुनने के बाद दिमाग में कोई केमिकल लोचा नहीं होता. बर्गर पिज्जा पेस्ट्री के फास्ट युग में शायद न्याय की लम्बी प्रक्रिया का डर या नए हालातो के लिए नए इंतजामो की आस हमें संगदिल बनाएं रखती है.  क्या उस टोल पर गाड़ियों की कतार में कोई इंसान नहीं था, क्या भरी टोल पर हर कोई जुनूनी था जानवर था या सारे अंधे वहां गाड़ी चला रहे थे, ये वे सवाल है, जिनको सभ्य समाज टाल नहीं सकता, वे कौन से गुनाह थे जिसकी सजा उस तीन महीने की सुहागन को मिली जो अब विधवा कहलाने को अभिशप्त होगी. क्या जुनूनी से सभ्य समाज ज्यादा पाक साफ़ है? इस ख़ामोशी से वाबस्ता जुनूनी वहशीपन, निरंकुश मदांध हो जिस तरह सरे आम अपना सिक्का चला रहा है उससे तो लग रह है की मानो वे खामोश सभ्य समाज के मुंह पर तमाचा मारकर कह रहा हो की तुम लोग ख़ाक जीतें हो, यूँ ही डर से खामोश ओट में छिपें रहतें हो, इस दुनिया में तुम्हारे क़ानून का अब राज नहीं, हमारी सत्ता चलती है, हक की आवाज़ नहीं, ये दुनिया तुम्हारी बस्ती नहीं, हमारा बाज़ार है, हम जैसे चाहें जान की कीमत लगा सकतें है. तुम यूँ ही कहतें हो जान अनमोल है, अगर वो बेशकीमती होती तो क्या तुम उसे बचातें नहीं. दुनिया भर की कचहरी भरी है ज़मीन जायदाद झंझटों में, पर कोई इस अनमोल चीज़ पर बोलता नहीं. गोया तुम्हारें सफेदपोश उजालों की जानिब कहाँ जिन्दगी है, दहकती सुबह ,खौलता आसमाँ है, तुम्हारी खामोशी की रोशनी में बहुत बहुत आस जी चुकी हैं</p>
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		<title>भ्रष्टाचार में खूब तरक्की कर रहा है भारत  !</title>
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		<pubDate>Tue, 31 May 2011 14:28:29 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जितेन्द्र कुमार नामदेव</dc:creator>
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			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-16437" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ad%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a4%be%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%96%e0%a5%82%e0%a4%ac-%e0%a4%a4%e0%a4%b0%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%95/attachment/corruption-in-india-bhrashtachar-2/"><img class="alignright size-full wp-image-16437" title="corruption in india-bhrashtachar" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/corruption-in-india-bhrashtachar.jpg" alt="" width="290" height="224" /></a>स्वतंत्रता के बाद हमारे देश ने हर क्षेत्र में तरक्की की है। स्वतंत्र भारत के स्वतंत्र नागरिकों ने अपने कीर्तिमान हर क्षेत्र में रचे हैं। हमारे कीर्तिमान और हमारी उपलब्धियां राजनीति, विज्ञान, आर्थिकी, सामाजिक क्षेत्रों से लेकर खेलों और प्रतिस्पर्धाओं तक हर जगह कायम रही हैं। हमने अपने पड़ोसी देशों को भी प्रत्येक क्षेत्र में मात दी है। अगर पड़ोसी देशों की बात की जाए तो चीन व पाकिस्तान को मात देने के लिए अभी हम थोड़े पीछे है। लेकिन डरने की बात नहीं है हम जल्द ही उन्हें भी पीछे छोड़ देंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">अब आप के जहन में एक सवाल आ रहा होगा कि आखिर हम किस बात में अपने पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान से पीछे हैं। तो जानिएं ! जनाब पहले तो हम जनसंख्या के मामले में चीन से पीछे है और भ्रष्टाचार के मामले में पाकिस्तान से भी पीछे हैं। जहां हमारा देश सबसे बड़ा लोकतांत्रिक है वहीं अब इसकी गिनती सबसे बड़े भ्रष्टतंत्र में शामिल होती जा रही है। आये दिन हो हरे घोटालों से हमारा देश भ्रष्टाचार के क्षेत्र में बहुत तरक्की कर रहा है जिसे देखकर यह कहना गलत नहीं होगा कि भ्रष्टाचार के मामले में हम अन्य मुल्कों को जल्द ही पीछे छोड़ने वाले हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">दुनिया भर के 110 देशों भ्रष्ट देशों में हमने अपनी स्थिति 87 वें स्थान पर कायम कर ली है। जबकि कुछ समय पहले हम 85 वें स्थान पर थे। पूरी दुनिया के भ्रष्ट देशों में अचानक दो पदक ऊपर बढ़ जाने के पीछे का कारण भी साफ है। पिछले दिनों दिल्ली में आयोजित काॅमनवेल्थ गेम्स में हमने करोड़ों रूपये के घोटले किए। अभी काॅमनवेल्थ गेम्स में फैलाई हुई गंदगी साफ करने के लिए भ्रष्टाचार निरोधक कामगार लगाये ही गये थे कि एक और बढ़ा घोटाला सामने आता है जिसने भारत सरकार की नींव हिला कर रख दी। हाल ही में चल रहे गर्मा गर्म 2जी घोटाले ने भारतीय नेताओं की पोल पट्टी खोलकर रख दी है। इतना ही नहीं कारगिल के शहीदों के परिजनों को ‘आदर्श हाऊसिंग सोसायटी’ नामक जो आशयाना बनाकर तैयार किये गये थे वो भी इन मोटी धोन्ध वाले नेताओं ने हजम कर लिए। उन्होंने तो इसकी डकार भी नहीं मारी।</p>
<p style="text-align: justify;">अगर मामले यहीं खत्म हो जाते तो भी कोई बात थी। लेकिन मामला यहां खत्म नहीं होता। इसके बाद एक और बड़ा मामला उभरकर सामने आता है जिसमें भारतीय मुद्रा को भारी मात्र में विदेशी बैंकों में जमा करके रखा हुआ है। अभी हाल में ही एक गोपनीय रिपोर्ट के अनुसार स्विटजलैंडों की भारतीयों ने पूरे 280 लाख करोड़ रूपये जमा कर रखे हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">जहां हमारी सरकार बिदेशी बैंकों से हर नये काम के लिए कर्जा ले-लेकर हम भारतीयों को यह एहसास करा रही है कि हम आर्थिक स्तर पर बहुत कमजोर है। तो दूसरी ओर स्विटज बैंकों में जमा भारतीयों का यह पैसा बता रहा है कि हमारे नेतागण देश की भोली भाली जनता को सिबाह बेवकूफ बनाने के और कुछ भी नहीं कर रही है। स्विटज बैंकों में भारतीयों का जितना पैसा जमा है अगर उस पैसों को भारतवर्ष की बैंकों में जमा कर दिया जाए तो ये मान कर चलिए कि हमारी आधी से भी ज्यादा समस्याएं खत्म हो जाएंगी।</p>
<p style="text-align: justify;">बिदेशी बैंकों में जमा पैसे को अगर भारत में वापस ला दिया गया तो अशिक्षा, बेरोजगारी, आर्थिक तंगी, भुखमरी और गरीबी जैसी तमाम समस्याओं पर काबू पाया जा सकता है। लेकिन ऐसा होगा नहीं क्योंकि ये बातें लिखने पढ़ने में ही अच्छी लगती हैं। हम लिखने के सिबाह कुछ कर नहीं सकते और जो कर सकते हैं वो कभी इस तरह की भावुक बातें सोचते नहीं।</p>
<p style="text-align: justify;">देश की सबसे बड़ी पंचायत उच्च न्यायालय के न्यायधीश खुद इस बात की गवाही दे की देश भ्रष्टाचार की स्थिति गंभीर होती जा रही है। उनका कहना था कि ‘यहां एक भ्रष्ट अफसर रिश्वत लेते हुए पकड़ा जाता है तो दूसरी ओर वह रिश्वत देकर छुट भी जाता है।’ बात एक दम सच्ची है। जहां भ्रष्टाचार से सरकार चल रही हो वहां आप किस पर भरोसा कर सकते हैं। देश में सरकार चलाने वाले भी वही लोग है जिनके पूर्वजों ने भ्रष्टाचार की नींव रखी थी। अगर उनके बंसज आज भ्रष्ट होते जा रहे हैं तो उसमें कौन सी नई बात है।</p>
<p style="text-align: justify;">आजादी के बाद बने पहले प्रधान मंत्री द्वारा सन् 1948 में पंचवर्षीय योजनाओं का शुभारंभ किया गया था जिसके अंतर्गत देश का विकास किया जाना था। लेकिन आज कितने लोग हैं जो जानना चाहते है कि पंचवर्षीय योजना के तहत क्या कार्य किये गये हैं ? प्रत्येक वर्ष कितना पैसा पंचवर्षीय योजनाओं के नाम पर खर्चा जाता है यह जानने वाला कोई नहीं ? इसके अलावा अभी हाल ही में भ्रष्टाचार को कम करने और सरकारी विभागों से आम जनता को सूचाना का अधिकार दिलाने के लिए 2005 में सूचना का अधिकार लागू किया गया, उसका भी कोई कारगर उद्देश्य पूरा होता नजर नहीं आया।</p>
