शिक्षकों की गुणवत्ता में गिरावट
3विश्वव्यापी आर्थिक संक्रमणकाल में जिसे देखो वही देश के हालात का रोना लेकर बैठा हुआ है। बौद्धिक जुगाली के केंद्र दिल्ली में तो विमर्श की कोई कमी नहीं है। हर
आजाद भारत में जनता के हितों को नजर अंदाज करते हुए केन्द्र की कांग्रेसी सरकार ने गैर जिम्मेदार रवैया दोहराया है।समाजवाद के पुरोधा डा0 राम मनोहर लोहिया ने दशकों पहले
कल देश भर मे बंद का प्रभाव देखा गया , कुछ प्रभाव मैने भी देखे बंद के जिसे अब मैं लिखने जा रहा हूं । सच कहे तो जो स्थिति
अखबारों का क्या दोष है ? अगर डेढ़-दो घंटे की पत्रकार परिषद में आप कोई काम की बात नहीं बोलेंगे तो वही होगा, जो आज अखबारों ने किया है| अगर
विश्वव्यापी आर्थिक संक्रमणकाल में जिसे देखो वही देश के हालात का रोना लेकर बैठा हुआ है। बौद्धिक जुगाली के केंद्र दिल्ली में तो विमर्श की कोई कमी नहीं है। हर
बिहार के छोटे भाई झारखण्ड ने लड़-झगड़ कर नया राज्य बनाया कि जानवरों का चारा तक डकार जाने वाले नेताओं से वनवासी जनता को बचाया जा सके ,उन्हें उनका हक़
इस बढ़ती हुई महंगाई ने सच में आम आदमी की कमर तोड कर रख दी . आज जमाखोखोरी ,कालाबाजारी और मुनाफाखोरी सिर्फ शब्द नहीं है, यह है व्यापार जगत की
देश की नीति-नियती निर्धारित करने वाली राष्ट्रीय राजधानी की गलियों में मंहगाई के खिलाफ गूंजते नारे नक्कारखाने में तूती की बोलती से अधिक कुछ और नहीं है। सशक्त विपक्ष के