करदाताओं से एक सवाल ?
1ईसवी सन १९६४ में – कलकत्ता में – ९ वीं कक्षा में पढ़ते समय कॉलेज स्ट्रीट एवं निकट के स्थानों में अपनी आँखों के सामने कलकत्ता ट्रामवे कंपनी की ५
दूसरों के दुखःदर्द व जुल्म सितम के लिए रोजाना लड़ाई लड़ने वाले कलम के सिपाहियों के हक के लिए कोई खड़ा नहीं दिखता है। समाज में व्याप्त बराबरी-गैरबराबरी से पत्रकारों
देश में मंहगाई आज सातवें आसमान पर पहुच गया है. लोगो के थाल से दाल तो सरकार ने पहले ही हटा दिए. अब सरकार का इरादा चावल और आटे को
आकाश तिवारी बाप रे बाप ऐसी मंहगाई जियेंगे कैसे भाई? कार से लेकर किचन तक मंहगाई मार गई चूल्हे पर खाना पकाओं, साइकिल खरीद लो भाई पहले क्या कम थी मंहगाई जो
ईसवी सन १९६४ में – कलकत्ता में – ९ वीं कक्षा में पढ़ते समय कॉलेज स्ट्रीट एवं निकट के स्थानों में अपनी आँखों के सामने कलकत्ता ट्रामवे कंपनी की ५
दूसरों के दुखःदर्द व जुल्म सितम के लिए रोजाना लड़ाई लड़ने वाले कलम के सिपाहियों के हक के लिए कोई खड़ा नहीं दिखता है। समाज में व्याप्त बराबरी-गैरबराबरी से पत्रकारों
देश में मंहगाई आज सातवें आसमान पर पहुच गया है. लोगो के थाल से दाल तो सरकार ने पहले ही हटा दिए. अब सरकार का इरादा चावल और आटे को
आकाश तिवारी बाप रे बाप ऐसी मंहगाई जियेंगे कैसे भाई? कार से लेकर किचन तक मंहगाई मार गई चूल्हे पर खाना पकाओं, साइकिल खरीद लो भाई पहले क्या कम थी मंहगाई जो