<p style="text-align: justify;">अधिकारी सूचना के नाम पर एक फाईल बनाकर रखते है। जो कि जनता को देने के काम आती है। वहीं दूसरी ओर उनके व्यक्तिगत रिकोर्ड भी तैयार किये जाते हैं जिसमें उनके द्वारा किये गये हेर-फेर की काली करतूतें लिखी होती हैं। अब वो भी करे तो क्या करें ? आखिर पूरा सरकारी तंत्र ही भ्रष्ट अफसरों से भरा पड़ा है। उन्हें भी तो बेईमानी की कमई का हिस्सा अपने आलाधिकारियों को पहुंचाना पड़ता है।</p>
<p style="text-align: justify;">खोजकर्ताओं ने तो यहां तक खोज निकाला है कि भ्रष्टाचार क्या है और उसकी परिभाषा व उसके प्रकार क्या हैं ? हम अगर अपने देश की बात करें तो यहां भ्रष्टाचार की परिभाषा उपहार से लगाई जाती है जिसके अन्तर्गत भ्रष्टाचार को भी तीन भागों में बांटा गया है। पहला नजराना, जो किसी अधिकारी या कर्मचारी से काम करने के लिए दिया जाए। दूसरा जबराना, जब कोई अधिकारी या कर्मचारी आपका काम करने के लिए कुछ मांगे, या जबरदस्ती पैसे की मांग रखे, उसे जबराना कहा गया। उसके बाद तीसरा होता है शुक्राना, जो अधिकारी द्वारा बिना मांगे ही अपना काम होने पर हम उनकी टेबिल तक पहंुचाते है।</p>
<p style="text-align: justify;">इस देश की अजीव ही बिडम्बना है। एक भ्रष्टाचार को खत्म करने के लिए दूसरी भ्रष्टाचार निरोधी टीम खड़ी कर दी जाती है। फिर भ्रष्टाचार निरोधी जांच के नाम पर देश गरीब जनता का लाखों-करोड़ों रूपये उन पर न्यौछावर कर दिये जाते है। यह सिलसिला खत्म होने का नाम नहीं लेता। एक के बाद एक भ्रष्टाचार और फिर उस भ्रष्टाचार की जांच के लिए एक और भ्रष्टाचार निरोधक दस्ता तैयार कर दिया जाता है।</p>
<p style="text-align: justify;">देश के लिए भ्रष्टाचार एक बहुत बड़ी समस्या बनता जा रहा है। जहां देश के प्रथम प्रधान मंत्री ने भी इस बात का समर्थन किया था कि ‘देश में चलाई जा रही विकास योजनाओं का दसवां हिस्सा जरूरतमंदों तक पहुंचता है।’ और अब आजादी के 63 साल के बाद भी हमारे देश के (वर्तमान) प्रधान मंत्री मनमोहन सिंह का भी यही मानना है कि ‘केन्द्र से भेजे गये पैसों का 20 प्रतिशत ही जरूरतमंदों को मिल पाता है।’ तो इस स्थिति में हम किस पर यकीन कर सकते हैं। जब देश की सबसे बड़ी पंचायत उच्च न्यायलय और देश की सरकार चलाने वाला मुखीया भी यही माने कि देश में भ्रष्टाचार चरम सीमा पर है। तो फिर स्थिति को साफ करने के लिए रह क्या जाता है ?</p>
<p style="text-align: justify;">सरकारों को तीजोडियां भरने से और जनता को अपना पेट भरने के लिए दो जून की रोटी कमाने से फुरसत नहीं इस स्थिति में कौन इन भ्रष्ट नेताओं की खबर लेगा। मेहगाई अपना मुंह फैलती जा रही है और गरीब उसके आगोश में सिमटा जा रहा है। जहां देश के भावी नेता और मंत्री मण्डल घोटालों में लगे हैं वहीं यहां की जनता उनके तमाशे को खुली आँखों से तमाशाई होकर देख रही है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर देश भक्ति के दो-चार गीत गाकर, तीरंगे को सलामी देकर हमारे सारे कर्तव्य खत्म हो जाते है। अब इस माहौल में तो अभिनेता नाना पाटेकर का डायलाॅग याद आता है&#8230;‘‘सौ में से अस्सी बेईमान&#8230;फिर भी मेरा देश महान।’’</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
<p style="text-align: justify;">&nbsp;</p>
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		<title>माओवाद की राजधानी ‘मनातू’ जहाँ सांसद भी जाने से डरते हैं &#124;</title>
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		<pubDate>Sat, 05 Feb 2011 11:22:36 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जयराम "विप्लव"</dc:creator>
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		<description><![CDATA[जनोक्ति की टीम झारखण्ड में माओवाद की जमीन तलाशने के लिए राजधानी रांची से होते हुए पलामू ( डाल्टेनगंज ) पहुंची &#124; पलामू की जमीन पर कदम रखने से पहले जो सबसे बड़ा शब्द था &#8216; माओवाद &#8216; जिसके गहरे ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-13324" href="http://www.janokti.com/government-failure-%e0%a4%85%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a5%87%e0%a4%b0-%e0%a4%a8%e0%a4%97%e0%a4%b0%e0%a5%80/%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%93%e0%a4%b5%e0%a4%be%e0%a4%a6-%e0%a4%95%e0%a5%80-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%a7%e0%a4%be%e0%a4%a8%e0%a5%80-%e2%80%98%e0%a4%ae%e0%a4%a8%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a5%82/attachment/mnaatu/"><img class="alignright size-medium wp-image-13324" title="mnaatu" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/mnaatu-300x225.jpg" alt="" width="300" height="225" /></a>जनोक्ति की टीम झारखण्ड में माओवाद की जमीन तलाशने के लिए राजधानी रांची से होते हुए पलामू ( डाल्टेनगंज ) पहुंची | पलामू की जमीन पर कदम रखने से पहले जो सबसे बड़ा शब्द था &#8216; माओवाद &#8216; जिसके गहरे निहितार्थ में हमें उतरना था |  रांची छोड़ने से पहले हमारे मन में आशंकाओं  के बादल उमड़ रहे थे लेकिन सच्चाई को जानने की जिद भी थी | रांची से पलामू पहुँचने के क्रम में कई ऐसे दृश्य नजरों से होकर गुजरे जो कल्पना से परे थे | एक -एक पुल की सुरक्षा में अर्ध-सैनिक बालों केदो दर्जन जवान गश्त लगा रहे थे | सडकों पर घुमती बख्तरबंद गाडियां इलाके में दहशत की कहानी को बयान कर रही थी | किसी प्रकार हम पलामू के अत्यंत पिछड़े और नक्सल प्रभावित प्रखंड मनातू पहुंचे | यहाँ जिला मुख्यालय से क्षेत्र के प्रखंडों को जोड़ने का एक मात्र माध्यम सालों पहले बनी जर्जर सड़कें जिसपर महज एक ही बस आवा-गमन करती है |  शिक्षा -स्वास्थ्य &#8211; सड़क -बिजली -पानी जैसी मुलभुत सुविधाओं से विहीन मनातू के लोगों से मिलकर हमने जो कुछ समझा उसको लेकर शासन तंत्र और जनप्रतिनिधियों के ऊपर अनेक सवाल उठ रहे थे |  इन्हीं सवालों को जानने के लिए हम पहुंचे क्षेत्र के सांसद &#8216;इन्दर सिंह नामधारी &#8216; के पास जो पूर्व में झारखण्ड विधानसभा के अध्यक्ष भी रह चुके हैं |  सम्बंधित मुद्दे पर झारखण्ड के सबसे शिक्षित और सजग कहे जाने वाले जनप्रतिनिधि इन्दर सिंह नामधारी से हमारी बातचीत पर आधारित रिपोर्ट प्रस्तुत है :</p>
<p style="text-align: justify;">भौगोलिक रूप से देश के सबसे बड़े लोकसभा क्षेत्र में से एक चतरा के सांसद इन्दर सिंह नामधारी ने बातचीत के दौरान मनातू को <strong>माओवादियों के अभ्यारण्य </strong><span style="font-size: 13.3333px;">की संज्ञा देते हुए हमारे सकुशल लौट आने पर आश्चर्य का भाव प्रकट किया | उन्होंने क्षेत्र में &#8216;भय&#8217; को रेखांकित करते हुए बताया कि मनातू ब्लोक का प्रखंड विकास पदाधिकारी वहां ना बैठ कर पड़ोस के &#8216; तरहस्सी &#8216; ब्लोक में बैठते हैं | उनसे जब हमने इलाके में नदारद मूलभूत सुविधाओं की बात छेड़ते हुए सड़क और बिजली की बदहाली की बात सामने रखी तो उन्होंने कहा कि माओवादियों के भय से कोई भी ठेकेदार टेंडर भरने को तैयार नहीं है | मोटी रकम  नक्सलियों को देने के बाद भी जान-माल की सलामती का सवाल बना रहता है | इसका एक ही उपाय है कि सुरक्षा बालों की कड़ी निगरानी में सड़क निर्माण का काम हो और यह कार्य केवल आर्मी के द्वारा ही संभव है | सड़क निर्माण में आर्मी की मदद की फ़रियाद लेकर वो केन्द्रीय गृहमंत्री चिदंबरम के पास भी पहुंचे थे | लेकिन चिदंबरम ने इस मामले में असमर्थता जाहिर की |</span></p>
