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बड़ें फैसले लेने में जल्दबाजी ठीक नहीं

बड़ें फैसले लेने में जल्दबाजी ठीक नहीं

0 राजीव गुप्ता / 2011/11/30 8:20 am

यूपीए - 2  इस समय अपने कार्यकाल के सबसे बुरे दौर से गुजर रही है !  सरकार जल्दबाजी और अपने गलत फैसलों के कारण संसद में रोज नए – नए मुद्दे लाकर समूचे विपक्ष समेत अपने

महंगाई डायन

महंगाई डायन

0 अजय केशरी / 2010/08/03 1:23 pm

लूट..लूट..लूट॥ जंहा देखो वही मची है लूट । आज महंगाई बे-लगाम हो गई है, बाज़ार में मंडी में जहाँ देखो महंगाई चरम सीमा पर पहुँच गई है। इस महंगाई से

जनता के साथ हैं और महंगाई के विरोध में

जनता के साथ हैं और महंगाई के विरोध में

0 जयराम "विप्लव" / 2010/07/29 12:48 pm

मॉनसून सत्र के तीसरे दिन भी संसद में हंगामा जारी है | सारा विपक्ष एक स्वर में महंगाई के मुद्दे पर चर्चा और मतदान की मांग पर अड़ा हुआ है

महंगाई का सरकार ने मारा चांटा

महंगाई का सरकार ने मारा चांटा

0 नरेन्द्र निर्मल / 2010/07/15 11:29 am

दाल चावल आटा सरकार ने मारा चांटा अरे दाल चावल आटा सरकार ने मारा चांटा प्याज नमक को तरस गए हम तो जंगल बेचीं खेत बेच दिया हर टुकड़ा धरती

व्यवस्था परिवर्तन के लिए जनसंघर्ष ही रास्ता

व्यवस्था परिवर्तन के लिए जनसंघर्ष ही रास्ता

1 अरविन्द विद्रोही / 2010/07/08 12:46 pm

आजाद भारत में जनता के हितों को नजर अंदाज करते हुए केन्द्र की कांग्रेसी सरकार ने गैर जिम्मेदार रवैया दोहराया है।समाजवाद के पुरोधा डा0 राम मनोहर लोहिया ने दशकों पहले

बंद में नाच , कार्यकर्ता मस्त और जनता त्रस्त !

बंद में नाच , कार्यकर्ता मस्त और जनता त्रस्त !

0 अनिकेत प्रियदर्शी / 2010/07/06 7:15 pm

कल देश भर मे बंद का प्रभाव देखा गया , कुछ प्रभाव मैने भी देखे बंद के जिसे अब मैं लिखने जा रहा हूं । सच कहे तो जो स्थिति

पीएम कुछ बोले ,यही काफी है !

पीएम कुछ बोले ,यही काफी है !

0 डॉ. वेदप्रताप वैदिक / 2010/05/26 12:04 pm

अखबारों का क्या दोष है ? अगर डेढ़-दो घंटे की पत्रकार परिषद में आप कोई काम की बात नहीं बोलेंगे तो वही होगा, जो आज अखबारों ने किया है| अगर

यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगाँठ

यूपीए सरकार के दूसरे कार्यकाल की पहली वर्षगाँठ

0 रमेश भट्ट / 2010/05/25 8:01 am

यूपीए सरकार ने 22 मई को अपना दूसरे कार्यकाल का पहला जन्मदिन मनाया। वर्तमान हालात में सरकार के पास वैसे तो कहने के लिए बहुत कुछ नही था। मगर ऐसे

प्रणब दा, कोई गुडलक निकालों….

प्रणब दा, कोई गुडलक निकालों….

0 पुष्पेन्द्र आल्बे / 2010/02/22 12:29 pm

26 फरवरी को यूपीए के वित्तमंत्री प्रणब मुखर्जी एक बार फिर देश की जनता के बीच बजट का पिटारा लेकर आने वाले हैं। आम बजट को समर्पित इस तारीख का

शिक्षकों की गुणवत्ता में गिरावट

शिक्षकों की गुणवत्ता में गिरावट

3 जयराम "विप्लव" / 2010/02/21 3:07 pm

विश्वव्यापी आर्थिक संक्रमणकाल में जिसे देखो वही देश के हालात का रोना लेकर बैठा हुआ है। बौद्धिक जुगाली के केंद्र दिल्ली में तो विमर्श की कोई कमी नहीं है। हर