हिन्दू विवाह पंजीकरण में सुधार ,एक सार्थक पहल
0हमारे देश का संविधान सभी को एक जैसा समान न्याय एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्रदान करके इसकी गारण्टी भी देता है, लेकिन व्यावहारिक क‹डवी सच्चाई इस बात
1- सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार बहु को पीटना क्रूरता नहीं है, तब प्रश्न उठता है कि इन हालातों में आरोपी को पुलिस द्वारा पीटना क्रूरता कैसे हो सकती है? और
स्वयंसेवी संस्था जिसके नाम से ही प्रतीत होता है कि यह संस्था गरीबो, लाचारों, असहाय लोगों की मदद पहुचाती होगी। सरकार भी अफसरशाहों और नौकरशाहों के रवैये से इस कदर
हमारे देश का संविधान सभी को एक जैसा समान न्याय एवं सम्मानपूर्वक जीवन जीने का मौलिक अधिकार प्रदान करके इसकी गारण्टी भी देता है, लेकिन व्यावहारिक क‹डवी सच्चाई इस बात
1- सर्वोच्च न्यायालय के अनुसार बहु को पीटना क्रूरता नहीं है, तब प्रश्न उठता है कि इन हालातों में आरोपी को पुलिस द्वारा पीटना क्रूरता कैसे हो सकती है? और
स्वयंसेवी संस्था जिसके नाम से ही प्रतीत होता है कि यह संस्था गरीबो, लाचारों, असहाय लोगों की मदद पहुचाती होगी। सरकार भी अफसरशाहों और नौकरशाहों के रवैये से इस कदर