<p style="text-align: justify;">सांसद महोदय के अनुसार बिजली के लिए लोडशेडिंग की सबसे बड़ी समस्या है | विकास कार्यों में आने वाली बाधाओं को गिनाते हुए उन्होंने सांसदों और विधायकों की लड़ाई को भी बहुत हद तक जिम्मेदार बताया | जनप्रतिनिधियों में आपसी ताल मेल के अभाव में नौकरशाहों की मनमानी की शिकार क्षेत्र की जनता हो रही है | विकास मद में होने वाले प्रत्येक कार्य यहाँ तक की नरेगा में भी ४० %  कमीशनखोरी यहाँ आम बात है | डाल्टेनगंज के वर्तमान डी डी सी के ऊपर कमीशनखोरी और आर्थिक अनियमितता के सिलसिले में रंगे हाथों पकडे जाने पर भी राज्य सरकार की कृपा दृष्टि उन पर बनी हुई है | डी डी सी को बर्खास्त किये जाने की मांग को लेकर सांसद महोदय ने प्रदेश के मुख्यमंत्री अर्जुन मुंडा को एक पत्र भी लिखा लेकिन अब तक कोई परिणाम सामने नहीं आया है |</p>
<p style="text-align: justify;">साथ-साथ पारा शिक्षकों और एनजीओ की मिलीभगत से मध्याह्न भोजन में होने वाली धांधलियों का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि योजनाओं का क्रियान्वयन जमीनी तौर पर दो फीसदी भी नहीं हो पा रहा है | माओवादियों के नाम पर सरकारी अफसरों और कर्मचारियों इलाके से गायब रहते हैं | स्थानीय जनप्रतिनिधि का भी इस ओर कोई ध्यान नहीं है | विधायक महाशय को भी क्षेत्र की जनता शोषक के रूप में ही देखती है | शैक्षिक रूप से पिछड़े लोग अपने अधिकारों से अनजान और आवाज उठाने में असमर्थ हैं | बार-बार चुनाव में ऐसे लोगों को जीता कर पांच सालों तक उनकी मेहरबानियों पर गुजर-बसर करते हैं |</p>
<p style="text-align: justify;">मनातू में स्वास्थ्य केन्द्रों में चिकित्सकों की गैर मौजूदगी और एम्बुलेंस सेवा के ना होने के सवाल पर उन्होंने कन्नी काटते हुए कहा कि ऐसे इलाके में एम्बुलेंस सेवा का उपयोग कम दुरूपयोग ज्यादा होगा | हालाँकि ऐसा होता भी इलाके के स्वस्थ्य केंद्र में सोलर सेवा का उपयोग मरीजो के इलाज में हो ना हो कर्मचारियों के मोबाइल चार्ज में जरुर होता है |</p>
<p style="text-align: justify;">सांसद महोदय ने दार्शनिक अंदाज में क्षेत्र की समस्याओं से अपना पल्ला झाड़ते हुए कहा कि &#8216; <strong>इंसान परिस्थितियों का गुलाम होता है &#8216;  |</strong></p>
<p style="text-align: justify;">
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		<title>पंचायत में महिलाओं की भूमिका</title>
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		<pubDate>Mon, 29 Nov 2010 09:23:49 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
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		<description><![CDATA[अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समाप्त हुआ है और झारखण्ड में पंचायत चुनाव चल रहे हैं । ऐसा देखने में आया है कि पंचायत चुनावों में महिलाओं की भूमिका तेजी से बढ़ रही है । महिलाओं ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;"><a rel="attachment wp-att-11056" href="http://www.janokti.com/?attachment_id=11056"><img class="alignright size-medium wp-image-11056" title="panchayat1 (1)" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/panchayat1-1-300x177.jpg" alt="" width="300" height="177" /></a>अभी हाल ही में उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनाव समाप्त हुआ है और झारखण्ड में पंचायत चुनाव चल रहे हैं । ऐसा देखने में आया है कि पंचायत चुनावों में महिलाओं की भूमिका तेजी से बढ़ रही है ।  महिलाओं की भागीदारी पर चर्चा कर रहे हैं <strong>लोकेन्द्रसिंह कोट</strong>-</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;">लोकतंत्र की सबसे छोटी लेकिन महत्वपूर्ण इकाई हैं पंचायत। यह लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है। पंचायत की बात प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से सदियों से होती रही है। वर्ष 1955 में पंचायती राज व्यवस्था तो की गई पर कई कारणों से यह असफल सिद्ध हुई। एक बड़े अंतराल के बाद 1993 में 73वें एवं 74वें संशोधन में अभी तक हाशिए पर रही महिलाओं को पंचायतों में 33 प्रतिशत आरक्षण दिया गया।</span></p>
<p style="text-align: justify;">इस उल्लेखनीय आरक्षण का परिणाम यह रहा कि देश भर की पंचायतों में लगभग 163000 महिलाएं विभिन्न पदों पर नियुक्त हुईं तथा सरपंच के तौर पर लगभग 10000 महिलाएं आगे आईं। एक पुरुष प्रधान समाज में इतना बड़ा बदलाव एक बारगी तो खुश होने के लिये पर्याप्त था लेकिन बदलाव की इस प्रक्रिया में सिक्के का दूसरा पहलू भी विद्यमान रहा। कागजी आंकड़ों और व्यवहारिक सत्य में ज़मीन-आसमान का अंतर पाया गया।</p>
<p style="text-align: justify;">सच तो यह है कि महिला जनप्रतिधियों के पुरुष रिश्तेदार ही अधिकांश जगहों पर शासन करते रहे और महिलाओं को पर्दे के पीछे रखा गया। ताजा अध्ययन बताते हैं कि लगभग आधे से ज्यादा जगहों पर ऐसा खुले तौर पर हो रहा है। ग्रामीण समाज ने भी इसे मौन स्वीकृति दे रखी है। महिला जनप्रतिनिधियों के कंधों पर बंदूकें रख कर उनके पुरुश रिश्तेदार भ्रश्टाचार में लीन हैं और इल्जाम महिला जनप्रतिनिधियों के सर लग रहे हैं। इससे  ग्रामीण महिला को लोकतंत्र की इस निचली पाठशाला से यही सीखने को मिल रहा है कि पंचायत या सत्ता धन कमाने का एक स्रोत भर हैं। वास्तव में ग्रामीण महिलाओं की पंचायतों में भागीदारी को तो अपना लिया गया लेकिन उनकी सामाजिक-आर्थिक स्थितियों के मूल में जाकर नहीं देखा गया। महिलाओं को एक पूर्व निर्धारित ढ़ांचे में फिट कर दिया गया, बगैर यह देखे कि अनुकूल और प्रतिकूल परिस्थितियां क्या हैं। जबकि होना यह था कि इन ग्रामीण महिलाओं के ढांचे में व्यवस्था को फिट करना था। इसके पष्चात् कई शिकायतें जो हम कर पर रहे है, वे नहीं होती।</p>
<p style="text-align: justify;">शिक्षा का ही उदाहरण लें। शिक्षा की कमी उनके आत्म-विकास और आत्म-सम्मान में सबसे बाधक रही है। यद्यपि पिछले पांच दशकों में महिला साक्षरता कई गुना बढ़ी है फिर भी उनमें शिक्षा का स्तर निम्न है। इसके अलावा सिर्फ साक्षर होने भर से ही महिलाओं को जागरूक होना आ जाएगा, ऐसा सोचना सही नहीं है। साक्षर महिला जनप्रतिनिधियों को लेकर किये गये एक अध्ययन के अनुसार अभी भी वे ‘महिला समस्या’ को नहीं समझ पाई हैं उनमें महिला विकास जैसा कोई चिंतन ही नही हैं।</p>
<p style="text-align: justify;">ग्रामीण महिलाओं के संदर्भ में यह तथ्य भी चैंकाने वाला है कि लगभग पचपन से साठ प्रतिशत महिलाएं घरेलू हिंसा की शिकार हैं। इसका सीधा अर्थ यही है कि महिलाएं अपने घर में ही दमन चक्र झेलने को मजबूर हैं। ऐसे में इनसे आशा करना कि वे पंचायत के कार्यों एवं उनकी समस्याओं के लिए लड़ें तो यह सर्वथा बेमानी ही होगा।</p>
