जनता के साथ हैं और महंगाई के विरोध में
0मॉनसून सत्र के तीसरे दिन भी संसद में हंगामा जारी है | सारा विपक्ष एक स्वर में महंगाई के मुद्दे पर चर्चा और मतदान की मांग पर अड़ा हुआ है
POPULATION SHOULD BE CONTROLLED ANYWAY पिछली जनगणना के बाद जनसंख्या संबंधी आधिकारिक आँकड़े जारी किये गये, राजनीतिक दलों ने अपने-अपने नजरिये से इसे देखा और अपने हिसाब से व्याख्या की।
भारत की वर्तमान स्थिति ऐसी है जिसे राजनेताओं द्वारा जनता की लूट कहा जा सकता है, इसी लूट को भारत की वर्तमान ‘राजनीति‘ कहा जा सकता है. ऐसी स्थिति में
बिहार विधानसभा चुनाव को शांति से संपन्न कराने के लिए एक ओर चुनाव आयोग और राज्य सरकार अपनी तैयारियों में जुटा है वहीं दूसरी ओर राज्य विरोधी नक्सली भी चुनाव
मॉनसून सत्र के तीसरे दिन भी संसद में हंगामा जारी है | सारा विपक्ष एक स्वर में महंगाई के मुद्दे पर चर्चा और मतदान की मांग पर अड़ा हुआ है
‘अयोध्या में मंदिर वहीं, मस्जिद नहीं, बाबरी ढांचा कहीं नहीं।’ ठीक है, ठीक है, इस देश के बहुसंख्यक लोग भी यही चाहते हैं कि राम-मंदिर बने लेकिन साहब किस-किस को
बिहार में विधान सभा चुनाव की घोषणा हो गई है। इसे देख कर कुछ दिनों से बिहार में हर दिन राजनीति में कुछ-न-कुछ हो रहा है। वोट की राजनीति करने
कृषि खेती और वानिकी के माध्यम से खाद्य पदार्थों के उत्पादन से सम्बंधित है.मानव सभ्यता के इतिहास में कृषि की खोज को इतना महत्वपूर्ण माना जाता है कि इसे नवपाषाणकालीन क्रांति
चुनाव नजदीक तो नेता नजदीक। जी हां हम बात कर रहे हैं बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा जारी रिपोर्ट कार्ड की। उन्होंने अपने कार्यकाल में किये कामों की रिपोर्ट
बिहार में 11.500 करोड़ रुपयों के वित्तीय अनियमितता की बात सीएजी की रपट में सामने आई है. ये हेराफेरी का मामला वर्ष 2002 से 2008 के बीच का हैं .पटना
56 से घटकर 30 क्विंटल रह गई यानि ये दावे पूरी तरह गलत हैं, झूठे हैं कि उपज बढ़ाने के लिए रासायनिक खेती की जरूरत है। सच तो यह है
आजादी के 62 वर्षों बाद भी भारत का आम नागरिक,मजदूर-किसान अपने ही नेतृत्व तथा अपने ही द्वारा चुनी गई सरकारों के मनमाने पूर्ण रवैये का शिकार होकर बद से बदतर
अशोक सम्राट की नगरी पाटलिपुत्र, गौतम बुद्ध एवं महाबीर की ज्ञान स्थली, गुरु गोविन्द सिंह की जन्म-स्थली, राजनीति के सबसे बड़े ज्ञाता चाणक्य की धरती, महात्मा गाँधी एवं लोकनायक जयप्रकाश नारायण की कर्म भूमि पर जो माननीय विधायकों
एक के बाद एक सात गमलों का काम तमाम कर दिया ..ऐसी हुंकारे भर रही थी मानो साक्षात देवी काली प्रलय मचाने विधान मंडल में उतर गई हों । अचानक