अभिव्यक्ति के नाम पर भड़ास की छूट दे दी जाए?
5इन दिनों सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लगाम कसे जाने की खबर पर हंगामा मचा हुआ है। खासकर बुद्धिजीवियों में अंतहीन बहस छिड़ी हुई है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की दुहाई देते
प्रधानमंत्री जी , इस देश में आपके खिलाफ बहुत गुस्सा है ..अब तो झूठ मत बोलिए | अभी तीन दिन पहले ही आपके प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी आपको “संत ” बता
New accounting terminology to go into effect: 1 करोड़ = 1 खोका 500 करोड़ = 1 कोड़ा 1000 करोड़ = 1 राडिया 10000 करोड़ = 1 कलमाड़ी 100000 करोड़ =
कश्मीर के वर्तमान वजीर ए आला जनाब उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर विधान सभा में दिए गए अपने के ताजा बयान के बाद गहन विवाद में फंसते नजर आए। विफलताओं से
इन दिनों सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर लगाम कसे जाने की खबर पर हंगामा मचा हुआ है। खासकर बुद्धिजीवियों में अंतहीन बहस छिड़ी हुई है। लोकतंत्र में अभिव्यक्ति की दुहाई देते
प्रधानमंत्री जी , इस देश में आपके खिलाफ बहुत गुस्सा है ..अब तो झूठ मत बोलिए | अभी तीन दिन पहले ही आपके प्रवक्ता जनार्दन द्विवेदी आपको “संत ” बता
New accounting terminology to go into effect: 1 करोड़ = 1 खोका 500 करोड़ = 1 कोड़ा 1000 करोड़ = 1 राडिया 10000 करोड़ = 1 कलमाड़ी 100000 करोड़ =
कश्मीर के वर्तमान वजीर ए आला जनाब उमर अब्दुल्ला जम्मू कश्मीर विधान सभा में दिए गए अपने के ताजा बयान के बाद गहन विवाद में फंसते नजर आए। विफलताओं से
कश्मीर की सुलगती घाटी का दौरा करके सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल राजधानी वापस लौट आया। प्रतिनिधि की सिफारिशों के आधार पर केंद्रीय हुकूमत ने मसअला सुलझाने के लिए अब नये फार्मूले पेश
जम्मू-कश्मीर में गत 20 सितम्बर को सांसदों का जो सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल गया था, उसके कुछ सदस्यों ने उन्हीं भूलों को दोहराया है, जिससे यह फोड़ा नासूर बना है। इनसे मिलने
कश्मीर में सर्वदलीय समिति के दौरे के बाद धीरे-धीरे हालात सुधरने लगे हैं ऐसा माना जा रहा है क्योंकि अब घाटी में स्कूल और कॉलेज खुल गये हैं | लेकिन
नव उदारवाद के नाम पर चलाई जा रही नीतियों से लोगों में कितना असंतोष है। लोग अपनी ही चीजों से बेदखल किए जा रहे हैं। विकास के नाम पर प्राकृतिक
कश्मीर पर हुई सर्वदलीय बैठक को कई बागी नेताओं ने निर्थक घोषित कर दिया है। सैयद अली शाह गिलानी का कहना है असली मर्ज़ पर किसी ने उंगली ही नहीं
हमारे टीवी चैनल अभी भी मनोरंजन उन्मुखी हैं और कृषि क्षेत्र को तो प्राथमिकता ना के बराबर दी जाती है | फ़िर भी , भारत कृषि के लिए सबसे बड़ा