<p style="text-align: justify;">इसे विडम्बना ही कहेंगे कि जहां हम महिला उत्थान और उनकी सत्ता में भागीदारी के लिए लड़ते रहे, वहीं उसी के समानान्तर पुरूश और महिलाओं के अनुपात में देशव्यापी गिरावट आती रही। 972 प्रति हजार पुरुष से घटकर आज यह 934 प्रति हजार पुरुष तक पहुँच चुकी है। ऐसे में कभी-कभी लगता है कि दबाव के चलते सब कुछ अपना रहे हैं परन्तु मन से महिलाओं को आगे बढ़ाना हम नहीं चाहते। कुछ जागरूक महिला सरपंचों द्वारा लिए गए निर्णयों (चाहे वे कितने ही अच्छे क्यों न हो) को सरेआम पुरूश साथियों द्वारा नकारने की घटनाएं भी सामने आई हैं। कई स्थानों पर महिलाओं को तरह-तरह से अपमानित किया जाना हमारी उसी पुरूश आधारित मानसिकता का परिचायक है।</p>
<p style="text-align: justify;">वैसे देखा जाए तो ग्रामीण महिलाएं जब अपने घरेलू कार्यों के साथ-साथ कृषि कार्यों को भी सही प्रबंधन कर निपटा लेती हैं तथा अपने बच्चों का भी पालन-पोषण कर लेती हैं तो ऐसी कुशल प्रबंधक को पंचायत का पोषण करने में कहाँ समस्या आ सकती है। वे अपने उद्देश्यों के प्रति अपने संस्कारों की वजह से अधिक प्रतिबद्ध, ईमानदार और उत्साही रहती हैं। जरूरत इस बात की है कि संपूर्ण व्यवस्था उनके पक्ष को लेकर पुनर्व्यवस्थित हो और उन्हें पारिवारिक सहमति प्राप्त हो। हमें पंचायती राज में महिलाओं की भागीदारी के बारह-तेरह वर्षों बाद अनुभवों को महत्व देते हुए प्रत्येक पहलू की पुर्नव्यवस्था करना होगी।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.3333px;"><strong><a href="http://charkha.org">चरखा</a></strong></span></p>
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		<title>बिहार का जनादेश</title>
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		<pubDate>Sat, 27 Nov 2010 16:26:59 +0000</pubDate>
		<dc:creator>रमेश भट्ट</dc:creator>
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		<description><![CDATA[बिहार का जनादेश क्या कहता है। सबके जेहन में यही बात है। क्या बिहारी अवाम ने जातिवाद को नकारकर सिर्फ और सिर्फ विकास के नाम पर वोट दिया है। या बिहार की जनता के पास एनडीए गठबंधन के अलावा कोई ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-11027" href="http://www.janokti.com/?attachment_id=11027"><img class="alignright size-full wp-image-11027" title="bihar jai bihar" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/bihar-jai-bihar.jpg" alt="" width="310" height="253" /></a>बिहार का जनादेश क्या कहता है। सबके जेहन में यही बात है। क्या बिहारी अवाम ने जातिवाद को नकारकर सिर्फ और सिर्फ विकास के नाम पर वोट दिया है। या बिहार की जनता के पास एनडीए गठबंधन के अलावा कोई विकल्प नही था। या फिर लोगों को नीतीश में वह क्षमता दिखाई दी जो बिहार में विकास की नई कहानी लिखने का माददा रखता है। इस चुनाव में जो प्रचण्ड जनादेश एनडीए गठबंधन के पक्ष में आया उसने यह साफ कर दिया की भारतीय मतदाता के लिए विकास अब सबसे बड़ा मुददा है। यही कारण है कि लालू पासवान की जोड़ी को जनता ने आइना दिखा दिया। इस चुनाव ने एक बार फिर परिवारवाद को भी तमाचा मारा है। इसका जीता जागता उदाहरण राबड़ी देवी का दोनों विधानसभाओं राघोपुर और सोनपुर ने बुरी तरह आ गई। यह दोनों इलाके यादव बहुल और लालू के गड़ माने जाते हैं। मगर वोट को अपनी जागीर समझने वाले नेताओं को कौन समझाये कि जनता को ज्यादा दिन तक अंधेरे में नही रखा जा सकता। यह दूसरा सबसे बड़ा उदाहरण है। इससे पहले मुलायम सिंह की बहू को फिरोजाबाद से जनता नकार चुकी है। यह इलाका भी मुलायम सिंह का गड़ माना जाता है। सवाल यह कि क्या यह उन नेताओं के लिए सन्देश है जो परिवारवाद को बड़ावा दे रहे है। सबसे बुरी दशा कांग्रेस की हुई है। वह कांग्रेस जो केन्द्र में है जिसके पास सोनिया और राहुल है। दरअसल कांग्रेसी हमेशा इस गलत फहमी में रहते है की यह दोनों नेता उनकी जीत को हार में बदल देंगे। नतीजा यह रहा कि राहुल गांधी ने जिन 17 जगहों पर बिहार में प्रचार किया वहां एक दो जगह छोड़कर पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। आजादी के इन 6 दशकों में बिहार में कांग्रेस राजद और एनडीए गठबंधन ने राज किया। इनमें लालू राज में बिहार की हालत बद से बदतर हो गई। कानून व्यवस्था को लेकर बिहार सुर्खियों में रहने लगा। नीतीश ने इसी नब्ज को दबाया और 50 हजार से ज्यादा अपराधियों को जेल में डाल दिया। नतीजा लोग अब देर सबेर कहीं भी आ जा सकते है। दूसरा काम सड़कों के निर्माण का। तीसरा दलितों और अकलियतों में अति दलितों का पहचान कर उनके विकास के लिए कार्यक्रम चलाना। महिलाओं को पंचायत और शहरी निकाय में 50 फीसदी आरक्षण प्रदान करना। आज बिहार में लोग प्राथमिक चिकित्सालय में इलाज के लिए आ रहे हैं। लोगों में विकास की एक नयी ललक जगी है। जरूरत है इस ललक को बनाये रखना। नीतीश कुमार 2015 में बिहार को विकसीत राज्या बनाने की बात कर रहें है। मगर इसके लिए उन्हें निवेश के लिए उद्योगपतियों को बिहार में बुलाना पड़ेगा। अपने वादे के मुताबिक सार्वजनिक वितरण प्रणाली को बेहतर बनाना होगा। पलायन रोकने के लिए कुछ बड़े कदम उठाने होंगे।</p>
<p style="text-align: justify;">
]]></content:encoded>
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		<title>काम को इनाम (बिहार चुनाव परिणाम)</title>
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		<pubDate>Sat, 27 Nov 2010 14:20:35 +0000</pubDate>
		<dc:creator>अजय केशरी</dc:creator>
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		<description><![CDATA[बिहार विधान सभा चुनाव परिणाम में एनडीए को तीन चौथाई बहुमत का मिलना यह जताता है कि &#8220;जो सरकार काम करेगी वही राज करेगी&#8221;। पिचले पांच सालों में एनडीए कि सरकार ने बिहार में जो काम किया उसके एवज में ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-11003" href="http://www.janokti.com/?attachment_id=11003"><img class="alignleft size-medium wp-image-11003" title="big bos" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/big-bos-300x206.jpg" alt="" width="270" height="185" /></a>बिहार  विधान सभा चुनाव परिणाम में एनडीए को तीन चौथाई बहुमत का मिलना यह जताता  है कि &#8220;जो सरकार काम करेगी वही राज करेगी&#8221;। पिचले पांच सालों में एनडीए कि  सरकार ने बिहार में जो काम किया उसके एवज में बिहार के लोगों ने जातिवाद की  रेखा को पार कर अपने मताधिकार का प्रयोग कर एक ऐसे गठबंधन पार्टी को पूर्ण  जनादेश दिया जो पिचले पांच वर्षो में काम कर बिहार को जंगल राज से उबार एक  ऐसे रास्ते पर अग्रसर किया जहाँ से बिहार की अपनी पहचान बनानी शुरू हुई।  आज बिहार की जो गरिमा बनी है वह पिछले एनडीए सरकार की देन है।<br />
अगर  हम पिछले पांच वर्षों को छोड़ दें और उसके पीछे के पंद्रह वर्षों के अतीत  में झांके तो एक बदहाल बिहार नज़र आता है। जहाँ उंच-नीच का वेदभाव,  जाति-जाति में टकराव, नक्सलवाद का बोलबाला, फलता-फूलता अपहरण उद्योग,  अपराधिक एवं राजनितिक सांठ-गाँठ, अपराधिक तत्वों का बोलबाला, ला एंड आडर का  बुरा हाल, जर्जर सड़कें, सरकारी हस्पतालों का बुरा हाल, शिच्छा के स्तर का  मटियामेट होना, बंद पड़े उद्योग धंधे, जीने का आधार ख़त्म (तभी तो हर तबके  का पलायन हुआ बिहार से) यानि पूरी तरह बर्बाद बिहार नज़र आता है।<br />
फिर आता  है २००५ का बिहार विधान सभा चुनाव। धन्य हो चुनाव आयोग की टीम धन्य हो  श्री के.जे.राव जिनकी सक्रियता के चलते बिहार में निष्पच्छ चुनाव हो सका और  एनडीए की सरकार सत्ता में आ सकी। अगर चुनाव आयोग के पहल में कही भी थोड़ी  सी भी त्रुटी होती तो फिर से आरजेडी की सरकार सत्ता पर काबिज़ होती और  बिहार में फिर वही सब होता जो पिछले पंद्रह सालों तक होता रहा था।<br />
बिहार  विधान सभा चुनाव २००५ में एनडीए की सरकार श्री नितीश कुमार की अगुवाई में  बनी। पूरी तरह से बर्बाद बिहार को एक नया आयाम देने के लिए नितीश कुमार ने  कमर कस ली। उन्होंने बिहार के लिए कुछ सपने पाल रखे थे और फिर उन सपनो को  साकार करने में जुट गए। वह पिछली सरकार की नीतियों पर न चल कर खुद की बनाई  नीतियों पर चलना शुरू किया। जिसमे शामिल था बिहार में कानून का राज, ताकि  लोग अमन चैन से जीवन बसर कर सके, सड़कें जो पूरी तरह बर्बाद हो चुकी थी उसे  ठीक करना, सरकारी हस्पतालों की जर्जर स्थिति से ऊपर उठाना, आधी आबादी  (महिला) को उनका हक देना, शिच्छा के स्तर को ऊपर उठाना, बिहार में बाहरी  उद्योगपतियों को आकर्षित करने के लिए एक अच्छा माहौल बनाना, बिजली उत्पादन  को बढ़ाना तथा आत्म निर्भर बनना, बिहार के लोगों को रोज़गार धंधे मुहैया  करना (ताकि बिहारियों का पलायन रुक सके), उच्च शिच्छा के लिए बिहार में  ज्यादा से ज्यादा कालेज एवं यूनिवर्सिटी का खुलवाना ताकि उच्च शिच्छा  प्राप्त करने के लिए बिहार से बिहारी लड़कों का पलायन रुक सके।<br />
श्री  नितीश कुमार ने पिछले पांच वर्षो में अपने बनाये सभी नीतियों पर पूरी तरह  अमल करते हुए एक पिछड़े राज्य को अग्रसर राज्य कि श्रेणी में लाये और बिहार  विकाश के राह पर पूरी तरह दौड़ने के लिए तैयार हो गया है।  इसीलिए बिहार कि  जनता ने भी उम्मीद से ज्यादा जनादेश (विश्वाश) देकर श्री नितीश कुमार के  हाथो में बिहार कि बाग डोर थमा दी क्यों कि अपने से ज्यादा उसे नितीश कुमार  पर विश्वाश है।<br />
अब मुख्यमंत्री श्री नितीश कुमार अपने गढ़े हुए सपनो का बिहार बनाने के लिए स्वतंत्र है क्यों कि उनके राह में अब विपच्छ भी नहीं है।</p>
]]></content:encoded>
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		<title>बिहार मेँ राहुल का युवा फेक्टर फुस्स !</title>
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		<pubDate>Wed, 24 Nov 2010 18:36:17 +0000</pubDate>
		<dc:creator>जनोक्ति डेस्क</dc:creator>
				<category><![CDATA[यूपी-बिहार]]></category>
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		<description><![CDATA[34 साल में बिहार को 17 मुख्यमंत्री देने वाली कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा आज दहाई तक भी नहीं पहुंच सका है। कांग्रेस महज 5 सीटें ही जीत सकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 9 सीटें मिली थीं।बिहार चुनाव राहुल गांधी के इम्तहान माना जा रहा था बिहार की जनता पर पार्टी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी की रैलियों का असर भी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने 17 और सोनिया गांधी ने 5 सीटों परसभाएं की थीं। कांग्रेस को केवल कहलगांव और किशनगंज सीट पर जीत नसीब हुई। कहलगांव से सदानंद सिंह और किशनगंज से मोहम्मद जावेद चुनाव जीते हैं। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर भी सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव हार गए हैं। राहुल गांधी ने इन सीटों पर चुनावी रैलियां की- केवल कहलगांव सीट पर कांग्रेस के सदानंद सिंह विजयी हुए हैं. पहले बरबीघा सीट पर कांग्रेस आगे चल रही थी लेकिन उसके उम्मीदवार अशोक चौधरी को निर्दलीय प्रत्याशी ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-10944" href="http://www.janokti.com/bihar-election-up-election/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%81-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b9%e0%a5%81%e0%a4%b2-%e0%a4%95%e0%a4%be-%e0%a4%af%e0%a5%81%e0%a4%b5%e0%a4%be-%e0%a4%ab%e0%a5%87/attachment/m_id_124677_rahul_gandhi/"><img class="aligncenter size-full wp-image-10944" title="M_Id_124677_rahul_gandhi" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/M_Id_124677_rahul_gandhi.jpg" alt="" width="300" height="250" /></a>34 साल में बिहार को 17 मुख्यमंत्री देने वाली कांग्रेस की सीटों का आंकड़ा आज दहाई तक भी नहीं पहुंच सका है। कांग्रेस महज 5 सीटें ही जीत सकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को 9 सीटें मिली थीं।<span style="font-size: 13.3333px;">बिहार चुनाव राहुल गांधी के इम्तहान माना जा रहा था बिहार की जनता पर पार्टी अध्‍यक्ष सोनिया गांधी और महासचिव राहुल गांधी की रैलियों का असर भी नहीं हुआ। राहुल गांधी ने 17 और सोनिया गांधी ने 5 सीटों परसभाएं की थीं। कांग्रेस को केवल कहलगांव और किशनगंज सीट पर जीत नसीब हुई। कहलगांव से सदानंद सिंह और किशनगंज से मोहम्मद जावेद चुनाव जीते हैं।</span></p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर भी सिमरी बख्तियारपुर से चुनाव हार गए हैं।</p>
<p style="text-align: justify;"><strong>राहुल गांधी ने इन सीटों पर चुनावी रैलियां की-</strong></p>
<p style="text-align: justify;">केवल कहलगांव सीट पर कांग्रेस के सदानंद सिंह विजयी हुए हैं. पहले बरबीघा सीट पर कांग्रेस आगे चल रही थी लेकिन उसके उम्मीदवार अशोक चौधरी को निर्दलीय प्रत्याशी त्रिशूलधारी सिंह ने 3000वोटों से हरा दिया।</p>
<p style="text-align: justify;"><span style="text-decoration: underline;"> </span><span style="text-decoration: underline;">अपडेटेड –</span><span style="text-decoration: underline;"> 4.30 PM</span></p>
<p style="text-align: justify;">सीट /    कौन आगे है</p>
<ol style="text-align: justify;">
<li>बछव़ाडा / अवधेश कुमार राय सीपीआई (कांग्रेस चौथे स्थान पर)</li>
<li>जमालपुर / शैलेष कुमार जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस तीसरे पर)</li>
<li>कहलगांव/ सदानंद सिंह- कांग्रेस -जीत गए।</li>
<li>बेगुसराय/ सुरेंद्र मेहता- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस चौथे पर)</li>
<li>सासाराम/ जवाहर प्रसाद – भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस छठें स्थान पर)</li>
<li>औरंगाबाद/ रामाधार सिंह- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस पांचवें स्थान पर)</li>
<li>शेखपुरा/ रणधीर कुमार सोनी- जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस की सुनिला देवी दूसरे स्थान पर रहीं)</li>
<li>जहानाबाद/ अभिराम शर्मा- जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस के रामजतन सिन्हा तीसरे पर)</li>
<li>बरबीघा/ अशोक चौधरी – कांग्रेस -हार गए (निर्दलीय त्रिशूलधारी सिंह 3000 वोट से जीते)</li>
<li>हिसुआ/ अनिल सिंह- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस की नीतू कुमारी तीसरे स्थान पर)</li>
<li>मुज़्ज़फ़रपुर/ सुरेश कुमार शर्मा – भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस चौथे स्थान पर)</li>
<li>सीतामढ़ी/ सुनील कुमार पिंटू- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस की रूपम कुमारी पांचवें स्थान पर)</li>
<li>समस्तीपुर/ इस्लाम सहीम – आरजेडी (कांग्रेस तीसरे स्थान पर)</li>
<li>रामनगर/ भागीरथी देवी- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस के नरेश राम दूसरे स्थान पर)</li>
<li>कुचईकोट/ अमरेन्द्र कुमार पांडे- जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस चौथे स्थान पर)</li>
<li>मांझी/ गौतम सिंह – जेडीयू (कांग्रेस पांचवे स्थान पर)</li>
<li>ओबेरा/ प्रमोद सिंह चंद्रवंशी- जनता दल यूनाइटेड (कांग्रेस पाचवें स्थान पर)</li>
</ol>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;"><strong>इन सीटों पर सोनिया गांधी ने रैलियां की-</strong></p>
<ol style="text-align: justify;">
<li>भभुआ/ डा. प्रमोद कुमार सिंह – एल जे पी  (कांग्रेस चौथा स्थान पर)</li>
<li>बक्सर/ सुखड़ा पांडेय – बीजेपी – (कांग्रेस छठे स्थान पर)</li>
<li>भागलपुर/अश्विनी कुमार चौबे – भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस के अजीत शर्मा दूसरे स्थान पर)</li>
<li>बेगुसराय/ सुरेंद्र मेहता- भारतीय जनता पार्टी (कांग्रेस चौथे पर)</li>
<li>किशनगंज/ मोहम्मद जावेद – कांग्रेस जीत गए (बीजेपी की स्वीटी सिंह हारीं)</li>
</ol>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">सिमरी बख्तियारपुर सीट से बिहार कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष चौधरी महबूब अली कैसर जनता दल यूनाइटेड के डॉ. अरुण कुमार से हारे।</p>
<p style="text-align: justify;">
<p style="text-align: justify;">Source: <a href="http://eciresults.nic.in/" target="_blank">http://eciresults.nic.in/ </a></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>इसके अलावा मज़ेदार रिजल्ट यहां रहा.. केवल 31 वोटों से बीजेपी की जीत हुई.. केवटी सीट पर पूर्व केंद्रीय मंत्री एम ए फ़ातमी के बेटे को अशोक यादव ने हराया। यहां ध्रुवीकरण विश्लेषण के लायक हो सकता है। </strong><br />
<strong>तभी लालू कह रहे हैं- नतीजे रहस्यपूर्ण है </strong></p>
<table style="text-align: justify;" border="1">
<tbody>
<tr>
<td colspan="3" align="center">Bihar &#8211; Keoti</td>
</tr>
<tr>
<td colspan="3" align="center">Result Declared</td>
</tr>
<tr>
<th align="left">Candidate</th>
<th align="left">Party</th>
<th align="right">Votes</th>
</tr>
<tr>
<td align="left">ASHOK KUMAR YADAV</td>
<td align="left">Bharatiya Janata Party</td>
<td align="right">45791</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">FARAZ FATMI</td>
<td align="left">Rashtriya Janata Dal</td>
<td align="right"><strong>45762</strong></td>
</tr>
<tr>
<td align="left">MD. MOHASIN</td>
<td align="left">Indian National Congress</td>
<td align="right">5679</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">SADRE ALAM</td>
<td align="left">Independent</td>
<td align="right">2833</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">MADHURANJAN PRASAD</td>
<td align="left">Bahujan Samaj Party</td>
<td align="right">1985</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">RAMBABU SAHU</td>
<td align="left">Communist Party of India (Marxist-Leninist) (Liberation)</td>
<td align="right">1917</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">BALKRISHNA JHA</td>
<td align="left">Independent</td>
<td align="right">1546</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">NESAR AHMAD</td>
<td align="left">Independent</td>
<td align="right">991</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">MD.MOJAHIDUL ISLAM</td>
<td align="left">Janata Dal (Secular)</td>
<td align="right">636</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">WASI AHMED KHAN</td>
<td align="left">Samajwadi Party</td>
<td align="right">606</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">NAZRE ALAM</td>
<td align="left">Independent</td>
<td align="right">584</td>
</tr>
<tr>
<td align="left">MD.JUNAID SATTAR</td>
<td align="left">Muslim League Kerala State Committee</td>
<td align="right">415</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="text-align: justify;">
<tbody>
<tr>
<td colspan="3"></td>
<td></td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align: justify;">: Neeraj Diwan</p>
]]></content:encoded>
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		<title>बिहार में विकास जीता,जाति हारी</title>
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		<pubDate>Wed, 24 Nov 2010 18:24:48 +0000</pubDate>
		<dc:creator>ब्रज किशोर सिंह</dc:creator>
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		<description><![CDATA[बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं.बिहार की जनता ने जातिवादी शक्तियों को एक सिरे से नकारते हुए एनडीए के विकास की राजनीति पर मुहर लगा दी है वो भी तीन चौथाई के आशातीत बहुमत के साथ.एक बात तो ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-10927" href="http://www.janokti.com/bihar-election-up-election/%e0%a4%ac%e0%a4%bf%e0%a4%b9%e0%a4%be%e0%a4%b0-%e0%a4%ae%e0%a5%87%e0%a4%82-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%95%e0%a4%be%e0%a4%b8-%e0%a4%9c%e0%a5%80%e0%a4%a4%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%be%e0%a4%a4%e0%a4%bf/attachment/nitish/"><img class="alignleft size-full wp-image-10927" title="nitish" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/nitish.png" alt="" width="163" height="128" /></a>बिहार  विधानसभा चुनाव के नतीजे आ चुके हैं.बिहार की जनता ने जातिवादी शक्तियों  को एक सिरे से नकारते हुए एनडीए के विकास की राजनीति पर मुहर लगा दी है वो  भी तीन चौथाई के आशातीत बहुमत के साथ.एक बात तो तय है कि राजग को सभी  जातियों और धर्मों के लोगों का वोट मिला है अन्यथा उसे इतना प्रचंड बहुमत  नहीं मिलता.जो लालू फ़िर से बिहार का राजा बनने का सपना देख रहे थे उनके  विपक्ष का नेता बनने के भी लाले पड़ गए हैं.८ साल तक बिहार की मुख्यमंत्री  रही उनकी पत्नी और भारत के इतिहास में एकमात्र अनपढ़ मुख्यमंत्री रही  श्रीमती राबड़ी देवी कथित ससुराल और मायका यानी सोनपुर और राघोपुर दोनों  जगहों से हार गई हैं.यह भारत के किसी भी राज्य में किसी भी गठबंधन की सबसे  बड़ी जीत है.इतनी बड़ी जीत की उम्मीद न तो एन.डी.ए. के नेताओं को थी और न  ही मीडिया को.बिहार भूतकाल में भी भारत की राजनीति को दिशा देता रहा  है.१९७४ का आन्दोलन इसी पवित्र भूमि से उठा था जिसके परिणामस्वरूप इंदिरा  गांधी की तानाशाही का अंत हुआ था.उसी पिछड़े और गरीब बिहार ने एक बार फ़िर  देश को विकास की राजनीति अपनाने के लिए प्रेरित किया है.साथ ही पूरे<br />
भारत में जाति-धर्म के नाम पर जनता को मूर्ख बना रहे नेताओं को अपना एजेंडा  बदल लेने की चेतावनी दे दी है.कोई ज्यादा समय नहीं हुआ यही कोई ५ साल पहले  बिहार और बिहारी को बांकी भारत के लोग ही दृष्टि से देखते थे.आज बिहारी  शब्द गाली का नहीं गर्व की अनुभूति देता है.नीतीश कुमार भले ही ५ साल के  अपने शासन में बिहार को विकसित राज्यों की श्रेणी में शामिल नहीं करा  पाए.लेकिन उन्होंने बिहार के लोगों की आँखों में विकास और विकसित बिहार के  सपने जरूर पैदा कर दिया.यहाँ तक कि विपक्ष के लोग भी कहीं-न-कहीं सीमित  सन्दर्भ में ही सही विकास के वादे करने के लिए बाध्य हो गए.उनकी सबसे बड़ी  उपलब्धि जो एक बिहारी होने के नाते मैं मानता हूँ वह रही है जंगल राज वाले  राज्य में कानून के शासन की स्थापना.आधारभूत संरचना का भी बिहार में  पर्याप्त विकास हुआ है.सड़कों से लेकर पुल निर्माण तक काम धरातल पर नज़र आ  रहा है.बिहार की जो जनता ५ साल पहले अपने बच्चों को अपहरणकर्ता बना रही थी  वही जनता अब अपने बेटे-बेटियों को डॉक्टर-इंजिनियर बनाने का सपना देखने लगी  है.नीतीश सरकार ने उच्च विद्यालयों में पढनेवाले बच्चों को सरकार की तरफ  से साईकिल उपलब्ध कराई जिससे लड़कियां भी दूर-दूर तक पढने के लिए जाने  लगीं.हालांकि जवाब में लालू ने बच्चों को मोटरसाईकिल देने का वादा किया  लेकिन लोगों ने इसे लालू का मजाक मान लिया.वैसे भी लालू इस बार के चुनाव  प्रचार में भी कभी गंभीर होते नहीं दिखे.प्रत्येक जनसभा में लोगों को  चुटकुले सुनाते  रहे.उनकी सभाओं में लोगों की भीड़ जरूर जमा होती रही लेकिन  उसका उद्देश्य लालू की हँसानेवाली बातों का मजा लेना मात्र था.कुल मिलाकर  जो लोग राजग सरकार से खुश नहीं थे उनके सामने भी विकल्पहीनता की स्थिति  थी.लालू को वे वोट दे नहीं सकते थे और लालू के अलावा राज्य में दूसरा कोई  सशक्त विकल्प था ही नहीं.इसलिए थक-हारकर उन्होंने भी राजग को मत दे  दिया.चुनाव प्रचार के समय राजग ने बड़ी ही चतुराई से लोजपा और राजद को दो  परिवारों की पार्टी बताना शुरू कर दिया था.इसका परिणाम यह हुआ कि यादव और  पासवान जाति के लोग भी इस बात को समझ गए कि ये लोग वोट बैंक के रूप में  सिर्फ उनका इस्तेमाल कर रहे हैं.लगभग सभी चरणों में जिस तरह पिछले चुनावों  से कहीं ज्यादा % मतदान हो रहा था इससे लोग कयास लगा रहे थे कि जैसा कि  होता आया है इस स्थिति में जनता ने कहीं सरकार के खिलाफ तो वोट नहीं दिया  है.लेकिन हुआ उल्टा.इसका सीधा मतलब यह है कि जो भी मत % बढ़ा वह मत सरकार  के समर्थकों का था.हद तो यह हो गई कि राजग को मुस्लिम-यादव बहुल क्षेत्रों  में भी अप्रत्याशित सफलता हाथ लगी और मई समीकरण का नामो-निशान मिट  गया.चुनाव में जदयू और भाजपा दोनों को ही लगभग ३०-३० सीटों का लाभ हुआ  है.अभी तक तो तमाम वैचारिक मतभेदों के बावजूद गठबंधन सफल रहा है.लेकिन जिस  तरह जदयू को साधारण बहुमत से कुछ ही कम सीटें आई हैं उससे नीतीश कुमार के  लिए भाजपा की जरुरत निश्चित रूप से कम हो जाएगी.इसलिए भाजपा के लिए नीतीश  को संभालना अब और भी मुश्किल साबित होने जा रहा है.हालांकि इन चुनावों में  राजग को मात्र ४१-४२ % जनता का वोट मिला है लेकिन इसी अल्पमत के बल पर उसने  तीन चौथाई सीटें जीत ली हैं.यह शुरू से ही हमारे लोकतंत्र की बिडम्बना रही  है कि देश में हमेशा अल्पमत क़ी सरकार बांटी रही है.देखना है कि सरकार  जनता को किए गए वादों में से कितने को पूरा कर पाती है.प्रचार अभियान के  दौरान राजग ने बिजली,रोजगार सृजन और भ्रष्टाचार सम्बन्धी नए कानून के  क्रियान्वयन का वादा किया था.डगर आसान नहीं है.खासकर भ्रष्टाचार ने जिस तरह  से शासन-प्रशासन के रग-रग में अपनी पैठ बना ली है.उससे ऐसा नहीं लगता कि  नीतीश भ्रष्टाचारियों खासकर बड़ी मछलियों की संपत्ति पर आसानी से सरकारी  कब्ज़ा कर उसमें स्कूल खोल पाएँगे जैसा कि उन्होंने अपने भाषणों में वादा  किया था.पिछली बार से कहीं ज्यादा आपराधिक पृष्ठभूमि के लोग राजग की तरफ से  जीत कर विधानसभा में पहुंचे हैं.इन पर नियंत्रण रखना और इन पर मुकदमा  चलाकर इन्हें सजा दिलवाना भी सरकार के लिए एक बड़ी चुनौती रहेगी.अगले साल  बिहार में पंचायत चुनाव होनेवाले हैं.राजग सरकार इसे दलीय आधार पर करवाना  चाहती है.अगर ऐसा हुआ तो निश्चित रूप से इन चुनावों में भी राजग जीतेगा और  सरकार की जिम्मेदारी और भी बढ़ जाएगी.राज्य में पंचायत स्तर पर और जन वितरण  प्रणाली में जो व्यापक भ्रष्टाचार है वह किसी से भी छुपा हुआ नहीं  है.हालांकि गांवों में शिक्षामित्रों की बहाली कर दी गई है लेकिन शिक्षा की  गुणवत्ता में विद्यालय से लेकर विश्वविद्यालय तक में अभी भी गुणात्मक  सुधार आना बांकी है.बिहार में १५ सालों के जंगल राज में उपजी हुई और भी  बहुत-सी समस्याएं हैं जिनका समाधान नीतीश को अगले पांच सालों में ढूंढ  निकालना होगा.बिहार की २१वीं सदी की जनता ज्यादा दिनों तक इंतज़ार करने के  मूड में नहीं है.जनता को न तो उसको रीझते और न ही खीझते देर लगती है.राजग  को यह समझते हुए राज्य को समस्याविहीन राज्य बनाने की दिशा में अग्रसर करना  होगा.नहीं तो राजग का भी राज्य में वही हश्र होगा जो इस चुनाव में  लालू-पासवान और कांग्रेस का हुआ है.</p>
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		<title>जदयू-भाजपा गठबंधन विशाल बहुमत की ओर</title>
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		<pubDate>Wed, 24 Nov 2010 15:17:24 +0000</pubDate>
		<dc:creator>नरेन्द्र निर्मल</dc:creator>
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		<description><![CDATA[नीतीश कुमार ने इस चुनाव में विकास का मुद्दा क्या बनाया जातिवाद और सम्प्रदायवाद से घिरा बिहार का नजारा ही बदल गया. आज पहली बार दिखा कि बिहार की जनता ने ना तो वंशवाद को चलाने वाले को बिहार की ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.2px;"><a rel="attachment wp-att-10917" href="http://www.janokti.com/bihar-election-up-election/%e0%a4%9c%e0%a4%a6%e0%a4%af%e0%a5%82-%e0%a4%ad%e0%a4%be%e0%a4%9c%e0%a4%aa%e0%a4%be-%e0%a4%97%e0%a4%a0%e0%a4%ac%e0%a4%82%e0%a4%a7%e0%a4%a8-%e0%a4%b5%e0%a4%bf%e0%a4%b6%e0%a4%be%e0%a4%b2-%e0%a4%ac/attachment/sushil-modi-and-nitish-kumar11-2/"><img class="alignright size-medium wp-image-10917" title="Sushil-Modi-and-Nitish-Kumar11" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/Sushil-Modi-and-Nitish-Kumar111-300x201.jpg" alt="" width="300" height="201" /></a>नीतीश कुमार ने इस चुनाव में विकास का मुद्दा क्या बनाया जातिवाद और सम्प्रदायवाद से घिरा बिहार का नजारा ही बदल गया. आज पहली बार दिखा कि बिहार की जनता ने ना तो वंशवाद को चलाने वाले को बिहार की जमीन पर टिकने दिया ना ही भाई भतीजावाद करने वाले पार्टियों को बिहार की सत्ता पर काबिज होने का मौका दिया. इस बार महिलाओ ने बिहार के कमान संभाला है. ऐसा </span><span style="font-size: 13.2px;">माना जा रहा है. इस बार नए समीकरण उभरकर सामने आये है. एमएमएम अर्थात महिला-मध्यम वर्ग-मुसलमान| इससे यही साफ हो गया है कि नितीश </span><span style="font-size: 13.2px;">और सुशिल मोदी की गठबंधन सरकार बिहार के जनता की उम्मीदों पर खरे उतरे है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><strong>बिहार विधानसभा में मुख्यमंत्री नीतिश कुमार का जदयू-भाजपा गठबंधन विशाल बहुमत से वापस सत्ता में लौट रहा है.</strong></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.2px;">कुल 243 में से 206 सीटों पर जनता दल यूनाइटेड और भारतीय जनता पार्टी गठबंधन नए रिकॉर्ड जीत कायम </span><span style="font-size: 13.2px;">करना </span><span style="font-size: 13.2px;">तय </span><span style="font-size: 13.2px;">हो चूका है.</span></p>
<p style="text-align: justify;"><span style="font-size: 13.2px;">लालू-पासवान के साथ कोंग्रेस के युवराज को भी करारा जवाब दिया है, बिहार की जनता ने इतने बड़े मतों में अंत</span><span style="font-size: 13.2px;">र से जीताकर.</span></p>
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		<title>दीपावली, आर्य चाणक्य और वर्तमान राजनेता</title>
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		<pubDate>Sun, 07 Nov 2010 09:05:51 +0000</pubDate>
		<dc:creator>सुमंत विद्वांस</dc:creator>
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		<description><![CDATA[दीपावली का उल्लेख हो और दीपों की बात न हो, ये संभव नहीं है। अमावस की रात में आने वाली दीपावली को ये छोटे-छोटे दीप ही रोशन करते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं कि जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अँधेरे को दूर कर देता है, उसी तरह हमारा एक छोटा प्रयास भी एक दिन कोई बड़ा परिवर्तन ला सकता है। बस! मन में उत्साह और अपने संकल्प की पूर्ति के लिये लगन होनी चाहिये। दीपावली के इस अवसर पर दीपों की बात निकली, तो मुझे चाणक्य के जीवन का एक प्रसंग आ रहा है। ]]></description>
			<content:encoded><![CDATA[<p style="text-align: justify;"><a rel="attachment wp-att-10129" href="http://www.janokti.com/sansad-political-news-%e0%a4%b8%e0%a4%be%e0%a4%82%e0%a4%b8%e0%a4%a6-%e0%a4%ae%e0%a4%be%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%97/national-news-%e0%a4%b0%e0%a4%be%e0%a4%b7%e0%a5%8d%e0%a4%9f%e0%a5%8d%e0%a4%b0%e0%a5%80%e0%a4%af/%e0%a4%a6%e0%a5%80%e0%a4%aa%e0%a4%be%e0%a4%b5%e0%a4%b2%e0%a5%80-%e0%a4%86%e0%a4%b0%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%9a%e0%a4%be%e0%a4%a3%e0%a4%95%e0%a5%8d%e0%a4%af-%e0%a4%94%e0%a4%b0-%e0%a4%b5%e0%a4%b0/attachment/chanakya/"><img class="alignright size-full wp-image-10129" title="chanakya" src="http://www.janokti.com/wp-content/uploads/chanakya.gif" alt="" width="288" height="425" /></a>मित्रों,  आप सभी को प्रकाश-पर्व दीपावली पर हार्दिक शुभकामनाएँ! दीपावली का उल्लेख  हो और दीपों की बात न हो, ये संभव नहीं है। अमावस की रात में आने वाली  दीपावली को ये छोटे-छोटे दीप ही रोशन करते हैं और हमें प्रेरणा देते हैं कि  जिस तरह एक छोटा-सा दीपक अँधेरे को दूर कर देता है, उसी तरह हमारा एक छोटा  प्रयास भी एक दिन कोई बड़ा परिवर्तन ला सकता है। बस! मन में उत्साह और अपने  संकल्प की पूर्ति के लिये लगन होनी चाहिये।</p>
<p style="text-align: justify;">ऐसी ही लगन आर्य चाणक्य के मन में थी और उन्होंने  अपनी लगन से उसे पूरा करके दिखाया। अपने अदम्य उत्साह के बल पर उस एक  अकेले व्यक्ति ने कितने सारे महान कार्य पूरे कर दिये। सिकंदर जैसे  आक्रमणकारी को अपनी विशाल सेना के होते हुए भी सैनिकों सहित भारत से बाहर  खदेड़ दिया। एक छोटे-से बालक को अपने योग्य-मार्गदर्शन में सम्राट चंद्रगुप्त मौर्य के रूप में प्रतिष्ठित कर दिया। राजा धनानन्द की मज़बूत सत्ता को उखाड़कर सभी छोटे-बड़े  राजाओं को मौर्य साम्राज्य के अधीन ले आए और पूरे भारत को फिर एक बार उसी  तरह अखण्ड बना दिया, जैसा वह श्रीराम और श्रीकृष्ण के काल में था।</p>
<p style="text-align: justify;">चाणक्य  केवल एक विद्वान ब्राह्मण और अर्थशास्त्री ही नहीं, वरन् एक देशभक्त  राजनीतिज्ञ भी थे। दीपावली के इस अवसर पर दीपों की बात निकली, तो मुझे  चाणक्य के जीवन का एक प्रसंग आ रहा है। यूनान का एक दूत मौर्य साम्राज्य के  मार्गदर्शक आर्य चाणक्य से मिलने के लिये गया। इतने बड़े साम्राज्य के  निर्माता चाणक्य पाटलिपुत्र में गंगा के किनारे एक छोटी-सी कुटिय में निवास  करते थे। रात का समय था। दूत ने देखा कि एक छोटा-सा दीप जल रहा है और उसके  प्रकाश में कौटिल्य अपने लेखन में व्यस्त हैं। इस दूत के आने पर उन्होंने  उसका स्वागत किया और जलता हुआ वह दीप बुझाकर एक दूसरा दीप जला दिया। दोनों  में बात-चीत होने लगे। दूत ने कारण पूछा कि आखिर आपने पहला दीप बुझाकर  दूसरा क्यों जलाया है? तब चाणक्य ने उत्तर दिया कि “वह  जो दीप है, वह मुझे शासकीय कार्य के लिये शासन की ओर से मिला है। उसका  उपयोग मैं अपने व्यक्तिगत कार्यों के लिये कैसे कर सकता हूँ? ये जो दूसरा  दीप है, ये मेरा है। जब आप आए, तो मैं शासकीय कार्य कर रहा था। इसलिये पहला  वाला दीप जल रहा था। लेकिन आपसे जो मेरा वार्तालाप चल रहा है, ये मेरा  निजी कार्य है। इसलिये मैंने पहला वाला दीप बुझाकर दूसरा वाला जला दिया!”</p>
<p style="text-align: justify;">कथा  भले ही छोटी-सी हो, लेकिन इसका मर्म बहुत गहरा है। हम हमेशा महापुरुषों की  ऐसी अनेक कथाएँ और प्रसंग सुनते हैं, लेकिन जब हमारे सामने कोई ऐसा अवसर  आता है, तो क्या हम स्वयं ऐसा व्यवहार करते हैं? हम इस बात पर गर्व करते  हैं कि अतीत में भारत विश्व का सबसे शक्तिशाली, वैभव-संपन्न और समृद्ध  राष्ट्र था, लेकिन क्या हम इस बात पर विचार करते हैं कि वर्तमान भारत इस  दुःस्थिति में क्यों है? हम इस बात के लिये केवल विदेशी हमलावरों को दोष  देकर अपने कर्तव्य से मुँह नहीं मोड़ सकते। विदेशी आक्रमणों की एक हजार  वर्षों की श्रृँखला 1947 में  टूट गई। लेकिन हमारे कुछ अदूरदर्शी और स्वार्थी राजनेताओं और शासकों की  कृपा से देश आज भी असुरक्षित बना हुआ है। हम लगातार आंतरिक और बाह्य  आक्रमणों से जूझ रहे हैं। क्या हमारे राजनेता आर्य चाणक्य से कोई सीख  लेंगे?</p>
<p style="text-align: justify;">आर्य  चाणक्य जैसे महापुरुषों के जीवन का अध्ययन करने पर यह स्पष्ट हो जाता है  कि अतीत में भारत विश्व-गुरु क्यों कहलाता था। अपने निजी कार्य के लिये  शासकीय धन की एक पाई का भी प्रयोग न करने वाले उस महात्मा और शासकीय धन को  अपने घर की संपत्ति समझने वाले वर्तमान राजनेताओं के बीच कोई तुलना भी नहीं  की जा सकती। इनमें ज़मीन-आसमान का अंतर है और यही कारण है कि तत्कालीन  बिश्व-गुरु भारत और वर्तमान संकट-ग्रस्त भारत में भी इतना अंतर है।</p>
<p style="text-align: justify;">यदि  हमें भारत को पुनः विश्व-गुरु बनाना है, तो फिर एक बार उसी मार्ग को  अपनाना पड़ेगा, जो श्रीराम, श्रीकृष्ण और आर्य चाणक्य ने हमें दिखाया है। हम  अमरीका, चीन, यूरोप, रूस या  किसी भी अन्य देश की नकल करके कभी आगे बढ़ सकते। जब तक हम नकल करते रहेंगे,  तब तक हमेशा किसी न किसी से पीछे ही रहेंगे। यदि हम भारत को इसका खोया हुआ  वैभव और स्थान पुनः दिलाना चाहते हैं, तो इसके लिये दो बातों को अपनाना  अनिवार्य है- निःस्वार्थ देशभक्ति और अपने कर्तव्य का ईमानदारी से पालन। ये  दो ऐसे तत्व हैं, जिन्हें आप, मैं और देश का हर सामान्य नागरिक भी सहजता  से अपना सकता है। हमें याद रखना चाहिये कि परिवर्तन तभी हो सकता है, जब  समाज जागृत हो और समाज जागृत तभी होगा जब इसका प्रत्येक सदस्य अपने कर्तव्य  का ईमानदारी और निष्ठा से पालन करे।</p>
<p style="text-align: justify;">आइये,  इस दीपावली पर एक दीप अपने राष्ट्र के नाम जलाएँ और ये संकल्प लें कि हम  राष्ट्र-निर्माण में हरसंभव अपना योगदान देंगे। हर परिवर्तन अब हमें ही  करना है क्योंकि राजनेताओं और राजनीति से तो अब कोई आशा करना भी शायद  व्यर्थ है…शुभ दीपावली!!</p>
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